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नेपाल में आपदा के बाद हिमाचल प्रदेश में हाई अलर्ट, बारिश और हादसों से अब तक 247 जानें गईंहिमाचल प्रदेश
28 अग॰ 2026, 1:30 pm (1 घंटे पहले)· 2

नेपाल में आपदा के बाद हिमाचल प्रदेश में हाई अलर्ट, बारिश और हादसों से अब तक 247 जानें गईं

नेपाल में आई प्राकृतिक आपदा के बाद हिमाचल प्रदेश की सभी राहत एवं बचाव एजेंसियों को अलर्ट जारी कर दिया गया है। राज्य में 30 जून से अब तक बारिश, बाढ़ और हादसों में 247 लोगों की मौत हो चुकी है और 1,183 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ है।

नेपाल में भीषण प्राकृतिक आपदा के कारण मची भारी तबाही को देखते हुए पड़ोसी पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश ने अपने पूरे आपदा प्रबंधन तंत्र को अलर्ट पर रख दिया है। राज्य सरकार ने सभी प्रशासनिक एजेंसियों और संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात अधिकारियों को कड़ी निगरानी बरतने तथा किसी भी आपात स्थिति का तत्काल सामना करने के लिए तैयार रहने के कड़े निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही, खराब मौसम और भारी बारिश के दौरान आम जनता को सतर्कता बरतने की सलाह जारी की गई है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने राज्य की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि हिमाचल प्रदेश वर्ष 2023 से ही लगातार भयानक प्राकृतिक आपदाओं की मार झेल रहा है और इस निरंतर तबाही के पीछे मुख्य कारण जलवायु परिवर्तन का बढ़ता असर है।

मॉनसून सीजन में जान-माल का भारी नुकसान

हिमाचल प्रदेश में जारी मौजूदा मॉनसून सीजन के दौरान कुदरत के कहर और उससे जुड़ी विभिन्न घटनाओं में भारी आर्थिक और मानवीय क्षति दर्ज की गई है। प्राप्त आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, 30 जून से लेकर अब तक पूरे राज्य में विभिन्न हादसों और प्राकृतिक आपदाओं के कारण कुल 247 लोगों की जान जा चुकी है। इन मौतों का वर्गीकरण करते हुए बताया गया है कि 103 लोगों की मौत बादल फटने, भूस्खलन और फ्लैश फ्लड जैसी प्राकृतिक आपदाओं की वजह से हुई है, जबकि 144 लोगों ने सड़क दुर्घटनाओं में अपनी जान गंवाई है। इसके अलावा, आपदा की इन घटनाओं में 1 व्यक्ति अभी भी लापता बताया जा रहा है। मॉनसून के दौरान विभिन्न हादसों में 396 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। मानवीय क्षति के साथ-साथ बेज़ुबान पशु-पक्षियों पर भी भारी आफत आई है, जहां अब तक 449 पालतू पशुओं और मवेशियों की मौत दर्ज की जा चुकी है। राज्य भर में इस सीजन में कुल आर्थिक नुकसान 1,183 करोड़ रुपये से भी अधिक का हो चुका है।

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मकानों, दुकानों और सरकारी संपत्ति को पहुंची भारी क्षति

तेज मूसलाधार बारिश और भूस्खलन के चलते राज्य में निजी संपत्तियों से लेकर बुनियादी ढांचे तक को भारी नुकसान पहुंचा है। आंकड़ों के अनुसार, मॉनसून की अवधि में कुल 32 पक्के मकान और 64 कच्चे मकान पूरी तरह ध्वस्त होकर मलबे में तब्दील हो गए हैं। इसके अतिरिक्त, 135 पक्के मकानों और 294 कच्चे मकानों को आंशिक रूप से क्षति पहुंची है, जिससे सैकड़ों परिवार बेघर या प्रभावित हुए हैं। इसके साथ ही 17 व्यावसायिक दुकानें और मवेशियों को रखने वाली 377 पशुशालाएं जमींदोज हो चुकी हैं। केवल आम जनता ही नहीं, बल्कि राज्य के विभिन्न सरकारी विभागों को भी अरबों रुपये का नुकसान उठाना पड़ा है। लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) को बुनियादी सड़कों और पुलों के टूटने के कारण अकेले 897 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान झेलना पड़ा है। वहीं, पेय जल आपूर्ति और सिंचाई योजनाओं को संभाल रहे जल शक्ति विभाग को भी 258 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति का नुकसान हुआ है।

सड़कों का बंद होना और मौसम विभाग का नया अलर्ट

पिछले 24 घंटों के दौरान राज्य के विभिन्न हिस्सों में हुई मूसलाधार बारिश के कारण जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। बारिश और मलबे के कारण प्रदेश भर में 68 प्रमुख और संपर्क सड़कें यातायात के लिए पूरी तरह बंद हो चुकी हैं। इसके अलावा, विद्युत आपूर्ति प्रणाली प्रभावित होने से 16 बिजली ट्रांसफार्मर ठप हो गए हैं और पीने के पानी की एक बड़ी परियोजना भी बाधित हुई है। इस वजह से कई ग्रामीण और पहाड़ी क्षेत्रों में बिजली, पानी और परिवहन सेवाएं ठप पड़ गई हैं। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला द्वारा जारी ताजा पूर्वानुमान के अनुसार, शुक्रवार को भी राज्य के कई इलाकों में भारी बारिश की संभावना बनी हुई है। मौसम विभाग ने चंबा, कांगड़ा और किन्नौर जिलों के लिए बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है। संवेदनशील इलाकों में भूस्खलन होने, चट्टानें गिरने और नदियों-नालों में अचानक जलस्तर बढ़ने (फ्लैश फ्लड) की कड़ी चेतावनी दी गई है। निचले इलाकों में जलभराव की आशंका को देखते हुए लोगों को नदी-नालों के करीब न जाने और अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी गई है।

