शिमला में मंगलवार को मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए बताया कि किशाऊ बिजली परियोजना के मुकम्मल होने के बाद हिमाचल प्रदेश को सालाना लगभग 1,200 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होगा। यह समझौता उत्तर भारत के कई राज्यों के बीच लंबे समय से अटके जल बंटवारे और ऊर्जा उत्पादन के विवादों को सुलझाने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हुआ है। इस पूरी व्यवस्था से पहाड़ी राज्य की वित्तीय स्थिति को एक नया संबल मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
दिल्ली में हुआ ऐतिहासिक समझौता
नई दिल्ली में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक के दौरान किशाऊ परियोजना को लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के बीच औपचारिक करार पर हस्ताक्षर किए गए। इस महत्वपूर्ण समझौते में छह राज्यों के बीच जल बंटवारे और बिजली उत्पादन को लेकर सहमति बनी है, जो पिछले छह दशकों से विभिन्न कारणों से लंबित पड़ी थी। इस बहुउद्देशीय परियोजना के धरातल पर उतरने से न केवल बिजली की आपूर्ति सुगम होगी बल्कि संपूर्ण उत्तर भारत में जल संसाधनों के प्रबंधन का तौर-तरीका भी पूरी तरह बदल जाएगा।
हिमाचल प्रदेश को मिला वित्तीय लाभ और शून्य लागत
इस पूरे समझौते का सबसे खास पहलू यह है कि हिमाचल प्रदेश को इस विशाल परियोजना के निर्माण के लिए अपनी तरफ से एक भी रुपया खर्च नहीं करना पड़ेगा। राज्य का करीब 800 करोड़ रुपये का हिस्सा वे अन्य लाभार्थी राज्य वहन करेंगे जो इस परियोजना के पानी का सीधा इस्तेमाल करेंगे। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पहले से ही राज्य के वित्तीय हितों को लेकर अड़े हुए थे और उन्होंने निर्माण कार्यों पर किसी भी तरह का वित्तीय बोझ उठाने से साफ इंकार कर दिया था। इसे सुक्खू सरकार की एक बहुत बड़ी कूटनीतिक और आर्थिक जीत माना जा रहा है।
बिना किसी उत्पादन लागत के मिलेगी 211 मेगावाट बिजली
नई दिल्ली में मीडिया से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि इस ऐतिहासिक समझौते के तहत हिमाचल प्रदेश को किशाऊ बांध से कुल उत्पादित होने वाली बिजली में से 211 मेगावाट बिजली बिल्कुल मुफ्त और बिना किसी उत्पादन लागत के मिलेगी। बिजली तैयार करने में आने वाला खरबों और हजारों करोड़ रुपये का भारी-भरकम खर्च अब वे राज्य उठाएंगे जो इस बांध के पानी का उपभोग करेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल के जल संसाधनों को हमेशा से 'बहता हुआ सोना' कहा जाता रहा है और अब राज्य सरकार इन अमूल्य जल संसाधनों का वास्तविक आर्थिक लाभ उठाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध होकर आगे बढ़ रही है।
परियोजना का भौगोलिक दायरा और तकनीकी विवरण
हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड की सीमा पर प्रस्तावित यह बहुउद्देशीय किशाऊ बांध परियोजना यमुना बेसिन के अंतर्गत टोंस नदी पर बनाई जानी है। टोंस नदी यमुना की एक प्रमुख सहायक नदी है। इस पूरी परियोजना की कुल विद्युत उत्पादन क्षमता 660 मेगावाट होगी। इस परियोजना के निर्माण से हिमाचल प्रदेश के आठ गांवों के 2,092 लोग और उत्तराखंड के नौ गांवों के 3,406 लोग प्रभावित होंगे। इस विशाल बांध के कारण हिमाचल प्रदेश में लगभग 1,498 हेक्टेयर और उत्तराखंड में 1,452 हेक्टेयर यानी कुल मिलाकर 2,950 हेक्टेयर क्षेत्र जलमग्न हो जाएगा। इस परियोजना की कुल अनुमानित लागत करीब 15,000 करोड़ रुपये आंकी गई है, जिसमें से हिमाचल को बिना निवेश के भारी मुनाफा मिलेगा।



















