हिमाचल प्रदेश की राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने हिमकेयर योजना में हुई कथित वित्तीय और प्रशासनिक गड़बड़ियों की जांच के सिलसिले में भरमौर सीट से भाजपा विधायक डॉक्टर जनक राज को पूछताछ के लिए तलब किया है। सतर्कता विभाग की ओर से जारी किए गए आधिकारिक नोटिस के अनुसार, डॉक्टर जनक राज को 20 अगस्त 2026 की सुबह 11:30 बजे जांच अधिकारी के समक्ष पेश होने का निर्देश दिया गया है। उनके पास अपनी सुविधा के अनुसार शिमला स्थित राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के मुख्यालय या फिर आईजीएमसी शिमला के वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक कार्यालय में उपस्थित होने का विकल्प मौजूद रहेगा।
आईजीएमसी शिमला में कार्यकाल और निगरानी संबंधी जिम्मेदारियां
जांच एजेंसी द्वारा जारी नोटिस में उल्लेख किया गया है कि राज्य सरकार के दिशा-निर्देशों के तहत इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (आईजीएमसी) शिमला में हिमकेयर योजना के क्रियान्वयन, संचालन और प्रशासनिक व्यवस्थाओं की गहन पड़ताल की जा रही है। जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया है कि वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक कार्यालय के पास इस स्वास्थ्य योजना के सुचारू संचालन, प्रशासनिक देखरेख और निगरानी की मुख्य जिम्मेदारी थी। सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक, डॉक्टर जनक राज 31 मार्च 2018 से लेकर 18 अक्टूबर 2022 तक आईजीएमसी शिमला में वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक के पद पर कार्यरत थे।
विजिलेंस की शुरुआती जांच में यह बात भी सामने आई है कि डॉक्टर जनक राज के इस चार साल से अधिक लंबे कार्यकाल के दौरान हिमकेयर योजना के तहत चार कैंसर मरीजों का इलाज किया गया था। इस इलाज पर हुए सरकारी खर्च और प्रशासनिक स्वीकृतियों के संबंध में ही सतर्कता विभाग उनसे विस्तार से जानकारी हासिल करना चाहता है। अधिकारियों का कहना है कि तत्कालीन वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक होने के नाते योजना के तहत स्वीकृत बजट और दावों के सत्यापन में उनकी भूमिका की जांच जरूरी है।
100 करोड़ के कथित घोटाले और अजीबोगरीब दावों का मामला
हिमाचल प्रदेश की मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की अगुवाई वाली सरकार ने पूर्ववर्ती जयराम सरकार के दौरान शुरू की गई हिमकेयर योजना की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए थे। मुख्यमंत्री सुक्खू ने सार्वजनिक रूप से बयान देते हुए आरोप लगाया था कि इस स्वास्थ्य योजना के क्रियान्वयन में लगभग 100 करोड़ रुपये का भारी घोटाला हुआ है। सरकार का दावा है कि योजना के तहत व्यापक वित्तीय अनियमितताएं की गईं और ऐसे फर्जी मामले भी दर्ज किए गए जहां पुरुष मरीजों के कागजों पर बच्चेदानी (गर्भाशय) के इलाज और ऑपरेशन के नाम पर बिल भुनाए गए।
इन गंभीर आरोपों पर पलटवार करते हुए डॉक्टर जनक राज ने मुख्यमंत्री के दावों को खारिज किया था। उन्होंने चिकित्सीय दलील देते हुए कहा था कि कुछ दुर्लभ चिकित्सीय स्थितियों में पुरुषों के शरीर में भी बच्चेदानी संबंधी ऊतक हो सकते हैं और वह इस बात को वैज्ञानिक रूप से साबित करने के लिए तैयार हैं। डॉक्टर जनक राज ने चुनौती देते हुए कहा था कि यदि वह अपनी इस डॉक्टरी दलील में गलत साबित होते हैं, तो वह राजनीति के साथ-साथ चिकित्सा पेशे से भी हमेशा के लिए संन्यास ले लेंगे।
नादौन में स्वास्थ्य शिविर पर हुआ था विवाद
विजिलेंस समन की इस कार्रवाई से ठीक एक दिन पहले बुधवार को डॉक्टर जनक राज नादौन इलाके में एक मुफ्त मेडिकल जांच शिविर का आयोजन कर रहे थे। शिविर के दौरान उस समय काफी हंगामा और विवाद देखने को मिला जब स्थानीय पुलिस टीम मौके पर पहुंची। पुलिस अधिकारियों ने आयोजकों और डॉक्टर जनक राज से इस स्वास्थ्य जांच शिविर के आयोजन से जुड़ी आवश्यक प्रशासनिक अनुमतियों और कागजातों की मांग की, जिसको लेकर काफी देर तक माहौल गरमाया रहा।
विपक्ष के विधायकों पर लगातार कसता शिकंजा
डॉक्टर जनक राज हिमाचल प्रदेश के दूसरे ऐसे भाजपा विधायक हैं जो हाल के दिनों में राज्य की जांच एजेंसियों के निशाने पर आए हैं। इससे पहले विजिलेंस विभाग ने धर्मशाला से भाजपा विधायक सुधीर शर्मा से आय से अधिक संपत्ति के मामले में पूछताछ की थी। सुधीर शर्मा के खिलाफ राज्य सरकार की सिफारिश पर 29 जुलाई 2026 को मामला दर्ज किया गया था और फिलहाल उनके आय-व्यय के रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं।
दूसरी तरफ, भारतीय जनता पार्टी ने सुक्खू सरकार की इस कार्रवाई के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराया है। भाजपा नेताओं का आरोप है कि राज्य सरकार राजनीतिक द्वेष की भावना से काम कर रही है और विरोधी दल के विधायकों को जानबूझकर कानून प्रवर्तन एजेंसियों का सहारा लेकर निशाना बनाया जा रहा है।





