विधानसभा में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू का वक्तव्य

हिमाचल प्रदेश विधानसभा में गुरुवार को राज्य की स्थिति पर बोलते हुए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने स्पष्ट किया कि वर्ष 2023 और 2024 में आई भीषण आपदाओं के बाद से प्रदेश सरकार पूरी तरह सतर्क मोड में काम कर रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार नियमित अंतराल पर आपदा प्रबंधन की समीक्षा बैठकें आयोजित कर रही है। जब भी मौसम विभाग द्वारा तेज बारिश, बादल फटने या नदियों के उफान पर आने की चेतावनी मिलती है, स्थानीय प्रशासन को तुरंत पहले ही सचेत कर दिया जाता है। उन्होंने कहा कि हालांकि इस बार पूरे राज्य में औसतन अपेक्षाकृत कम बारिश दर्ज की गई है, लेकिन जिन विशिष्ट इलाकों में अत्यधिक बारिश या बादल फटने की घटनाएं हो रही हैं, वहां के स्थानीय तंत्र को पूर्व में ही अलर्ट पर रखा जा रहा है। सरकार का मुख्य ध्येय यही है कि किसी भी संभावित प्राकृतिक आपदा से पहले ही स्थानीय प्रशासन और आपदा मोचन बल पूरी तैयारी के साथ मुस्तैद रहें।

जलवायु परिवर्तन पर वैज्ञानिक अध्ययन कराने की मांग

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने हिमालयी क्षेत्र में बार-बार आ रही प्राकृतिक आपदाओं और जलवायु परिवर्तन के गहरे संबंधों पर वैज्ञानिक अध्ययन कराने की आवश्यकता जताई। उन्होंने बताया कि राज्य में आई आपदाओं के तुरंत बाद उन्होंने नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री से मुलाकात की थी। इस बैठक के दौरान उन्होंने मांग रखी थी कि भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), पर्यावरण विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों का एक संयुक्त दल बनाकर पूरे हिमालयी क्षेत्र का गहन अध्ययन कराया जाए। मुख्यमंत्री के आग्रह पर एक केंद्रीय अध्ययन दल हिमाचल प्रदेश के दौरे पर आया भी था, लेकिन उस वैज्ञानिक अध्ययन के बाद क्या निष्कर्ष और रिपोर्ट सामने आई, इसकी अंतिम जानकारी राज्य सरकार को अभी तक प्राप्त नहीं हुई है। अपने अनुभवों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अचानक बादल फटने की घटनाओं में जलवायु परिवर्तन एक बड़ा कारक सिद्ध हो रहा है। हालांकि, पहाड़ों में भूस्खलन होना एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, जहां कटाव के बाद स्थिति को सामान्य होने में समय लगता है।

ग्लेशियर झीलों की सघन निगरानी और नेपाल की घटना से सबक

पहाड़ी राज्य में स्थित उच्च हिमाच्छादित क्षेत्रों की सुरक्षा को लेकर मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार ग्लेशियर झीलों की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि लाहौल-स्पीति जिले में एक ऐसी ग्लेशियर झील का पता चला है जो कई वर्षों से बनी हुई है। इस संबंध में ग्लेशियरों का अध्ययन करने वाले वैज्ञानिकों और विशेषज्ञ अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठकें की गई हैं। अध्ययन में पाया गया है कि कुछ स्थानों पर ग्लेशियर सिकुड़ रहे हैं तो कुछ इलाकों में उनके आकार में बढ़ोतरी भी देखी जा रही है। वास्तविक धरातलीय स्थिति वैज्ञानिक रिपोर्ट के आने के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट हो पाएगी। नेपाल में घटी हालिया त्रासदी का संदर्भ देते हुए मुख्यमंत्री ने चेतावनी दी कि मौसम का पैटर्न बहुत तेजी से बदल रहा है। नेपाल की घटना को जलवायु परिवर्तन के वैश्विक प्रभाव से जोड़कर देखना चाहिए, जिसका असर हिमाचल प्रदेश के बाद उत्तराखंड और पूरे हिमालयी भूभाग पर पड़ रहा है। प्रशासन ने भूस्खलन और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों से विशेष सावधानी बरतने का आह्वान किया है।

सवाल-जवाब

हिमाचल प्रदेश में मॉनसून के दौरान अब तक कितने लोगों की मौत हुई है?
30 जून से अब तक कुल 247 लोगों की मौत हुई है, जिनमें 103 की मौत प्राकृतिक आपदाओं में और 144 की सड़क हादसों में हुई है।
हिमाचल प्रदेश में बारिश से कितना आर्थिक नुकसान हुआ है?
राज्य में अब तक 1,183 करोड़ रुपये से ज्यादा का कुल आर्थिक नुकसान हुआ है, जिसमें लोक निर्माण विभाग को 897 करोड़ और जल शक्ति विभाग को 258 करोड़ रुपये से अधिक की क्षति शामिल है।
मौसम विभाग ने किन जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया है?
मौसम विज्ञान केंद्र शिमला ने शुक्रवार के लिए चंबा, कांगड़ा और किन्नौर जिलों में भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है।
लाहौल-स्पीति में ग्लेशियर झील को लेकर सरकार ने क्या कदम उठाए हैं?
सरकार ग्लेशियर विशेषज्ञों के साथ बैठकें कर रही है और लाहौल-स्पीति की कई वर्षों पुरानी ग्लेशियर झील का वैज्ञानिक अध्ययन व सघन निगरानी करवा रही है।
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