हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी इलाकों में सफर करने वाले लोगों के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। मंडी और कुल्लू के बीच का रास्ता अब पहले की तुलना में काफी सुरक्षित और सुगम हो गया है। कीरतपुर-मनाली फोरलेन प्रोजेक्ट के तहत अब मंडी से कुल्लू के बीच यातायात को और अधिक सुचारू बना दिया गया है, जिससे यात्रियों का सफर अब काफी आरामदायक हो गया है।
इस मार्ग पर दयोड़ से हणोगी के बीच बनाई गई नई टनलों को आखिरकार यातायात के लिए खोल दिया गया है। इन आधुनिक टनलों के शुरू होने से यात्रियों को पुराने राष्ट्रीय राजमार्ग पर पेश आने वाली कई बड़ी परेशानियों से हमेशा के लिए छुटकारा मिल गया है। इनमें विशेष रूप से पहाड़ी से लगातार गिरने वाले पत्थरों का जानलेवा डर और घंटों लगने वाले भीषण ट्रैफिक जाम की समस्या शामिल है।
यात्रियों को पहले पुराने हाईवे पर सफर करते समय खोतीनाला और जोगणी माता मंदिर के पास से गुजरना पड़ता था। उस पुराने रास्ते पर हाईवे की चौड़ाई बहुत कम थी, जिसके कारण वहां अक्सर लंबा जाम लग जाता था और बारिश या अन्य कारणों से पहाड़ी दरकने पर पत्थर गिरने का गंभीर खतरा भी बना रहता था, जिससे यात्रियों की जान को हर वक्त जोखिम रहता था।
पंडोह टैक्सी ऑपरेटर यूनियन के चेयरमैन परमदेव, जीप चालक कौल सिंह, बस ऑपरेटर दिनेश और डोला राम ने इस बदलाव पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इन टनलों के खुल जाने से उनका वर्षों से चला आ रहा इंतजार आखिरकार खत्म हो गया है और अब सफर करना बेहद आसान हो गया है।
इन चालकों और ऑपरेटरों ने बताया कि अब रास्ते में न तो ट्रैफिक जाम का सामना करना पड़ रहा है और न ही पहाड़ियों से अचानक पत्थर गिरने का पुराना डर सता रहा है। इसके साथ ही वाहनों की सुरक्षा भी बेहतर हुई है और ईंधन की भी उल्लेखनीय बचत हो रही है।
टनलों के इस नेटवर्क के शुरू हो जाने से मंडी और कुल्लू के बीच की भौगोलिक दूरी में भी खासी कमी दर्ज की गई है। पहले जहां मंडी से कुल्लू की दूरी लगभग 78 किलोमीटर हुआ करती थी, वह अब घटकर मात्र 60 किलोमीटर ही रह गई है।
दूरी कम होने और ट्रैफिक की बाधाएं दूर होने से अब मंडी से कुल्लू तक का सफर महज एक घंटे के भीतर पूरा किया जा सकता है, जबकि पहले इसी सफर को तय करने में दो घंटे से भी अधिक समय लग जाता था। हालांकि यह कुल समय पूरे फोरलेन प्रोजेक्ट के संदर्भ में है, लेकिन वर्तमान में इन नई टनलों के खुलने से ही लोगों को लगभग ढाई किलोमीटर का सफर कम करना पड़ रहा है।
इस पूरे मार्ग पर एक टनल की लंबाई 2.8 किलोमीटर है जबकि दूसरी टनल की लंबाई 650 मीटर है। इसके विपरीत, पुराने और संकरे हाईवे से यही सफर तय करने में करीब 6 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती थी।
स्थानीय प्रशासन और निवासियों का मानना है कि आने वाले कुल्लू दशहरा उत्सव के दौरान देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों और स्थानीय लोगों को इससे बहुत बड़ी राहत मिलेगी। स्थानीय निवासी गोपी, महेंद्र पाल और पर्यटक गोल्डी राम ने साझा किया कि इन टनलों के निर्माण से कुल्लू आना-जाना अब पहले की तुलना में बहुत ज्यादा सरल और आरामदायक हो गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, पंडोह बायपास टकोली फोरलेन प्रोजेक्ट के तहत कुल 10 टनलों का निर्माण किया जाना है। हालांकि इनमें से पांच टनलें पहले ही जनता के लिए खोली जा चुकी थीं, लेकिन इन सभी का मुख्य प्रवेश द्वार दयोड़-हणोगी टनल ही थी, जिसे अब आखिरकार यातायात के लिए खोल दिया गया है।
इस पूरे प्रोजेक्ट के अंतर्गत आने वाली तीन अन्य टनलें गत वर्ष मानसून के दौरान हुई भारी बरसात के कारण क्षतिग्रस्त हो गईं थी, जिनकी मरम्मत का कार्य इस समय तेजी से चल रहा है और उन्हें भी आने वाले समय में सुरक्षित आवाजाही के लिए खोल दिया जाएगा।



















