साइंस फिक्शन फिल्मों जैसी बातें, डी-ग्रुप यानी अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के नाम का खौफ और चुटकियों में असली नोट छापने का दावा करने वाला एक शातिर गिरोह अब पुलिस की गिरफ्त में है। इस हाईटेक और सनसनीखेज तरीके से देश के अलग-अलग हिस्सों में 100 से ज्यादा लोगों को ठगने वाले अंतर्राज्यीय सिंडिकेट का पर्दाफाश हो गया है। रायपुर पुलिस ने महाराष्ट्र के पुणे स्थित एक लक्जरी रिसॉर्ट में दबिश देकर इस पूरी साजिश का भंडाफोड़ किया और मौके से 4 करोड़ रुपए नकद बरामद करने के साथ ही 7 शातिर आरोपियों को दबोच लिया।
शातिर तरीका और केमिकल का खेल
इस गिरोह की कार्यशैली बेहद चालाक और सुनियोजित थी। ठगों का यह दल मुख्य रूप से देश के बड़े कारोबारियों और अमीर तबके के लोगों को अपने जाल में फंसाता था। पीड़ितों का भरोसा जीतने के लिए आरोपी एक खास किस्म के केमिकल का इस्तेमाल करते थे। वे दावा करते थे कि इस रासायनिक घोल के जरिए कागज के टुकड़ों को असली नोटों में बदला जा सकता है और रातों-रात संपत्ति को कई गुना बढ़ाया जा सकता है। इस झूठे और लुभावने वादे के झांसे में आकर कई प्रतिष्ठित लोग अपनी पूंजी गंवा बैठते थे।
अंडरवर्ल्ड का डर और रायपुर के कारोबारी से ठगी
सिर्फ लालच ही नहीं, बल्कि यह गिरोह पीड़ितों को मानसिक रूप से डराने के लिए हथकंडे अपनाता था। अपनी धमक बढ़ाने और लोगों को पुलिस या कानून के शिकंजे से दूर रखने के लिए आरोपी खुद को कुख्यात अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के डी-ग्रुप से जुड़ा हुआ बताते थे। इसी डर और मुनाफे के लालच के खतरनाक जाल में फंसकर रायपुर के एक स्थानीय कारोबारी ने अपनी जिंदगी भर की कमाई के 1.13 करोड़ रुपए गंवा दिए थे।
पुणे के रिसॉर्ट में पुलिस की सर्जिकल स्ट्राइक
जब रायपुर के कारोबारी के साथ हुई 1.13 करोड़ रुपए की इस बड़ी ठगी की आधिकारिक शिकायत पुलिस तक पहुंची, तो महकमे में हड़कंप मच गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए रायपुर पुलिस की एक विशेष टीम का गठन किया गया, जिसने तकनीकी और जमीनी सुरागों के आधार पर अपनी जांच शुरू की। तफ्तीश के धागे जुड़ते हुए महाराष्ट्र के पुणे तक जा पहुंचे। पुलिस को पुख्ता सूचना मिली कि यह गिरोह पुणे के खंडाला इलाके के एक रिसॉर्ट में छिपा हुआ है और किसी अन्य बड़े शिकार को अपने जाल में फंसाकर एक और बड़ी डील को अंजाम देने की फिराक में है। ठीक उसी वक्त स्थानीय खुफिया तंत्र की मदद से पुलिस ने रिसॉर्ट पर अचानक छापा मार दिया।
करोड़ों की नकदी और पुराना आपराधिक इतिहास
छापेमारी के दौरान पुलिस ने मौके से 4 करोड़ रुपए से ज्यादा की बेहिसाब नकदी और ठगी में इस्तेमाल होने वाले रासायनिक उपकरण व अन्य सामान बड़ी मात्रा में जब्त किए। इस मामले में मुख्य सरगनाओं समेत कुल 9 आरोपियों को पुलिस अब तक गिरफ्तार कर चुकी है, जिससे इस बड़े नेटवर्क की कमर टूट गई है।
साल 2005 से सक्रिय था यह सिंडिकेट
पुलिस की शुरुआती और गहन पूछताछ में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। जांच से पता चला है कि यह अंतर्राज्यीय गिरोह कोई नया नहीं है, बल्कि साल 2005 से लगातार सक्रिय चला आ रहा है। छत्तीसगढ़ के अलावा नोएडा, पुणे, बड़ौदा, उदयपुर और दिल्ली समेत देश के कई अन्य बड़े शहरों और राज्यों में इन्होंने 100 से अधिक लोगों को अपना निशाना बनाया है। इन ठगों ने अब तक लोगों को झांसा देकर अरबों रुपए की अवैध कमाई की है। रायपुर पुलिस की इस साहसिक और सफल कार्रवाई से न सिर्फ एक खतरनाक सिंडिकेट का खात्मा हुआ है, बल्कि आम जनता को भी यह कड़ा संदेश मिला है कि शॉर्टकट और चमत्कारी तरीकों से पैसे कमाने के लालच से हमेशा दूर रहना चाहिए।


















