हिमाचल प्रदेश में पिछले दो दिनों तक जारी रहने वाली मूसलाधार बारिश के बाद आखिरकार धूप खिलने से लोगों को आंशिक राहत मिली है। हालांकि, मौसम विभाग की ओर से जारी ताजा पूर्वानुमान के अनुसार यह राहत अस्थाई साबित हो सकती है। विभाग ने राज्य के कई क्षेत्रों के लिए येलो अलर्ट जारी करते हुए फिर से मध्यम से भारी बारिश की संभावना जताई है। बीते चौबीस घंटों में राज्य भर में हुए भूस्खलन और अचानक आई बाढ़ के कारण जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। सिरमौर जिले के कफोटा क्षेत्र में पहाड़ी से गिरे मलबे में दबे तीन व्यक्तियों के शवों को चौबीस घंटे लंबे चले बचाव अभियान के बाद बाहर निकाल लिया गया। इसके अतिरिक्त, प्रदेश भर में पहाड़ी खिसकने की वजह से बुधवार शाम तक एक राष्ट्रीय राजमार्ग सहित कुल 167 सड़कें यातायात के लिए पूरी तरह बंद हो चुकी थीं।
आगामी दिनों के लिए मौसम विभाग का पूर्वानुमान और चेतावनी
मौसम विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों के अनुसार 20 अगस्त के बाद राज्य में अत्यधिक भारी वर्षा का कोई व्यापक अलर्ट नहीं है। इसके साथ ही 23 अगस्त के पश्चात मानसूनी गतिविधियों में उल्लेखनीय कमी दर्ज किए जाने का अनुमान लगाया गया है। हालांकि, इस समयावधि के दौरान कई जिलों में घने बादलों की आवाजाही बनी रहेगी और हल्की से मध्यम बारिश का दौर देखने को मिलेगा। 22 अगस्त तक प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में हल्की से मध्यम वर्षा के साथ-साथ कुछ स्थानों पर तेज बौछारें पड़ने की चेतावनी दी गई है। इसके पश्चात 23 अगस्त को भी कुछ इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश जारी रहने का अंदेशा जताया गया है।
दैनिक जिलावार पूर्वानुमान के मुताबिक गुरुवार को ऊना, चंबा और कांगड़ा जिलों में बारिश होने के आसार जताए गए हैं। 21 अगस्त को कांगड़ा जिले के लिए भारी बारिश का विशेष अलर्ट जारी किया गया है। इसके बाद 22 अगस्त को मौसम का प्रकोप बढ़ने की आशंका है, जिसके तहत कांगड़ा, मंडी, शिमला, सोलन और सिरमौर जिलों के विभिन्न क्षेत्रों में भारी वर्षा होने का अंदेशा व्यक्त किया गया है। 22 अगस्त के दिन शिमला शहर और आसपास के इलाकों में कुछ स्थानों पर तेज वर्षा हो सकती है, जबकि मंडी, सोलन और सिरमौर के अलग-अलग क्षेत्रों में मध्यम से भारी बौछारें गिरने का अनुमान है। पहाड़ी और उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में आगामी कुछ दिनों तक रुक-रुक कर बारिश का सिलसिला जारी रहेगा। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि किन्नौर तथा लाहौल-स्पीति जिलों में 22 अगस्त तक 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से हवाएं चल सकती हैं। वहीं मैदानी इलाकों और मध्य पर्वतीय क्षेत्रों में भी गरज और बिजली चमकने के साथ 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की पूरी संभावना है।
भूस्खलन और बाढ़ से मार्ग बाधित, जिलों में सड़कों की स्थिति
राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, भूस्खलन और बारिश के चलते पूरे प्रदेश में यातायात व्यवस्था चरमरा गई है। राज्य की कुल 167 अवरुद्ध सड़कों में से सबसे गंभीर स्थिति मंडी जिले में बनी हुई है, जहां अकेले 84 सड़कें बंद पड़ी हैं। मंडी जिले में धरमपुर के समीप राष्ट्रीय राजमार्ग-3 पर मलबा आने से वाहनों की आवाजाही पूरी तरह ठप हो गई है। कुल्लू जिले में 35 सड़कें भूस्खलन की वजह से बाधित हैं, जबकि सिरमौर जिले में 12 सड़कों पर यातायात रुका हुआ है।
अन्य जिलों की स्थिति पर नजर डालें तो शिमला, कांगड़ा, हमीरपुर और ऊना जिलों में छह-छह सड़कें बंद पाई गई हैं। चंबा जिले में चार मार्ग मलबे की चपेट में आने से बाधित हैं, जबकि लाहौल-स्पीति में तीन सड़कों पर आवागमन पूरी तरह ठप है। इसके अलावा सोलन और बिलासपुर जिलों में दो-दो प्रमुख सड़कें बंद होने की सूचना है। यद्यपि मंडी जिले के धर्मपुर स्थित मंडप गांव में धूप खिलने से कुछ राहत महसूस की गई, लेकिन अधिकांश पर्वतीय मार्गों पर लगातार मलबा गिरने से मार्ग बहाली के कार्यों में खासी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
हमीरपुर और परवाणू में हादसे: स्कूल की दीवार ढही और मकान मलबे में फंसे
भारी बारिश के कारण हमीरपुर जिले में कई दुखद घटनाएं सामने आई हैं। जिले के हथोल गांव में स्थित एक सरकारी स्कूल परिसर में पास के बरसाती नाले का उफान पर आया पानी अचानक घुस गया। पानी के तेज बहाव के दबाव से स्कूल की सुरक्षा दीवार ढह गई। घटना की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने तत्परता दिखाते हुए सभी छात्रों को सुरक्षित निकालकर दूसरे स्थान पर पहुंचा दिया। हमीरपुर के अतिरिक्त उपायुक्त अभिषेक गर्ग ने स्कूल की दीवार गिरने की घटना की पुष्टि करते हुए स्पष्ट किया कि समय रहते उठाए गए कदमों से हादसे में किसी प्रकार का जान-माल का नुकसान नहीं हुआ है।
इसके अतिरिक्त हमीरपुर जिले की शुक्कर खड्ड के उफान में आने से पहलू गांव को जोड़ने वाले संपर्क मार्ग का एक बड़ा हिस्सा बाढ़ के पानी में पूरी तरह बह गया। इसके चलते दर्जनों ग्रामीण क्षेत्रों का संपर्क मुख्य मार्ग से पूरी तरह कट गया है। पहाड़ी से हुए भारी भूस्खलन के कारण सड़क पर खड़े कई वाहन मलबे की चपेट में आ गए। हमीरपुर के कश्मीर गांव में भी स्थिति चिंताजनक बनी जब चार रिहाइशी मकान भूस्खलन के मलबे में फंस गए। राहत एवं बचाव दलों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इन मकानों में फंसे सभी निवासियों को सुरक्षित बाहर निकालकर सुरक्षित आश्रयों में पहुंचाया। अतिरिक्त उपायुक्त अभिषेक गर्ग ने स्थिति का जायजा लेते हुए आम जनता से अपील की है कि वे मानसूनी मौसम के दौरान नदियों, खड्डों और उफनते नालों के समीप जाने से बचें। उधर, सोलन जिले के औद्योगिक शहर परवाणू में जल निकासी की समुचित व्यवस्था न होने और भारी बारिश के कारण सड़कों पर व्यापक जलभराव हो गया। पानी का भराव इतना अधिक था कि कई गाड़ियां सड़कों पर डूब गईं और यात्री घंटों फंसे रहे। राज्य में जगह-जगह पेड़ गिरने और चट्टानें खिसकने की घटनाएं दर्ज की गई हैं।
बिजली और पेयजल आपूर्ति तंत्र को भारी क्षति
