हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले की रहने वाली एक साधारण महिला ने अपनी मेहनत और सरकारी मदद के दम पर कारोबार की दुनिया में एक अलग मुकाम हासिल किया है। मनाली में आज वह पांच अलग-अलग दुकानों का संचालन कर रही हैं और उनकी वार्षिक आय में जबरदस्त इजाफा हुआ है। इस सफलता के पीछे एक संघर्षपूर्ण यात्रा है, जिसमें सरकारी ऋण योजना ने एक बड़ा मोड़ साबित किया है।
शुरुआती संघर्ष और शुरुआती दौर
मनाली आने से पहले उनके पति स्थानीय स्तर पर एक सब्जी की दुकान पर नौकरी किया करते थे। जब वह साल 2012 में मनाली पहुंचीं, तो उन्होंने अपने पति को दूसरों के यहां मजदूरी करने के बजाय खुद का स्वतंत्र काम शुरू करने की सलाह दी। इसके बाद उन्होंने मनाली के अलेयु में एक बहुत छोटी सी सब्जी की दुकान की शुरुआत की। अपने काम को विस्तार देने के लिए उन्होंने बैंक से लोन लेने की कोशिश की, लेकिन बाहरी जिले की होने की वजह से उस वक्त बैंकों ने उन्हें वित्तीय सहायता देने से इनकार कर दिया। नतीजतन, साल 2015 तक वह उसी छोटी सी दुकान के सहारे अपना गुजर-बसर करती रहीं।
प्रधानमंत्री मुद्रा योजना से मिला टर्निंग पॉइंट
वर्ष 2015 में जब प्रधानमंत्री मुद्रा योजना की शुरुआत हुई, तो बैंकों ने खुद उनसे संपर्क किया। उन्होंने सबसे पहले इस योजना के तहत अढ़ाई लाख रुपये का कर्ज लिया। इस पूंजी से उन्होंने न सिर्फ अपनी सब्जी की दुकान को फैलाया, बल्कि किराना स्टोर का व्यवसाय भी शुरू कर दिया। यह प्रयास धीरे-धीरे रंग लाया और उनका व्यापार चल निकला। आज वह स्थिति यह है कि वह अलेयू और जगत सुख जैसे इलाकों में कुल पांच दुकानों को सफलतापूर्वक चला रही हैं।
क्रेडिट लिमिट और कारोबार का विस्तार
कारोबार बढ़ने के साथ बैंक से मिलने वाली वित्तीय मदद का दायरा भी लगातार बढ़ता गया। पहले उन्हें अढ़ाई लाख रुपये मिले, जिसके बाद बैंक ने प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के अंतर्गत उन्हें 5 लाख, 10 लाख, 15 लाख और आज वर्तमान स्थिति में उनके बैंक खाते में ऋण की लिमिट बढ़कर 42 लाख रुपये तक पहुंच चुकी है। इस मजबूत वित्तीय सपोर्ट की बदौलत वह अपने व्यापार को लगातार नई ऊंचाइयों पर ले जा रही हैं। इस पूरे सफर में उनके पति भी कंधे से कंधा मिलाकर उनका साथ दे रहे हैं और दोनों मिलकर इस काम को संभालते हैं।
दूसरों को दे रहीं रोजगार और प्रधानमंत्री से मुलाकात
इस कारोबार के जरिए वह केवल अपने परिवार को आर्थिक रूप से मजबूत नहीं कर रही हैं, बल्कि अन्य 6 लोगों को भी रोजगार मुहैया करा रही हैं। उनका मानना है कि अगर यह योजना शुरू न होती, तो वह कभी भी एक छोटे दायरे से बाहर नहीं निकल पातीं। इस योजना के माध्यम से उन्हें साल 2015 में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने का भी अनमोल अवसर मिला। हाल ही में इस योजना के 10 साल पूरे होने पर, 8 अप्रैल 2015 को याद करते हुए उन्हें हिमाचल प्रदेश से एकमात्र लाभार्थी के रूप में चुना गया था। इस दौरान उनके पूरे परिवार में भारी उत्साह का माहौल था, क्योंकि उनके घर की एक महिला को देश के प्रधानमंत्री से सीधे संवाद करने का सौभाग्य मिला। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हुई इस बातचीत में उन्होंने साझा किया कि कैसे यह योजना उनके जीवन में एक नई उम्मीद बनकर आई और उन्होंने एक साधारण गृहिणी से एक सफल कारोबारी का सफर तय किया।

















