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राजस्थान के पाली में जेठामुला की 80 साल पुरानी कचौरी का अनोखा स्वादराजस्थान
16 सित॰ 2026, 11:33 am (30 मिनट पहले)· 0

राजस्थान के पाली में जेठामुला की 80 साल पुरानी कचौरी का अनोखा स्वाद

राजस्थान के पाली के सर्राफा बाजार में पिछले 80 साल से जेठामुला की खस्ता कचौरी अपनी अनूठी शैली और चटनी के तड़के के लिए फूड लवर्स के बीच बेहद लोकप्रिय है।

यदि आप जायकेदार और तीखे व्यंजनों के शौकीन हैं, तो राजस्थान का पाली शहर आपके लिए एक बेहतरीन जगह साबित हो सकता है। यहां के सर्राफा बाजार में मिलने वाली जेठामुला की खस्ता कचौरी अपनी खास पहचान रखती है। बीते 80 से अधिक वर्षों से यह ऐतिहासिक दुकान स्थानीय निवासियों के साथ-साथ बाहर से आने वाले पर्यटकों को भी अपनी ओर आकर्षित कर रही है। इसकी सबसे बड़ी खूबी इसे परोसने का पारंपरिक और अनूठा अंदाज है, जो खाने वालों को बार-बार यहां खींच लाता है।

परंपरागत स्वाद और अनूठा तरीका

पाली अपनी समृद्ध संस्कृति के साथ-साथ अपने खास व्यंजनों के लिए भी जाना जाता है। सर्राफा बाजार के भीतर स्थित जेठामुला जी की दुकान की यह कचौरी अपने अनूठे स्वाद से हर किसी का दिल जीत लेती है। इस दुकान की बनावट बेहद छोटी है, जहां अंदर केवल एक ही व्यक्ति के बैठने की जगह होती है। इसके बावजूद सुबह होते ही यहां खाने के शौकीनों की भारी भीड़ जमा हो जाती है और लोग कचौरी का लुत्फ उठाने के लिए घेरा बना लेते हैं।

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चटनी का जादुई तड़का और आकार

देखने में यह कचौरी रोहट की मशहूर कचौरी जैसी लगती है, लेकिन इसका स्वाद पूरी तरह भिन्न है। इसकी सबसे खास बात यह है कि कचौरी के ठीक बीच में एक छोटा-सा छेद किया जाता है। इसी होल के अंदर दुकान की खास तीखी और मीठी चटनी डाली जाती है। जैसे ही यह चटनी अंदर जाती है, कचौरी का स्वाद कई गुना बढ़ जाता है और इसका क्रंचीपन खाने के अनुभव को और भी शानदार बना देता है।

स्वाद ऐसा कि मन न भरे

इस कुरकुरी कचौरी और स्पेशल चटनी का मेल इतना लाजवाब होता है कि ग्राहक एक कचौरी खाकर संतुष्ट नहीं होते, बल्कि तुरंत दूसरी कचौरी का ऑर्डर दे देते हैं। यदि आप कभी पाली से गुजर रहे हैं या सर्राफा बाजार जाने का मौका मिले, तो इस ऐतिहासिक कचौरी को चखना बिल्कुल न भूलें। इसका हर एक टुकड़ा खाने के प्रेमियों को पूरी तरह संतुष्ट कर देता है।

दुकान तक ऐसे पहुंचें

यह प्रसिद्ध दुकान पाली के मुख्य सर्राफा बाजार के बिल्कुल मध्य में स्थित है। यदि आप पाली रेलवे स्टेशन या पुराने बस स्टैंड पर उतरते हैं, तो वहां से सर्राफा बाजार पहुंचने के लिए ई-रिक्शा, ऑटो या अन्य स्थानीय वाहन आसानी से मिल जाते हैं। चूंकि बाजार का यह क्षेत्र काफी तंग और व्यस्त है, इसलिए वहां चार पहिया वाहन ले जाने के बजाय पैदल या दो पहिया वाहन से जाना ज्यादा सुविधाजनक रहता है। बाजार में पहुंचते ही किसी भी स्थानीय दुकानदार से पूछने पर वे आपको आसानी से इस प्रसिद्ध दुकान तक का रास्ता बता देंगे।

सवाल-जवाब

जेठामुला की कचौरी कहां स्थित है?
यह प्रसिद्ध कचौरी की दुकान राजस्थान के पाली शहर के मुख्य सर्राफा बाजार के बीचों-बीच स्थित है।
यह दुकान कितनी पुरानी है?
यह दुकान पिछले 80 सालों से भी ज्यादा समय से लोगों को अपनी सेवाएं दे रही है।
इस कचौरी की क्या खासियत है?
कचौरी के बीच में एक छोटा-सा होल करके उसमें खास तीखी और मीठी चटनी डाली जाती है, जो इसके स्वाद को बढ़ा देती है।
दुकान तक कैसे पहुंचा जा सकता है?
पाली रेलवे स्टेशन या पुराना बस स्टैंड से ई-रिक्शा या ऑटो लेकर सर्राफा बाजार पहुंचा जा सकता है।
बाजार में वाहन ले जाना कैसा रहता है?
सर्राफा बाजार का इलाका तंग और व्यस्त है, इसलिए वहां पैदल या दोपहिया वाहन से जाना ज्यादा सुविधाजनक होता है।
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