प्राकृतिक आपदा के कारण प्रदेश का बुनियादी ढांचा बुरी तरह प्रभावित हुआ है। मूसलाधार बारिश और भूस्खलन की वजह से राज्य भर में करीब 130 विद्युत ट्रांसफार्मर बंद हो गए हैं, जिससे कई गांवों में अंधेरा छा गया है। जनजातीय जिले लाहौल-स्पीति में बिजली ढांचे को सर्वाधिक नुकसान पहुंचा है, जहां 68 ट्रांसफार्मर क्षतिग्रस्त हुए हैं। इसके अतिरिक्त हमीरपुर जिले में 42, सोलन जिले में 12 तथा कुल्लू और कांगड़ा जिलों में दो-दो ट्रांसफार्मर खराब होने से विद्युत आपूर्ति ठप पड़ी है।
बिजली के साथ-साथ पेयजल आपूर्ति व्यवस्था भी बुरी तरह चरमरा गई है। राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र की रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश भर की 222 पेयजल आपूर्ति योजनाएं बाधित हुई हैं। इनमें हमीरपुर जिला सबसे अधिक प्रभावित हुआ है, जहां 107 पेयजल योजनाओं में गाद भरने और पाइप टूटने से जलापूर्ति ठप हो गई है। सिरमौर जिले में 55, बिलासपुर में 28, कांगड़ा में 26, शिमला में 5 और सोलन जिले में 1 पेयजल योजना प्रभावित हुई है। संबंधित विभागों के कर्मचारी और इंजीनियर बुनियादी सुविधाओं को बहाल करने के कार्य में जुटे हुए हैं।
बीते 24 घंटों में बारिश के आंकड़े और अगस्त का मानसूनी बजट
मौसम विभाग के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार बीते 24 घंटों के दौरान प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में हल्की से मध्यम तथा कई इलाकों में अत्यधिक भारी बारिश दर्ज की गई। हमीरपुर जिले के सुजानपुर टीरा में सर्वाधिक 156.4 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। इसके अतिरिक्त नैना देवी में 138.6 मिलीमीटर, धर्मशाला में 130.4 मिलीमीटर, नादौन में 128.4 मिलीमीटर, कांगड़ा शहर में 119.5 मिलीमीटर, भरवाईं में 118 मिलीमीटर, पालमपुर में 111 मिलीमीटर, नगरोटा सूरियां में 90.8 मिलीमीटर तथा हमीरपुर में 83.5 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई। अन्य क्षेत्रों में नालागढ़ में 5 सेंटीमीटर, नैना देवी में 4 सेंटीमीटर, जबकि पंडोह और मलरौन में 3-3 सेंटीमीटर बारिश दर्ज हुई। मंडी, खदराला, सुंदरनगर, पांवटा और धौलाकुआं में भी रुक-रुक कर वर्षा दर्ज की गई। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार अगले 4 से 5 दिनों के दौरान न्यूनतम और अधिकतम तापमान में किसी बड़े बदलाव की संभावना नहीं है।
अगस्त महीने में अब तक हुई वर्षा के आंकड़ों पर गौर करें तो इस बार मानसूनी बारिश सामान्य आंकड़े से कम रही है। शिमला स्थित मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक शोभित कटियार ने आंकड़े साझा करते हुए बताया कि 1 से 18 अगस्त की अवधि के दौरान राज्य में सामान्य तौर पर 178 मिलीमीटर बारिश होती है, जबकि इस वर्ष इस दौरान 164 मिलीमीटर बारिश ही दर्ज की गई है। इस प्रकार अगस्त में अब तक सामान्य से लगभग 8 फीसदी कम बारिश हुई है। वहीं अगर पूरे मानसून सीजन की बात करें तो अब तक प्रदेश में कुल मिलाकर लगभग 500 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की जा चुकी है, जबकि इस अवधि के लिए सामान्य वर्षा का आंकड़ा 535 मिलीमीटर रहता है। इस तरह चालू मानसून सीजन में कुल बारिश का स्तर सामान्य से करीब 7 फीसदी कम बना हुआ है। 20 अगस्त को भी कांगड़ा, कुल्लू, मंडी, सिरमौर और हमीरपुर सहित विभिन्न हिस्सों में बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान है।



















