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विजिलेंस के शिकंजे में भाजपा विधायक डॉक्टर जनक राज, हिमकेयर योजना मामले में शिमला में होगी पूछताछराजनीति
20 अग॰ 2026, 8:19 am (1 घंटे पहले)· 2

विजिलेंस के शिकंजे में भाजपा विधायक डॉक्टर जनक राज, हिमकेयर योजना मामले में शिमला में होगी पूछताछ

हिमाचल प्रदेश में हिमकेयर योजना की जांच के सिलसिले में राज्य सतर्कता ब्यूरो ने भरमौर से भाजपा विधायक डॉक्टर जनक राज को तलब किया है। आईजीएमसी शिमला के पूर्व वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक रहे जनक राज से 20 अगस्त को पूछताछ की जाएगी।

हिमाचल प्रदेश की राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने हिमकेयर योजना में हुई कथित वित्तीय और प्रशासनिक गड़बड़ियों की जांच के सिलसिले में भरमौर सीट से भाजपा विधायक डॉक्टर जनक राज को पूछताछ के लिए तलब किया है। सतर्कता विभाग की ओर से जारी किए गए आधिकारिक नोटिस के अनुसार, डॉक्टर जनक राज को 20 अगस्त 2026 की सुबह 11:30 बजे जांच अधिकारी के समक्ष पेश होने का निर्देश दिया गया है। उनके पास अपनी सुविधा के अनुसार शिमला स्थित राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के मुख्यालय या फिर आईजीएमसी शिमला के वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक कार्यालय में उपस्थित होने का विकल्प मौजूद रहेगा।

आईजीएमसी शिमला में कार्यकाल और निगरानी संबंधी जिम्मेदारियां

जांच एजेंसी द्वारा जारी नोटिस में उल्लेख किया गया है कि राज्य सरकार के दिशा-निर्देशों के तहत इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (आईजीएमसी) शिमला में हिमकेयर योजना के क्रियान्वयन, संचालन और प्रशासनिक व्यवस्थाओं की गहन पड़ताल की जा रही है। जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया है कि वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक कार्यालय के पास इस स्वास्थ्य योजना के सुचारू संचालन, प्रशासनिक देखरेख और निगरानी की मुख्य जिम्मेदारी थी। सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक, डॉक्टर जनक राज 31 मार्च 2018 से लेकर 18 अक्टूबर 2022 तक आईजीएमसी शिमला में वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक के पद पर कार्यरत थे।

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विजिलेंस की शुरुआती जांच में यह बात भी सामने आई है कि डॉक्टर जनक राज के इस चार साल से अधिक लंबे कार्यकाल के दौरान हिमकेयर योजना के तहत चार कैंसर मरीजों का इलाज किया गया था। इस इलाज पर हुए सरकारी खर्च और प्रशासनिक स्वीकृतियों के संबंध में ही सतर्कता विभाग उनसे विस्तार से जानकारी हासिल करना चाहता है। अधिकारियों का कहना है कि तत्कालीन वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक होने के नाते योजना के तहत स्वीकृत बजट और दावों के सत्यापन में उनकी भूमिका की जांच जरूरी है।

100 करोड़ के कथित घोटाले और अजीबोगरीब दावों का मामला

हिमाचल प्रदेश की मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की अगुवाई वाली सरकार ने पूर्ववर्ती जयराम सरकार के दौरान शुरू की गई हिमकेयर योजना की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए थे। मुख्यमंत्री सुक्खू ने सार्वजनिक रूप से बयान देते हुए आरोप लगाया था कि इस स्वास्थ्य योजना के क्रियान्वयन में लगभग 100 करोड़ रुपये का भारी घोटाला हुआ है। सरकार का दावा है कि योजना के तहत व्यापक वित्तीय अनियमितताएं की गईं और ऐसे फर्जी मामले भी दर्ज किए गए जहां पुरुष मरीजों के कागजों पर बच्चेदानी (गर्भाशय) के इलाज और ऑपरेशन के नाम पर बिल भुनाए गए।

इन गंभीर आरोपों पर पलटवार करते हुए डॉक्टर जनक राज ने मुख्यमंत्री के दावों को खारिज किया था। उन्होंने चिकित्सीय दलील देते हुए कहा था कि कुछ दुर्लभ चिकित्सीय स्थितियों में पुरुषों के शरीर में भी बच्चेदानी संबंधी ऊतक हो सकते हैं और वह इस बात को वैज्ञानिक रूप से साबित करने के लिए तैयार हैं। डॉक्टर जनक राज ने चुनौती देते हुए कहा था कि यदि वह अपनी इस डॉक्टरी दलील में गलत साबित होते हैं, तो वह राजनीति के साथ-साथ चिकित्सा पेशे से भी हमेशा के लिए संन्यास ले लेंगे।

