पाकिस्तान पर 5-3 की जीत के बाद टॉप-8 में पहुंची भारतीय पुरुष हॉकी टीम, सेमीफाइनल का सफर बना चुनौतीपूर्णजर्मनी के मजबूत PPI आंकड़ों से यूरो में तेजी, अमरीकी ट्रेजरी ने बॉन्ड बायबैक दोगुना कियालद्दाख में बनेगी जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट की नई बेंच, अमित शाह ने दी जानकारीमाधुरी दीक्षित के कॉमिक अंदाज ने जीता दर्शकों का दिल, 'हम आपके हैं कौन' से 'टोटल धमाल' तक OTT पर देखें ये 5 बेहतरीन फिल्मेंपलामू में सूक्ष्म खाद्य उद्योग लगाने के लिए सरकार दे रही वित्तीय मदद, 10 लाख तक का कर्ज और 35 फीसदी छूट का मौकाकौमी इंसाफ मोर्चा ने 21 अगस्त को पंजाब बंद का किया आह्वान, जानिए स्कूल, बसें और आवश्यक सेवाओं की स्थितिकोकीन टेस्ट में पॉजिटिव पाए जाने के बाद निक किरियोस पर 1 महीने से 4 साल तक का प्रतिबंध संभवस्टार प्लस के लोकप्रिय शो 'तेरे लिए' के 16 साल, कैलाश खेर का टाइटल ट्रैक आज भी सोशल मीडिया पर मचा रहा धमालरोहतक के कबड्डी खिलाड़ी से तिहाड़ की साज़िशों तक, जानिए हिमांशु भाऊ के मोस्ट वांटेड गैंगस्टर बनने की पूरी कहानीप्राकृतिक आपदा में नुकसान होने पर सरकार से मिलेगी वित्तीय मदद, करौली में SDRF टीम ने बताए आवेदन नियम
गैर-दुग्ध पनीर बेचने पर हिमाचल प्रदेश में पूर्ण प्रतिबंध लागू, दोषी प्रतिष्ठानों पर होगी कड़ी कानूनी कार्रवाईहिमाचल प्रदेश
20 अग॰ 2026, 6:45 pm (2 घंटे पहले)· 2

गैर-दुग्ध पनीर बेचने पर हिमाचल प्रदेश में पूर्ण प्रतिबंध लागू, दोषी प्रतिष्ठानों पर होगी कड़ी कानूनी कार्रवाई

हिमाचल प्रदेश सरकार ने वनस्पति तेल और गैर-दुग्ध सामग्री से बने एनालॉग पनीर के प्रचार और बिक्री पर रोक लगा दी है। खाद्य सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करने वाले कारोबारियों के खिलाफ कानून के तहत सख्त कदम उठाए जाएंगे।

हिमाचल प्रदेश में अब नकली या गैर-दुग्ध उत्पाद को असली पनीर बताकर बेचना पूरी तरह गैरकानूनी कर दिया गया है। राज्य सरकार ने वनस्पति तेल, वनस्पति वसा अथवा अन्य गैर-दुग्ध सामग्रियों के इस्तेमाल से तैयार एनालॉग पनीर की बिक्री, प्रदर्शन और विज्ञापन पर सख्त पाबंदी लगा दी है। यह नया नियम प्रदेश के सभी व्यावसायिक खाद्य प्रतिष्ठानों पर समान रूप से लागू होगा। यदि कोई ढाबा, होटल, रेस्तरां, कैटरिंग सेवा, कैंटीन या मैस अपने व्यंजनों में पनीर के प्रयोग का दावा करता है, तो उसे केवल निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरा उतरने वाला असली दुग्ध निर्मित पनीर ही परोसना होगा।

कारोबारियों के लिए बिल और स्रोत का रिकॉर्ड रखना अनिवार्य

नए सरकारी निर्देशों के मुताबिक पनीर का व्यवसाय करने वाले प्रत्येक कारोबारी को अपनी खरीद से संबंधित सभी दस्तावेज संभालकर रखने होंगे। इनमें खरीद बिल, चालान और उत्पाद की आपूर्ति करने वाले स्रोत की पूरी जानकारी शामिल है। खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम जांच अभियानों के दौरान इन सभी प्रपत्रों का भौतिक सत्यापन कर सकती है। यदि निरीक्षण के समय नियमों की अनदेखी या गड़बड़ी पाई जाती है, तो खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को संदिग्ध उत्पाद के नमूने एकत्र करने का पूर्ण अधिकार होगा। आवश्यकता पड़ने पर अधिकारी संबंधित सामग्री को तुरंत जब्त कर सकते हैं, उसकी बिक्री पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा सकते हैं या बाजार से पूरा स्टॉक वापस मंगाने के आदेश जारी कर सकते हैं। नियमों का उल्लंघन करने वाली इकाइयों पर खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के प्रावधानों के तहत कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

