हिमाचल प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में बीते 24 घंटों से जारी मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया है। पहाड़ी ढलानों पर हो रहे भूस्खलन और नदियों के बढ़ते जलस्तर से राज्य में गंभीर स्थिति पैदा हो गई है। सिरमौर जिले के एक खनन क्षेत्र में पहाड़ी से गिरे भारी मलबे की चपेट में आने से तीन श्रमिकों की मौत हो गई, जबकि ऊना जिले के बंगाणा उपमंडल में सुरक्षा के मद्देनजर बुधवार को तमाम स्कूल और कॉलेज बंद कर दिए गए हैं। कांगड़ा जिले के देहरा क्षेत्र में नदी के उफान में एक कार बह जाने की घटना सामने आई है। इसके साथ ही चंबा और कांगड़ा में मंगलवार शाम को आए दो क्रमिक भूकंप के झटकों ने लोगों के बीच खौफ और बढ़ा दिया है। मौसम विज्ञान केंद्र ने स्थिति को देखते हुए आगामी तीन दिनों के लिए पूरे प्रदेश में येलो अलर्ट जारी किया है।
सिरमौर में खान हादसा और राहत अभियान का हाल
सिरमौर जिले की कामरऊ तहसील के अंतर्गत आने वाले बागनाधार खनन क्षेत्र में मंगलवार को एक बड़ा हादसा सामने आया। शिलाई इलाके के बाँगनधार माइन्स में अचानक पहाड़ी का एक बड़ा हिस्सा ढह गया, जिसकी चपेट में आकर तीन खदान कर्मी मलबे के नीचे दब गए। इस आपदा में बड़वास गांव के निवासी अनिल कुमार के अलावा नेपाल के रहने वाले 65 वर्षीय गजेंद्र सिंह और 68 वर्षीय धन सिंह की मौत हो गई। घटना के बाद से ही राहत एवं बचाव कार्य जारी है, लेकिन लगातार गिरते पत्थरों और इलाके में छाए घने कोहरे के कारण शवों को बाहर निकालने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
प्रशासनिक स्तर पर राहत कार्यों की निगरानी की जा रही है और मौके पर राहत टीमें मुस्तैद हैं। परिस्थितियों की गंभीरता को देखते हुए NDRF की टीम को भी घटनास्थल के लिए रवाना किया गया है। सिरमौर की DC प्रियंका वर्मा ने इस दुखद हादसे की पुष्टि करते हुए बताया कि बाँगनधार खनन क्षेत्र में मलबे की चपेट में आने से तीन लोगों की जान गई है, जिनमें दो व्यक्ति नेपाली मूल के हैं और एक स्थानीय निवासी हैं। इसके अतिरिक्त DC प्रियंका वर्मा ने राहत की खबर देते हुए यह भी जानकारी साझा की कि मातर क्षेत्र में भारी बारिश के कारण फंसे स्कूली बच्चों और शैक्षणिक कर्मचारियों को सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया गया है।
हिमाचल में बारिश का रिकॉर्ड तोड़ आंकड़ा और स्थानीय असर
मौसम विभाग के शिमला केंद्र द्वारा बुधवार सुबह जारी किए गए आधिकारिक बुलेटिन के अनुसार, पिछले 12 घंटों के दौरान प्रदेश के कई जिलों में भारी से अत्यधिक भारी वर्षा दर्ज की गई है। हमीरपुर जिले के सुजानपुर टीहरा में सबसे ज्यादा 156.4 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई। इसके अलावा बिलासपुर जिले के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल नैना देवी में 138.6 मिमी और हमीरपुर के नादौन में 128.4 मिमी वर्षा दर्ज हुई।