नादौन में स्वास्थ्य शिविर पर हुआ था विवाद

विजिलेंस समन की इस कार्रवाई से ठीक एक दिन पहले बुधवार को डॉक्टर जनक राज नादौन इलाके में एक मुफ्त मेडिकल जांच शिविर का आयोजन कर रहे थे। शिविर के दौरान उस समय काफी हंगामा और विवाद देखने को मिला जब स्थानीय पुलिस टीम मौके पर पहुंची। पुलिस अधिकारियों ने आयोजकों और डॉक्टर जनक राज से इस स्वास्थ्य जांच शिविर के आयोजन से जुड़ी आवश्यक प्रशासनिक अनुमतियों और कागजातों की मांग की, जिसको लेकर काफी देर तक माहौल गरमाया रहा।

विपक्ष के विधायकों पर लगातार कसता शिकंजा

डॉक्टर जनक राज हिमाचल प्रदेश के दूसरे ऐसे भाजपा विधायक हैं जो हाल के दिनों में राज्य की जांच एजेंसियों के निशाने पर आए हैं। इससे पहले विजिलेंस विभाग ने धर्मशाला से भाजपा विधायक सुधीर शर्मा से आय से अधिक संपत्ति के मामले में पूछताछ की थी। सुधीर शर्मा के खिलाफ राज्य सरकार की सिफारिश पर 29 जुलाई 2026 को मामला दर्ज किया गया था और फिलहाल उनके आय-व्यय के रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं।

दूसरी तरफ, भारतीय जनता पार्टी ने सुक्खू सरकार की इस कार्रवाई के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराया है। भाजपा नेताओं का आरोप है कि राज्य सरकार राजनीतिक द्वेष की भावना से काम कर रही है और विरोधी दल के विधायकों को जानबूझकर कानून प्रवर्तन एजेंसियों का सहारा लेकर निशाना बनाया जा रहा है।

सवाल-जवाब

विजिलेंस ब्यूरो ने किस विधायक को समन भेजा है?
हिमाचल प्रदेश के भरमौर से भाजपा विधायक डॉक्टर जनक राज को विजिलेंस ब्यूरो ने हिमकेयर योजना में कथित गड़बड़ी की जांच के लिए तलब किया है।
डॉक्टर जनक राज को पूछताछ के लिए कब बुलाया गया है?
डॉक्टर जनक राज को 20 अगस्त 2026 को सुबह 11:30 बजे शिमला में विजिलेंस ब्यूरो मुख्यालय या आईजीएमसी शिमला के वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक कार्यालय में उपस्थित होने के लिए कहा गया है।
हिमकेयर योजना को लेकर क्या मुख्य आरोप लगाए गए हैं?
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने हिमकेयर योजना में 100 करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप लगाया है, जिसमें पुरुषों के नाम पर भी बच्चेदानी के इलाज के फर्जी बिल बनाने की बात कही गई है।
आईजीएमसी शिमला में डॉक्टर जनक राज का कार्यकाल क्या था?
डॉक्टर जनक राज 31 मार्च 2018 से 18 अक्टूबर 2022 तक आईजीएमसी शिमला में वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक के पद पर तैनात थे।
हाल ही में विजिलेंस ने किस अन्य भाजपा विधायक से पूछताछ की थी?
धर्मशाला से भाजपा विधायक सुधीर शर्मा से विजिलेंस ने 29 जुलाई 2026 को दर्ज आय से अधिक संपत्ति के एक मामले में पूछताछ की थी।
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टिप्पणियाँ 2

Ravikash Gupta@ravikash·48 मिनट पहले

हिमकेयर योजना में संभावित वित्तीय अनियमितताओं और १०० करोड़ के कथित घोटाले की यह जांच राज्य के स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र के कॉरपोरेट और प्रशासनिक ढांचे पर गहरा प्रभाव डाल सकती है। यदि जांच एजेंसियों को वित्तीय प्रबंधन में गंभीर खामियां मिलती हैं, तो इसका असर केवल राजनीतिक गलियारों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के ऑडिट और अनुपालन (कंपलायंस) के मानकों को भी पूरी तरह से बदल देगा। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस मामले में कॉरपोरेट गवर्नेंस और प्रशासनिक जवाबदेही तय करने के लिए किस प्रकार के वित्तीय नियंत्रण लागू किए जाते हैं।

Rohan Verma@rohan-verma·47 मिनट पहले

इस मामले का राजनीतिक दायरा अब केवल प्रशासनिक पूछताछ तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि यह विपक्षी दल के विधायक और सत्तापक्ष के बीच एक बड़ा राजनीतिक टकराव बनता जा रहा है। आईजीएमसी के पूर्व अधीक्षक के रूप में डॉक्टर जनक राज का कार्यकाल और उनके द्वारा दिए गए चिकित्सीय तर्क इस जांच को तकनीकी रूप से पेचीदा बना रहे हैं। यदि विजिलेंस जांच आगे बढ़ती है, तो पूर्व सरकार की इस महत्वाकांक्षी स्वास्थ्य योजना के क्रियान्वयन और दावों के सत्यापन पर और सवाल उठेंगे, जिसका सीधा असर आगामी राजनीतिक समीकरणों और क्षेत्रीय नेतृत्व की छवि पर पड़ना तय है।

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