हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में मादक पदार्थ विरोधी अभियान के दौरान एक सनसनीखेज घटना सामने आई है, जहाँ तस्करों को पकड़ने गई पुलिस टीम पर ग्रामीणों की उग्र भीड़ ने धावा बोल दिया। यह घटना लगवैली क्षेत्र के जकरेहड़ गाँव में घटी, जब कानून प्रवर्तन अमला नशीले पदार्थों की जब्ती की कार्रवाई में जुटा था। उसी समय स्थानीय पंचायत की महिला प्रधान, उनके पति और उपप्रधान के नेतृत्व में पहुँची भीड़ ने सरकारी कार्य में बाधा डालते हुए पकड़े गए दोनों संदिग्धों को छुड़ा लिया।
गुप्त सूचना पर दबिश और अचानक हुआ हमला
पुलिस अधिकारियों को 17 अक्तूबर को पुख्ता जानकारी मिली थी कि दो संदिग्ध तस्कर पैदल रास्ते से कुल्लू की तरफ भारी मात्रा में चरस लेकर आ रहे हैं। इस सूचना के आधार पर पुलिस दल ने जकरेहड़ इलाके में मोर्चा संभाला। जैसे ही दोनों संदिग्धों ने पुलिस दल को देखा, उन्होंने भागने का प्रयास किया, लेकिन मुस्तैद जवानों ने उन्हें मौके पर ही धर दबोचा। तलाशी के दौरान उनके कब्जे से चरस की खेप बरामद कर ली गई।
इसी बीच गाँव की महिला प्रधान, उनके पति और उपप्रधान करीब 30 से 40 ग्रामीणों के साथ घटनास्थल पर आ धमके। भीड़ ने न केवल पुलिसकर्मियों बल्कि उनके साथ मौजूद स्वतंत्र गवाह के साथ भी धक्का-मुक्की और मारपीट शुरू कर दी। अफरातफरी के माहौल का फायदा उठाकर भीड़ दोनों आरोपियों, उनके बैग और बरामद चरस को जबरन अपने साथ ले गई। इस छीनाझपटी के दौरान कुछ नशीला पदार्थ सड़क पर बिखर गया, जिसमें से पुलिस ने बाद में 508 ग्राम चरस अपने कब्जे में ले ली।
कानूनी शिकंजा और गंभीर धाराओं में केस दर्ज
सरकारी काम में गंभीर रुकावट डालने और पुलिसकर्मियों पर हमले के इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर ली है। इस कार्रवाई में एनडीपीएस अधिनियम की धारा 20 और 29 के साथ-साथ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं को शामिल किया गया है। पुलिस ने पंचायत प्रधान, उनके पति, उपप्रधान और अन्य अज्ञात हमलावरों के खिलाफ केस दर्ज कर उनकी तलाश और पूरे घटनाक्रम की गहन जाँच शुरू कर दी है।
हिमाचल में नशे के खिलाफ बड़े पैमाने पर धरपकड़
राज्य भर में फैले नशीले पदार्थों के जाल को तोड़ने के लिए प्रशासन लगातार सख्त कदम उठा रहा है। पिछले तीन वर्षों के दौरान प्रदेश में एनडीपीएस अधिनियम के तहत कुल 5,642 मामले दर्ज किए जा चुके हैं, जिनमें 8,250 से अधिक लोगों की गिरफ्तारी हुई है। इस कार्रवाई की जद में सरकारी महकमों के लोग भी आए हैं। कुल 139 सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई हुई, जिनमें से नियमों का उल्लंघन करने पर राज्य सरकार के 15 कर्मियों और पुलिस विभाग के 22 कर्मियों को नौकरी से बर्खास्त किया जा चुका है।
जाँच एजेंसियां अब पंचायत स्तर तक सक्रिय संदिग्ध नेटवर्क की पहचान करने में जुटी हैं ताकि स्थानीय निगरानी को मजबूत किया जा सके। बार-बार अपराध करने वाले तस्करों, उनकी संगठित आपूर्ति श्रृंखला और संदिग्ध वित्तीय लेन-देन पर भी नजर रखी जा रही है। इसके अतिरिक्त, पीआईटी-एनडीपीएस कानून के तहत दिसंबर, 2025 तक 46 बड़े नशा तस्करों को हिरासत में लेने और लगभग 46 करोड़ रुपये की अवैध संपत्तियों को कुर्क करने का लक्ष्य तय किया गया है।





















