हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले में बिजली विभाग और उपभोक्ताओं के बीच स्मार्ट मीटर लगाने को लेकर टकराव गहरा गया है। कपहाड़ा ग्राम पंचायत के प्रधान विनय कुमार शर्मा के घर की बिजली आपूर्ति बोर्ड के कर्मचारियों ने काट दी। इस कार्रवाई की मुख्य वजह यह रही कि उन्होंने अपने परिसर में नया स्मार्ट मीटर लगवाने की अनुमति देने से साफ इनकार कर दिया था। बिजली कटने के तुरंत बाद पंचायत प्रधान ने भी कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। उन्होंने बिजली बोर्ड को दो टूक चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि उनके घर की बिजली तुरंत बहाल नहीं की गई, तो वह अपनी निजी जमीन पर गड़े विभाग के सभी खंभों और तारों को वहां से हटवा देंगे।
दिवंगत पिता के नाम जारी हुआ था 24 घंटे का नोटिस
इस पूरे मामले की शुरुआत बिजली बोर्ड द्वारा थमाए गए एक नोटिस से हुई थी। विनय कुमार शर्मा के अनुसार, बोर्ड ने 14 अक्टूबर को उनके और उनके दिवंगत पिता के नाम पर एक नोटिस जारी किया था। इस नोटिस में स्पष्ट रूप से चेतावनी दी गई थी कि यदि 24 घंटे के भीतर नया स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया पूरी नहीं करने दी गई, तो संबंधित परिसर का बिजली कनेक्शन काट दिया जाएगा। नोटिस की मियाद पूरी होते ही बिजली कर्मियों ने उनके घर की लाइन काट दी। पंचायत प्रधान ने अपने दिवंगत पिता के नाम पर ऐसा नोटिस भेजे जाने पर गहरा रोष जताया और इसे प्रशासनिक संवेदनहीनता करार दिया।
पंचायत के प्रस्ताव और हाईकोर्ट याचिका की अनदेखी का आरोप
कपहाड़ा पंचायत के प्रधान ने बोर्ड की कार्यशैली की तुलना औपनिवेशिक दौर से करते हुए कहा कि उपभोक्ताओं पर जबरन फैसले थोपना अंग्रेजों के दमनकारी कदमों से भी बदतर है। उन्होंने रेखांकित किया कि स्थानीय ग्रामीण स्मार्ट मीटर के संभावित नुकसानों और भारी भरकम बिलों को लेकर बेहद आशंकित हैं। इसी वजह से 9 अगस्त को ग्राम पंचायत ने बाकायदा आम सहमति से एक प्रस्ताव पारित किया था, जिसमें पुराने मीटरों को न हटाने और व्यवस्था यथावत रखने का अनुरोध किया गया था। इस आधिकारिक प्रस्ताव की प्रति अधिशासी अभियंता को भी सौंपी गई थी। इसके अलावा, विनय शर्मा ने इस मनमानी के खिलाफ हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाया है, जहां उनकी याचिका विचाराधीन है। उनका कहना है कि अदालत में मामला होने के बावजूद बोर्ड ने जबरन मीटर लगाने और कनेक्शन काटने की कार्रवाई की।
बिजली बोर्ड ने नियमों का हवाला देकर ठहराया सही
दूसरी तरफ, बिजली बोर्ड अपने रुख पर पूरी तरह अडिग नजर आ रहा है। बोर्ड के सहायक अभियंता रमेश कुमार ने इस विभागीय कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि उपभोक्ताओं को पहले ही इस नीति से अवगत करा दिया गया था। निर्धारित नियमों के तहत जो भी उपभोक्ता नए स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया में बाधा डालेगा या उसे लगवाने से मना करेगा, उसे 24 घंटे का विधिवत नोटिस दिया जाता है। यदि समयावधि के भीतर सहमति नहीं बनती है, तो नियमानुसार बिजली कनेक्शन काटने का प्रावधान है।
राज्य भर में नए मीटरों को लेकर क्यों है असंतोष?
हिमाचल प्रदेश में बिजली बोर्ड पारंपरिक एनालॉग और डिजिटल मीटरों की जगह आधुनिक स्मार्ट मीटर लगाने की मुहिम चला रहा है। शुरुआती चरण में मुख्य रूप से व्यावसायिक और सामान्य उपभोक्ताओं के मीटर बदले जा रहे हैं। हालांकि, राज्य के कई हिस्सों में आम जनता और व्यापारिक वर्ग इसका कड़ा विरोध कर रहे हैं। उपभोक्ताओं का मानना है कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद बिजली के बिलों में बेतहाशा बढ़ोतरी होगी और तकनीकी खामियों के कारण उन्हें आर्थिक बोझ झेलना पड़ेगा। बोर्ड द्वारा बिना जनसुनवाई के तेजी से मीटर बदले जाने को लेकर लोग नाराजगी जता रहे हैं, जिससे आए दिन इस तरह के विवाद सामने आ रहे हैं।





















