हिमाचल प्रदेश के लाहौल और स्पीति जिले में एक धार्मिक यात्रा के दौरान बड़ा हादसा सामने आया है। यहां पवित्र ड्रिलबुरी कोरा पर्वत की परिक्रमा के समय बर्फीले रास्ते पर पैर फिसलने से दो श्रद्धालुओं की मौत हो गई। इस दुर्घटना में 15 अन्य लोग भी घायल हुए हैं जिन्हें मामूली चोटें आई हैं। लाहौल-स्पीति आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने इस दुखद घटना की जानकारी साझा की है। अचानक हुए इस हादसे के बाद पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई है और जिला प्रशासन ने तुरंत राहत कार्य शुरू किए।
हादसे का शिकार हुए श्रद्धालुओं की पहचान
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, इस दुर्घटना में जान गंवाने वालों की पहचान पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग की रहने वाली 74 वर्षीय दावा डोमा भूटिया और लाहौल-स्पीति के केलांग की निवासी 64 वर्षीय यांगजिन के रूप में हुई है। यांगजिन के पिता का नाम कुनू राम है। जिला प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए प्रत्येक मृतक के परिजनों को 25,000 रुपये की तत्काल आर्थिक सहायता प्रदान की है। अधिकारियों ने बताया कि यह घटना सुबह करीब साढ़े चार बजे हुई जब अचानक मौसम बदला और ऊंचाई वाले पर्वतीय क्षेत्र में तेज बर्फबारी शुरू हो गई, जिससे पूरा मार्ग अत्यधिक फिसलन भरा हो गया। इसी खतरनाक और बर्फ से ढके रास्ते पर संतुलन बिगड़ने से दोनों महिला तीर्थयात्री नीचे गिर गईं और उनकी मौत हो गई।
बचाव अभियान और अस्पताल में उपचार
घटना की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल की एक संयुक्त टीम ने तुरंत मौके पर पहुंचकर मोर्चा संभाला। राहत दलों ने घटनास्थल से दोनों शवों को सुरक्षित बाहर निकाला और सभी घायलों को तुरंत रेस्क्यू कर केलांग के एक स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया। अधिकारियों ने बताया कि घायल हुए 15 लोगों का इसी अस्पताल में इलाज चल रहा है, जबकि दोनों मृतकों के शवों का पोस्टमार्टम भी यहीं किया जा रहा है।
पुलिस और स्थानीय नेताओं के बयान
पुलिस अधीक्षक शिवानी मेहला ने जानकारी दी कि इस वर्ष पवित्र ड्रिलबुरी कोरा यात्रा में कुल मिलाकर लगभग 300 लोगों ने हिस्सा लिया था, जिसमें से इस दुर्भाग्यपूर्ण हादसे में दो लोगों की जान चली गई। लाहौल-स्पीति के पूर्व मंत्री राम लाल मारकंडे ने घटना पर दुख जताते हुए बताया कि पवित्र ड्रिलबुरी पर्वत की परिक्रमा पर निकली दो महिला श्रद्धालुओं की मौत की दुखद सूचना मिली है। माना जा रहा है कि अत्यधिक ठंड और ऊंचाई से नीचे गिरने के कारण इन श्रद्धालुओं की मृत्यु हुई है, क्योंकि बर्फबारी के बाद तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई थी। इस तरह की गंभीर स्थितियों को हाइपोथर्मिया कहा जाता है, जिसमें शरीर की आंतरिक गर्मी बहुत तेजी से खत्म होने लगती है और व्यक्ति को बेहद तीव्र ठंड महसूस होती है।
ड्रिलबुरी पर्वत का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व
लाहौल घाटी के तांदी में चंद्रभागा संगम स्थल के ठीक ऊपर स्थित ड्रिलबुरी पर्वत को आचार्य मतिसार गुरु घंटापा का प्रमुख पीठ स्थान माना जाता है। इतिहास के अनुसार, नालंदा विश्वविद्यालय के आचार्य मतिसार सातवीं शताब्दी में लाहौल घाटी आए थे और उन्होंने ड्रिलबुरी पर्वत की गुफाओं में कठिन तपस्या और साधना की थी। इसके अलावा, ड्रिलबुरी पर्वत को करगयुद्पा संप्रदाय के इष्ट देव चक्रसंवर का भी पवित्र पीठ स्थान माना गया है। इस स्थान के गहरे धार्मिक महत्व को देखते हुए दलाई लामा, गलदान त्रिपा, गेलौंग ड्रकपा और तकसंग रिम्बोचे जैसी महान हस्तियां भी यहां की यात्रा कर चुकी हैं। इसी गहरी आस्था के कारण हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस पहाड़ की परिक्रमा के लिए आते हैं।
यात्रा का कठिन मार्ग और उसकी मान्यता
यह पवित्र पर्वत करीब नौ किलोमीटर की सीधी चढ़ाई तय करने के बाद लगभग 15 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित है। बौद्ध धर्म की मान्यताओं के अनुसार, ड्रिलबुरी पीक की मात्र एक परिक्रमा करना पवित्र कैलाश पर्वत की 13 परिक्रमाएं पूरी करने के बराबर पुण्य फल देता है। अत्यधिक ऊंचाई, कठिन रास्ते और बदलते मौसम के बावजूद श्रद्धालु अपनी अटूट आस्था के साथ इस कठिन यात्रा को पूरा करने पहुंचते हैं, हालांकि अचानक होने वाली बर्फबारी इस मार्ग को बेहद खतरनाक बना देती है।


