ये भी पढ़ें

पूरे राज्य में एक वर्ष तक प्रभावी रहेगा यह नया आदेश

सरकार का यह कड़ा आदेश संपूर्ण हिमाचल प्रदेश क्षेत्र में लागू किया गया है। राजपत्र में इसके आधिकारिक प्रकाशन की तिथि से यह निर्देश अगले एक वर्ष की अवधि तक लागू रहेगा, जब तक कि सरकार द्वारा इसे वापस न लिया जाए या इसमें कोई संशोधन न किया जाए। आगामी त्यौहारों जैसे रक्षाबंधन और दिवाली के समय बाजार में मिलावटखोरों की सक्रियता काफी बढ़ जाती है। ऐसे मौकों पर अधिक मुनाफा कमाने के लालच में सिंथेटिक और एनालॉग पनीर को असली दूध से बना बताकर उपभोक्ताओं को ठगा जाता है। इस नए प्रतिबंध से खाद्य पदार्थों में मिलावट करने वाले तत्वों पर अंकुश लगेगा और आम जनता के स्वास्थ्य की रक्षा की जा सकेगी।

कम लागत और अधिक मुनाफे के कारण बढ़ा एनालॉग पनीर का चलन

एनालॉग पनीर वास्तव में दूध के बजाय वनस्पति वसा से तैयार किया जाता है, जिसके कारण इसकी उत्पादन लागत असली पनीर की तुलना में बहुत कम होती है। साधारण ग्राहक अक्सर इसकी कम कीमत और असली पनीर जैसी बनावट के धोखे में आ जाते हैं। कई विक्रेता भी अधिक मार्जिन के चक्कर में ग्राहकों को उत्पाद की वास्तविक संरचना के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं देते। खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा चलाए गए हालिया जांच अभियानों के दौरान जब बाजार से लिए गए एनालॉग पनीर के सैंपलों का परीक्षण किया गया, तो वे गुणवत्ता मानकों पर विफल साबित हुए। अकेले मंडी जिले में ही इस तरह के गैर-दुग्ध पनीर के 20 से अधिक सैंपल प्रयोगशाला जांच में फेल पाए गए हैं, जिसके बाद प्रशासन को यह सख्त निर्णय लेना पड़ा।

सवाल-जवाब

एनालॉग पनीर क्या होता है?
एनालॉग पनीर दूध के बजाय वनस्पति तेल, वनस्पति वसा और अन्य गैर-दुग्ध सामग्रियों से तैयार किया जाता है।
हिमाचल प्रदेश में किन-किन स्थानों पर यह प्रतिबंध लागू होगा?
यह पाबंदी प्रदेश के सभी होटल, रेस्तरां, ढाबों, कैटरिंग सेवाओं, कैंटीन और मैस सहित सभी खाद्य प्रतिष्ठानों पर लागू होगी।
नियमों का पालन कराने के लिए कारोबारियों को क्या करना होगा?
पनीर बेचने वाले व्यवसायियों को खरीद के बिल, चालान और आपूर्ति के स्रोत का रिकॉर्ड सुरक्षित रखना होगा।
सरकार का यह प्रतिबंध कितने समय तक प्रभावी रहेगा?
यह आदेश राजपत्र में प्रकाशन की तारीख से एक वर्ष तक पूरे हिमाचल प्रदेश में प्रभावी रहेगा।
मंडी जिले में कितने सैंपल जांच में फेल पाए गए थे?
खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच के दौरान अकेले मंडी जिले में ही एनालॉग पनीर के 20 से अधिक सैंपल फेल हुए थे।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 1

Karan Malhotra@karan-malhotra·41 मिनट पहले

त्योहारों के मौसम से ठीक पहले हिमाचल सरकार द्वारा उठाया गया यह कदम जनस्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। एक क्राइम संवाददाता के रूप में मेरा मानना है कि केवल प्रशासनिक आदेश और एक साल का प्रतिबंधकाफी नहीं होगा, बल्कि मिलावटखोरों के सिंडिकेट को तोड़ने के लिए खाद्य सुरक्षा विभाग को पुलिस बल के साथ मिलकर राज्य की सीमाओं पर सख्त निगरानी रखनी होगी और दोषियों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत त्वरित अदालती कार्रवाई सुनिश्चित करनी होगी, तभी इस अवैध कारोबार पर पूरी तरह लगाम लगेगी।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR