हमारे शरीर को सुचारू रूप से चलाने के लिए कई तरह के पोषक तत्वों की जरूरत होती है, जिनमें विटामिन B12 एक बेहद अहम घटक माना जाता है। यह पोषक तत्व शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण प्रक्रिया को बेहतर बनाने, नसों के सही कामकाज को सुनिश्चित करने और एनर्जी मेटाबॉलिज्म को सुचारू रखने के लिए बेहद जरूरी है। जब शरीर में इस विटामिन की कमी होने लगती है, तो इंसान को लगातार थकान, कमजोरी, हाथ-पैरों में झनझनाहट और चक्कर आने जैसी परेशानियां घेरने लगती हैं। इन लक्षणों से निपटने के लिए लोग अक्सर विभिन्न तरह के सप्लीमेंट्स का सहारा लेते हैं।
हालांकि, कई बार देखने में आता है कि भरपूर मात्रा में सप्लीमेंट्स लेने के बावजूद शरीर में विटामिन B12 का स्तर सामान्य नहीं हो पाता है। लोगों को लगता है कि शायद उनकी डाइट में ही कोई कमी है, लेकिन असल वजह कुछ और ही होती है। इस समस्या के पीछे डाइट के अलावा शरीर के भीतर इस विटामिन के अवशोषण से जुड़ी कई तकनीकी परेशानियां जिम्मेदार हो सकती हैं। डॉक्टर शालिनी सिंह सालुंखे ने विस्तार से समझाया है कि वे कौन सी खास वजहें हैं, जिनकी वजह से सप्लीमेंट्स लेने के बाद भी शरीर में विटामिन B12 का स्तर कम बना रहता है।
खाने को जरूरत से ज्यादा पकाना
विटामिन B12 एक वॉटर-सॉल्युबल विटामिन है, जो अत्यधिक तापमान के प्रति संवेदनशील होता है। जब कोई व्यक्ति विटामिन B12 से भरपूर खाद्य पदार्थों को बहुत लंबे समय तक या तेज आंच पर पकाता है, तो उसमें मौजूद इस पोषक तत्व की मात्रा काफी हद तक कम हो जाती है। यही कारण है कि भोजन को जरूरत से ज्यादा पकाने से बचना चाहिए ताकि उसका पोषण मूल्य सुरक्षित रह सके और शरीर को पूरा लाभ मिल सके।
बहुत ज्यादा मोटापा
शरीर का अत्यधिक वजन और मोटापा भी विटामिन B12 के स्तर को सीधे तौर पर प्रभावित करता है। जब किसी व्यक्ति को मोटापे के साथ-साथ शरीर में सूजन की समस्या होती है और उसका मेटाबॉलिज्म कमजोर हो जाता है, तो शरीर में विटामिन B12 कम होने लगता है। शरीर के भीतर लगातार बनी रहने वाली यह सूजन कोशिकाओं के काम करने के तरीके को बदल देती है, जिसके परिणामस्वरूप विटामिन B12 का सही उपयोग और उसका भंडारण बुरी तरह प्रभावित होता है।
डायबिटीज की दवाइयों का असर
मधुमेह के इलाज में इस्तेमाल होने वाली कुछ दवाइयां, विशेष तौर पर मेटफॉर्मिन, लंबे समय तक सेवन करने पर शरीर में विटामिन B12 के अवशोषण को बाधित कर सकती हैं। इन दवाओं का प्रभाव आंतों पर पड़ता है जिससे पोषक तत्वों को सोखने की क्षमता कम हो जाती है। यही वजह है कि डॉक्टर ऐसे मरीजों को जो लंबे समय से इस तरह की दवाएं ले रहे हैं, समय-समय पर विटामिन B12 की जांच करवाने की सलाह देते हैं।
पेट और पाचन से जुड़ी परेशानियां
किसी भी पोषक तत्व को शरीर में पूरी तरह घुलने-मिलने और अवशोषित होने के लिए पेट और आंतों का स्वस्थ होना बहुत जरूरी है। गैस्ट्राइटिस, आंतों की सूजन या अन्य किसी भी प्रकार की पाचन संबंधी समस्याओं से पीड़ित होने पर शरीर में विटामिन B12 का अवशोषण ठीक से नहीं हो पाता है। ऐसी स्थिति में केवल सप्लीमेंट की गोलियां खाते रहना काफी नहीं होता, बल्कि पेट की मूल समस्या का सही इलाज कराना भी उतना ही जरूरी हो जाता है।
बहुत ज्यादा शराब का सेवन
अत्यधिक मात्रा में शराब पीने की आदत पेट और आंतों की आंतरिक परत को गंभीर नुकसान पहुंचाती है। इस नुकसान की वजह से शरीर में विटामिन B12 को सोखने की क्षमता बेहद कम हो जाती है, जिसके परिणामस्वरूप शरीर में इस जरूरी विटामिन की भारी कमी पैदा हो सकती है।


















