हिमाचल प्रदेश के मंडी शहर से सटे रेहड़धार इलाके में पिछले एक महीने से भय का माहौल पैदा करने वाले आदमखोर तेंदुए को आखिरकार वन विभाग ने कड़ी मशक्कत के बाद दबोच लिया है। वन विभाग द्वारा इलाके में लगाए गए पिंजरे में यह तेंदुआ शुक्रवार सुबह के समय फंसा हुआ मिला। इस खतरनाक तेंदुए की मौजूदगी के कारण पिछले एक महीने से पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल बना हुआ था, जिससे स्थानीय लोग काफी डरे हुए थे। अपनी एक महीने की दहशत भरी अवधि के दौरान इस तेंदुए ने कुल 67 भेड़ों, एक बकरी और एक कुत्ते को अपना आसान शिकार बना लिया था, जिससे पशुपालकों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ा था।
दो पिंजरे और चार सीसीटीवी कैमरों से की गई थी निगरानी
तेंदुए की बढ़ती गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए डीसीएफ मंडी संजीव शर्मा के विशेष निर्देशों के तहत रेंज ऑफिसर मंडी अजय चंदेल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए डिप्टी रेंजर चिंता देवी के नेतृत्व में एक विशेष रेस्क्यू टीम का गठन किया। इस टीम में फॉरेस्ट गार्ड हेम राज, जीवन सिंह, नीलमा देवी, पूजा ठाकुर के अलावा अन्य कई वन कर्मी और वन मित्र शामिल किए गए थे। अभियान के दौरान स्थानीय निवासियों ने भी वन विभाग की टीम को पूरा सहयोग प्रदान किया। तेंदुए को सुरक्षित तरीके से पकड़ने के लिए विभाग ने इलाके में दो मजबूत पिंजरे और चार आधुनिक सीसीटीवी कैमरे स्थापित किए थे। इन कैमरों और पिंजरों के माध्यम से लगातार तेंदुए की लोकेशन को ट्रैक किया जा रहा था। विभाग को अपनी तकनीकी निगरानी से यह महत्वपूर्ण जानकारी मिली थी कि यह तेंदुआ त्रहु नाला के आसपास के क्षेत्र में सबसे अधिक सक्रिय रहता है।
पिंजरे के अंदर चारे के रूप में रखी गई थीं दो भेड़ें
तेंदुए की हरकतों और ट्रैकिंग से मिले इनपुट को ध्यान में रखते हुए वन विभाग ने गत रात्रि दो अलग-अलग रणनीतिक स्थानों पर पिंजरे स्थापित किए थे। तेंदुए को अपनी ओर आकर्षित करके पिंजरे में फंसाने के लिए इन दोनों पिंजरों के भीतर दो जीवित भेड़ों को चारे के रूप में रखा गया था। शुक्रवार की सुबह जब स्थानीय लोग और विभागीय कर्मचारी तय मौके पर पहुंचे, तो उन्होंने देखा कि वांछित तेंदुआ पिंजरे के अंदर पूरी तरह कैद हो चुका था। डीसीएफ मंडी संजीव शर्मा ने मीडिया के सामने इस पूरे मामले की आधिकारिक पुष्टि करते हुए जानकारी दी कि तेंदुए को सफलतापूर्वक पकड़ लिया गया है और स्वास्थ्य परीक्षण तथा मेडिकल जांच के लिए उसे कांगू भेज दिया गया है। मेडिकल प्रक्रिया पूरी होने के बाद नियमानुसार आगे की आगामी कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। इस सफल ऑपरेशन के बाद स्थानीय निवासियों ने राहत की सांस ली है और तेंदुए के आतंक से मुक्ति दिलाने के लिए वन विभाग की पूरी टीम का तहे दिल से आभार व्यक्त किया है।





















