हिमाचल प्रदेश की सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी के भीतर संगठनात्मक बदलावों को लेकर शुरू हुआ आंतरिक विवाद अब खुलकर सामने आ गया है। किन्नौर जिले में पार्टी के भीतर पिछले कई महीनों से सुलग रही चिंगारी ने अब एक बड़े सियासी घमासान का रूप ले लिया है। हिमाचल सरकार के कैबिनेट मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जगत सिंह नेगी ने नवगठित जिला कांग्रेस कमेटी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने संगठन के नए ढांचे पर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि इस नई कार्यकारिणी में उन पुराने और जमीनी कार्यकर्ताओं को पूरी तरह से दरकिनार कर दिया गया है जिन्होंने लंबे समय तक पार्टी को सींचा है।
जमीनी कार्यकर्ताओं की अनदेखी पर तीखे आरोप
जगत सिंह नेगी ने नई जिला कांग्रेस कमेटी के गठन पर बेहद तल्ख टिप्पणी की है। उन्होंने बिना किसी का नाम लिए दावा किया कि नई कमेटी में किन्नौर की असली कांग्रेस से जुड़े एक भी सच्चे कार्यकर्ता को जगह नहीं दी गई है। मंत्री ने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि संगठन में केवल स्लीपर सेल और जय चन्दों को तरजीह दी गई है। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसे लोगों को महत्वपूर्ण पदों पर बैठा दिया गया है जो पहले कभी भी कांग्रेस के सक्रिय संगठनात्मक ढांचे या जमीनी गतिविधियों का हिस्सा नहीं रहे हैं।
नई जिला कांग्रेस कमेटी यानी DCC के पुनर्गठन की प्रक्रिया पर सवालिया निशान लगाते हुए नेगी ने कहा कि नेतृत्व को पहले यह स्पष्ट करना चाहिए कि पुरानी कार्यकारिणी के साथ क्या किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि किन्नौर में वर्षों से कांग्रेस के लिए पसीना बहाने वाले वफादार कार्यकर्ताओं को नई समिति में कोई प्रतिनिधित्व नहीं मिला है। नेगी के अनुसार, वास्तविक और कर्मठ कांग्रेसियों की इस तरह की उपेक्षा पार्टी के लिए नुकसानदेह साबित होगी और यह कार्यकर्ताओं के मनोबल को तोड़ने वाला कदम है।
'पैराशूट नेताओं' के प्रवेश पर साधा निशाना
संगठन में अचानक ऊंचे पदों पर काबिज होने वाले नेताओं पर तंज कसते हुए कैबिनेट मंत्री ने 'पैराशूट नेताओं' को जगह दिए जाने पर गहरी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि किन्नौर जैसे कठिन भौगोलिक क्षेत्र में कांग्रेस का संगठन दशकों की कड़ी मेहनत, संघर्ष और कार्यकर्ताओं के बलिदान के बाद खड़ा हुआ है। नेगी ने जोर देकर कहा कि जिन कार्यकर्ताओं ने विपरीत परिस्थितियों और पार्टी के सबसे मुश्किल दौर में भी कांग्रेस का झंडा थामे रखा, उन्हें इस तरह से अपमानित नहीं किया जाना चाहिए।
विवाद की मुख्य वजह 56 सदस्यों वाली नई जिला कांग्रेस कमेटी का गठन है। नेगी का दावा है कि पुरानी कार्यकारिणी के अनुभवी और सक्रिय नेताओं को दरकिनार करके इस नई कमेटी को तैयार किया गया है। उन्होंने मांग की कि संगठन के पुराने और कर्मठ कार्यकर्ताओं को ही DCC में उचित और सम्मानजनक स्थान मिलना चाहिए था। उनका कहना है कि निष्क्रिय और नए लोगों को सीधे संगठन के शीर्ष पर बिठाने से पार्टी के भीतर असंतोष की भावना तेजी से फैल रही है।
ब्लॉक कमेटियों को भंग करने के फैसले का विरोध
जिला स्तर पर बदलावों के अलावा, जगत सिंह नेगी ने ब्लॉक कांग्रेस कमेटियों को अचानक भंग किए जाने के निर्णय पर भी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। उन्होंने संगठनात्मक नियमों का हवाला देते हुए कहा कि ब्लॉक कमेटियां पहले से ही सुचारू रूप से काम कर रही थीं और जिला कांग्रेस कमेटी का गठन तो उनके बाद हुआ था। ऐसे में नेगी ने सवाल उठाया कि जब ब्लॉक स्तर पर संगठन मजबूत और सक्रिय था, तो फिर पूरे ढांचे को इस तरह से बदलने की क्या जरूरत आन पड़ी थी।
किन्नौर में अपने परिवार के ऐतिहासिक योगदान को याद करते हुए नेगी ने पार्टी आलाकमान को अपने गहरे जुड़ाव का अहसास कराया। उन्होंने बताया कि उनके पिता दो बार विधायक रहे और उन्होंने उस कठिन दौर में कांग्रेस का प्रचार किया जब किन्नौर में लोग इस पार्टी के नाम से भी वाकिफ नहीं थे। खुद जगत सिंह नेगी भी कई दशकों से निरंतर कांग्रेस के लिए काम कर रहे हैं और वर्तमान में वह पांचवीं बार विधायक चुने गए हैं। कैबिनेट मंत्री के इस खुले विद्रोह ने हिमाचल प्रदेश कांग्रेस में चल रही गुटबाजी और अंतर्विरोध को पूरी तरह से उजागर कर दिया है।



















