हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में मस्जिदों को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। संजौली मस्जिद पर हुए हंगामे के कुछ ही महीनों बाद अब शहर के बालूगंज इलाके की एक मस्जिद परिसर की दीवार पर भी निगम अदालत का डंडा चल गया है।
बालूगंज मस्जिद में क्या मिला अवैध
नगर निगम आयुक्त की अदालत ने बालूगंज स्थित मस्जिद परिसर में बनी एक दीवार को अवैध मानते हुए उसे गिराने का फैसला सुनाया है। आयुक्त सचिन कंवल की अदालत में यह मामला 2013 से चल रहा था, यानी करीब बारह साल बाद इस पर फैसला आया है। निगम अधिकारियों का कहना है कि परिसर में पहले से बने पुराने शौचालयों की दीवार को बिना किसी अनुमति के दोबारा खड़ा किया गया, और नई दीवार पुरानी सीमा रेखा से डेढ़ से दो फीट आगे तक जा पहुंची थी। मस्जिद पक्ष ने अपनी सफाई में कहा कि यह निर्माण महज सुविधा के मकसद से कराया गया था और उन्होंने उस जमीन पर अपना हक जताया।
एक ही दिन में छह पुराने मामलों पर फैसला
शनिवार को आयुक्त अदालत के सामने अवैध निर्माण से जुड़े कुल बीस मामले लंबित थे, जिनमें से छह पर एक साथ फैसला सुनाया गया। बालूगंज की मस्जिद के अलावा न्यू शिमला, खलीनी, पंथाघाटी और फ्लावरडेल इलाकों के निर्माण भी इसी सूची में शामिल थे। इससे साफ है कि शिमला में अवैध निर्माण सिर्फ किसी एक समुदाय या इलाके तक सीमित मुद्दा नहीं, बल्कि शहर भर में फैली एक बड़ी समस्या है, जिस पर निगम प्रशासन अब सिलसिलेवार तरीके से कार्रवाई कर रहा है।
हिन्दू संगठनों ने फिर उठाई आवाज़
फैसले के बाद हिन्दू संगठनों ने इस मुद्दे को लेकर एक बार फिर मोर्चा खोल दिया है। संगठनों का दावा है कि उन्होंने बालूगंज की इस मस्जिद का मामला पहले भी उठाया था और उनके मुताबिक शिमला में बालूगंज अकेली जगह नहीं है, बल्कि शहर की कई और मस्जिदें भी अवैध ढंग से खड़ी की गई हैं। दूसरी ओर मस्जिद कमेटी ने अभी तक अपना रुख साफ नहीं किया है कि वह इस आदेश को जिला अदालत में चुनौती देगी या दीवार को खुद हटवा देगी। फिलहाल के लिए निगम की कार्रवाई सिर्फ विवादित दीवार तक ही सीमित रखी गई है, पूरी मस्जिद को गिराने जैसा कोई आदेश अभी नहीं दिया गया है।
संजौली मस्जिद विवाद, जहां से शुरू हुई पूरी कहानी
शिमला में मस्जिदों को लेकर बहस की जड़ें संजौली मामले से जुड़ी हैं। स्थानीय निवासियों ने 2010 में नगर निगम के सामने आपत्ति दर्ज कराई थी, लेकिन यह मामला बरसों तक निगम अदालत में अटका रहा और इस पर करीब पचास बार सुनवाई हुई। आखिरकार 5 अक्टूबर 2024 को आयुक्त अदालत ने मस्जिद के ऊपरी तीन मंजिलों को अवैध निर्माण करार देते हुए गिराने का आदेश सुनाया। इसी दौर में शिमला में इस विवाद को लेकर बड़े स्तर पर प्रदर्शन हुए और यह मुद्दा पूरे हिमाचल प्रदेश में सुर्खियों में रहा। मामला यहीं नहीं थमा, 3 मई 2025 को आयुक्त अदालत ने आगे की सुनवाई करते हुए पूरे मस्जिद ढांचे को ही अवैध करार देकर उसे गिराने का आदेश दे दिया। इसके बाद यह विवाद जिला अदालत और हाईकोर्ट तक पहुंचा। इसके बाद अक्टूबर 2025 में जिला अदालत ने भी निगम प्रशासन के फैसले पर मुहर लगाते हुए अवैध हिस्से को गिराने का रास्ता साफ कर दिया, जबकि दिसंबर 2025 में हाईकोर्ट ने मस्जिद के ग्राउंड फ्लोर तथा पहली मंजिल के मामले में यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया।



















