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मंडी के रेहड़धार में एक महीने से आतंक मचा रहा तेंदुआ पिंजरे में कैद, 67 भेड़ों का किया था शिकारहिमाचल प्रदेश
29 अग॰ 2026, 9:08 am (1 घंटे पहले)· 2

मंडी के रेहड़धार में एक महीने से आतंक मचा रहा तेंदुआ पिंजरे में कैद, 67 भेड़ों का किया था शिकार

हिमाचल प्रदेश के मंडी शहर के पास रेहड़धार इलाके में पिछले एक महीने से दहशत फैला रहे तेंदुए को वन विभाग ने आखिरकार पकड़ लिया है। इस तेंदुए ने अपने आतंक के दौरान 67 भेड़, एक बकरी और एक कुत्ते को मार डाला था।

हिमाचल प्रदेश के मंडी शहर से सटे रेहड़धार इलाके में पिछले एक महीने से भय का माहौल पैदा करने वाले आदमखोर तेंदुए को आखिरकार वन विभाग ने कड़ी मशक्कत के बाद दबोच लिया है। वन विभाग द्वारा इलाके में लगाए गए पिंजरे में यह तेंदुआ शुक्रवार सुबह के समय फंसा हुआ मिला। इस खतरनाक तेंदुए की मौजूदगी के कारण पिछले एक महीने से पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल बना हुआ था, जिससे स्थानीय लोग काफी डरे हुए थे। अपनी एक महीने की दहशत भरी अवधि के दौरान इस तेंदुए ने कुल 67 भेड़ों, एक बकरी और एक कुत्ते को अपना आसान शिकार बना लिया था, जिससे पशुपालकों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ा था।

दो पिंजरे और चार सीसीटीवी कैमरों से की गई थी निगरानी

तेंदुए की बढ़ती गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए डीसीएफ मंडी संजीव शर्मा के विशेष निर्देशों के तहत रेंज ऑफिसर मंडी अजय चंदेल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए डिप्टी रेंजर चिंता देवी के नेतृत्व में एक विशेष रेस्क्यू टीम का गठन किया। इस टीम में फॉरेस्ट गार्ड हेम राज, जीवन सिंह, नीलमा देवी, पूजा ठाकुर के अलावा अन्य कई वन कर्मी और वन मित्र शामिल किए गए थे। अभियान के दौरान स्थानीय निवासियों ने भी वन विभाग की टीम को पूरा सहयोग प्रदान किया। तेंदुए को सुरक्षित तरीके से पकड़ने के लिए विभाग ने इलाके में दो मजबूत पिंजरे और चार आधुनिक सीसीटीवी कैमरे स्थापित किए थे। इन कैमरों और पिंजरों के माध्यम से लगातार तेंदुए की लोकेशन को ट्रैक किया जा रहा था। विभाग को अपनी तकनीकी निगरानी से यह महत्वपूर्ण जानकारी मिली थी कि यह तेंदुआ त्रहु नाला के आसपास के क्षेत्र में सबसे अधिक सक्रिय रहता है।

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पिंजरे के अंदर चारे के रूप में रखी गई थीं दो भेड़ें

तेंदुए की हरकतों और ट्रैकिंग से मिले इनपुट को ध्यान में रखते हुए वन विभाग ने गत रात्रि दो अलग-अलग रणनीतिक स्थानों पर पिंजरे स्थापित किए थे। तेंदुए को अपनी ओर आकर्षित करके पिंजरे में फंसाने के लिए इन दोनों पिंजरों के भीतर दो जीवित भेड़ों को चारे के रूप में रखा गया था। शुक्रवार की सुबह जब स्थानीय लोग और विभागीय कर्मचारी तय मौके पर पहुंचे, तो उन्होंने देखा कि वांछित तेंदुआ पिंजरे के अंदर पूरी तरह कैद हो चुका था। डीसीएफ मंडी संजीव शर्मा ने मीडिया के सामने इस पूरे मामले की आधिकारिक पुष्टि करते हुए जानकारी दी कि तेंदुए को सफलतापूर्वक पकड़ लिया गया है और स्वास्थ्य परीक्षण तथा मेडिकल जांच के लिए उसे कांगू भेज दिया गया है। मेडिकल प्रक्रिया पूरी होने के बाद नियमानुसार आगे की आगामी कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। इस सफल ऑपरेशन के बाद स्थानीय निवासियों ने राहत की सांस ली है और तेंदुए के आतंक से मुक्ति दिलाने के लिए वन विभाग की पूरी टीम का तहे दिल से आभार व्यक्त किया है।

सवाल-जवाब

मंडी के किस इलाके में तेंदुआ पकड़ा गया?
मंडी शहर के पास स्थित रेहड़धार इलाके में वन विभाग ने तेंदुए को पकड़ा है।
तेंदुए ने कितने मवेशियों को अपना शिकार बनाया था?
इस तेंदुए ने अपने एक महीने के आतंक के दौरान कुल 67 भेड़, 1 बकरी और 1 कुत्ते को शिकार बनाया था।
तेंदुए को पकड़ने के लिए विभाग ने क्या उपाय किए थे?
वन विभाग ने दो पिंजरे और चार सीसीटीवी कैमरे लगाए थे तथा पिंजरे के अंदर दो भेड़ें चारे के रूप में रखी थीं।
तेंदुए को पकड़ने के बाद उसे कहां भेजा गया है?
पकड़े जाने के बाद तेंदुए को स्वास्थ्य परीक्षण और मेडिकल जांच के लिए कांगू भेजा गया है।
इस रेस्क्यू अभियान का नेतृत्व किसने किया था?
यह अभियान डीसीएफ मंडी संजीव शर्मा के निर्देशों पर रेंज ऑफिसर अजय चंदेल और डिप्टी रेंजर चिंता देवी की टीम द्वारा चलाया गया था।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·47 मिनट पहले

वन विभाग की तकनीकी निगरानी और रणनीतिक तैनाती से यह ऑपरेशन सफल रहा, लेकिन 67 मवेशियों का मारा जाना ग्रामीण आजीविका और वन्यजीव संघर्ष के बढ़ते खतरे की एक गंभीर तस्वीर पेश करता है। अब मेडिकल जांच के बाद यह देखना होगा कि प्रशासन इस रेस्क्यू किए गए वन्यजीव के पुनर्वास या प्राकृतिक आवास में वापसी को लेकर क्या कानूनी और प्रशासनिक कदम उठाता है।

Rohan Verma@rohan-verma·47 मिनट पहले

यह घटना न केवल पहाड़ी क्षेत्रों में बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष को रेखांकित करती है, बल्कि यह भी सोचने पर मजबूर करती है कि जब वन्यजीव आजीविका का भारी नुकसान पहुँचाते हैं, तो प्रभावित पशुपालकों को समय पर मुआवजा मिलना और त्वरित प्रशासनिक अनुक्रिया कितनी जरूरी है। मेडिकल जांच के बाद पुनर्वास या सुरक्षित वनों में इसकी वापसी पर प्रशासनिक पारदर्शिता जरूरी होगी ताकि पारिस्थितिकी संतुलन और ग्रामीण सुरक्षा दोनों सुरक्षित रहें।

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