कांगड़ा जिले के मुख्यालय धर्मशाला में 127.2 मिमी, ऊना जिले के भरवाईं क्षेत्र में 118.0 मिमी और कांगड़ा शहर में 111.0 मिमी बारिश दर्ज की गई है। इसके साथ ही पालमपुर में भी 111.0 मिमी वर्षा हुई, जबकि नगरोटा सूरियां में 90.8 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई। बुधवार को भी मंडी, कुल्लू, ऊना और कांगड़ा जिलों में लगातार तेज बारिश का दौर जारी रहा। ऊना के बंगाणा में बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन ने सभी सरकारी व निजी स्कूलों और कॉलेजों में अवकाश घोषित कर दिया। वहीं कांगड़ा के देहरा में तेज बहाव के कारण नदी में कार बह जाने से इलाके में हड़कंप मच गया। मौसम विभाग ने आगामी तीन दिनों तक सतर्क रहने की चेतावनी जारी की है।
चंबा और कांगड़ा में भूकंप से फैली दहशत
बारिश के कहर के बीच मंगलवार शाम हिमाचल प्रदेश के दो जिलों में महसूस किए गए भूकंप के झटकों ने लोगों की चिंताएं और बढ़ा दीं। चंबा और कांगड़ा जिलों में आए इन झटकों से घबराकर लोग अपने घरों से बाहर निकल आए। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) के अनुसार, पहला भूकंप शाम 6:54 बजे चंबा जिले में दर्ज किया गया, जिसकी तीव्रता 3.6 मापी गई। इस भूकंप का केंद्र करेरी के समीप जमीन से केवल 5 किलोमीटर की गहराई में स्थित था।
पहले झटके के ठीक 45 मिनट बाद, यानी शाम लगभग 7:39 बजे कांगड़ा जिले में भी इसी तीव्रता श्रेणी का दूसरा भूकंप महसूस किया गया। कांगड़ा में आए भूकंप का केंद्र भी जमीन के भीतर 5 किलोमीटर की गहराई पर ही था। चूंकि दोनों भूकंपों की गहराई बेहद कम थी, इसलिए इनके झटके धरातल पर काफी तेज महसूस किए गए। हालांकि, प्रशासनिक अधिकारियों ने बुधवार को स्पष्ट किया कि इन भूकंपीय झटकों से किसी भी प्रकार के जान-माल के नुकसान या भवनों की क्षति की सूचना नहीं मिली है। जिला प्रशासन और संबंधित एजेंसियां पूरी स्थिति पर निगरानी बनाए हुए हैं। उल्लेखनीय है कि कांगड़ा और चंबा दोनों जिले भूकंपीय क्षेत्र-5 (Seismic Zone-5) के अंतर्गत आते हैं, जिसे अति-संवेदनशील और उच्च जोखिम वाला क्षेत्र माना जाता है।
सड़कों, बिजली और पानी की आपूर्ति पर पड़ा भारी असर
राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA) द्वारा बुधवार सुबह 10:00 बजे जारी किए गए आंकड़ों से प्रदेश में बुनियादी ढांचे को पहुंचे नुकसान की भयावह तस्वीर साफ होती है। मूसलाधार बारिश और भूस्खलन के कारण पूरे हिमाचल प्रदेश में 279 प्रमुख व ग्रामीण सड़कें पूरी तरह से यातायात के लिए बंद हो चुकी हैं। सबसे ज्यादा प्रभावित सड़कों में चंबा, मंडी, कुल्लू, लाहौल-स्पीति और शिमला जिलों के मार्ग शामिल हैं, जिससे कई दूरस्थ क्षेत्रों का संपर्क कट गया है।
सड़क संपर्क के अलावा सार्वजनिक उपयोगिताओं पर भी गहरा असर पड़ा है। प्रदेश भर में 310 पेयजल योजनाएं ठप्प हो गई हैं, जिससे कई बस्तियों में पीने के पानी का संकट खड़ा हो गया है। इसके साथ ही विद्युत आपूर्ति प्रणाली को भी झटका लगा है और 84 बिजली ट्रांसफार्मर पूरी तरह से ठप्प हो चुके हैं, जिससे कई गांव अंधेरे में डूब गए हैं। संबंधित विभागों की मशीनरी और कर्मचारी बंद सड़कों को खोलने तथा बिजली-पानी की व्यवस्था बहाल करने के काम में जुटे हुए हैं।





















