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मंडी में सांसद कंगना रनौत का फूटा गुस्सा, दिशा समिति की बैठक में सुस्त अधिकारियों को लगाई कड़ी फटकारराजनीति
5 सित॰ 2026, 4:52 pm (6 घंटे पहले)· 2

मंडी में सांसद कंगना रनौत का फूटा गुस्सा, दिशा समिति की बैठक में सुस्त अधिकारियों को लगाई कड़ी फटकार

मंडी की सांसद कंगना रनौत ने जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति की बैठक के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों के सुस्त रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने फंड के कम उपयोग और विकास कार्यों में हो रही देरी पर कड़े सवाल किए।

मंडी से सांसद कंगना रनौत ने जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति यानी दिशा की एक अहम बैठक के दौरान अधिकारियों के कामकाज के तरीके पर भारी नाराजगी व्यक्त की है। केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं और सांसद निधि के तहत चल रहे विकास कार्यों की समीक्षा के दौरान उन्होंने लापरवाह अधिकारियों को आड़े हाथों लिया और उन्हें अपनी जिम्मेदारी पूरी ईमानदारी से निभाने की हिदायत दी।

फंड खर्च न होने पर कड़े सवाल

समीक्षा बैठक के दौरान सामने आया कि सांसद फंड के रूप में लगभग 11 करोड़ रुपये उपलब्ध थे, लेकिन इसके मुकाबले अधिकारियों ने केवल 50 लाख रुपये ही खर्च किए थे। इस भारी अंतर पर आपत्ति जताते हुए उन्होंने अधिकारियों को खरी-खोटी सुनाई। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि उन्हें झूठे वादों वाले बहाने नहीं चाहिए क्योंकि हर दिशा समिति की बैठक में उन्हें इसी तरह की बातें सुनने को मिलती हैं। उन्होंने ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर्स से इस देरी का कारण पूछा और खर्च की पूरी परफॉर्मेंस रिपोर्ट मांगी। उन्होंने बताया कि पहले उन्हें बैठकों में बताया गया था कि लगभग 90 प्रतिशत फंड का उपयोग हो चुका है और कोई दिक्कत नहीं है।

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अधिकारियों की कार्यशैली पर उठाए गंभीर सवाल

बैठक में गुस्से में नजर आईं सांसद ने कहा कि काम करवाने के लिए केंद्र से चेतावनी भरे पत्र मंगवाने पड़ते हैं तब भी अधिकारी काम नहीं करते हैं। उनके कार्यालय के निर्देशों की भी अनदेखी की जा रही है जिससे क्षेत्र में नकारात्मक प्रचार हो रहा है और लोग रील्स बनाकर मजाक उड़ा रहे हैं। उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा कि इससे उनकी जग हसाई होती है और अधिकारियों को इसके लिए शर्म आनी चाहिए। उन्होंने यहां तक कह दिया कि यदि उन्हें अधिकारियों का कार्यालय मिल जाए तो वे एक ही दिन में सारा काम करके दिखा सकती हैं।

सार्वजनिक धन के दुरुपयोग पर चेतावनी

सरकारी योजनाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इन कार्यक्रमों का मुख्य उद्देश्य जरूरतमंद और पात्र लोगों तक मदद पहुंचाना है। उन्होंने व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि जनता के पैसे का गलत इस्तेमाल नहीं होना चाहिए। उनके अनुसार करीब 30 से 40 प्रतिशत जनता का पैसा गलत हाथों में जा रहा है जिसके चलते निगरानी तंत्र को और अधिक मजबूत करने की आवश्यकता है। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि केंद्र की योजनाएं केवल कागजों तक ही सीमित नहीं रहनी चाहिए बल्कि उनका वास्तविक लाभ गांवों तक पहुंचना चाहिए।

विकास कार्यों में पारदर्शिता और समयबद्धता पर जोर

बैठक के अंत में उन्होंने जोर देकर कहा कि जनप्रतिनिधियों के साथ-साथ अधिकारियों का भी यह कर्तव्य है कि वे जनता के पैसे का पूरी पारदर्शिता के साथ उपयोग करें। किसी भी स्तर पर होने वाली लापरवाही या अनियमितता को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी विकास योजनाओं को तय समय सीमा के भीतर पूरा किया जाए और निर्माण कार्यों की गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता न किया जाए ताकि अंतिम व्यक्ति तक लाभ पहुंच सके।

सवाल-जवाब

यह बैठक किस समिति की थी?
यह जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति यानी दिशा की बैठक थी।
बैठक की अध्यक्षता किसने की?
इस बैठक की अध्यक्षता मंडी से बीजेपी सांसद कंगना रनौत ने की।
सांसद निधि के कितने रुपये उपलब्ध थे?
सांसद फंड के तहत लगभग 11 करोड़ रुपये उपलब्ध थे।
अधिकारियों ने कितना फंड खर्च किया था?
अधिकारियों द्वारा केवल 50 लाख रुपये ही खर्च किए गए थे।
सांसद ने अधिकारियों से क्या मांग की?
उन्होंने खर्च की पूरी परफॉर्मेंस रिपोर्ट मांगी और ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर्स से जवाब तलब किया।
कितना प्रतिशत जनता का पैसा गलत हाथों में जाने की बात कही गई?
बैठक में करीब 30 से 40 प्रतिशत जनता का पैसा गलत हाथों में जाने की बात कही गई।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·5 घंटे पहले

मंडी की इस घटना से यह साफ है कि जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अमले के बीच समन्वय का अभाव विकास कार्यों को किस तरह पटरी से उतार देता है। 11 करोड़ के मुकाबले केवल 50 लाख खर्च होना और पहले 90 प्रतिशत उपयोग का दावा करना ज़मीनी हकीकत और कागज़ी दावों के भारी अंतर को उजागर करता है। यदि निगरानी तंत्र इतना ही कमज़ोर रहा और सोशल मीडिया पर जग हसाई की नौबत आती रही, तो आने वाले समय में जनता का यह असंतोष राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर और बड़े टकराव का रूप ले सकता है, जिससे विकास योजनाओं की गति पर सीधा असर पड़ेगा।

Ravikash Gupta@ravikash·5 घंटे पहले

रहन सहन और प्रशासनिक मशीनरी के बीच इस तरह का गतिरोध केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका सीधा असर स्थानीय अर्थव्यवस्था और पूंजीगत व्यय पर पड़ता है। जब सांसद निधि का प्रभावी ढंग से उपयोग नहीं होता, तो ग्रामीण स्तर पर नकदी प्रवाह और आर्थिक गतिविधियों की गति धीमी हो जाती है। यदि फंड वितरण और निष्पादन चक्र में इस तरह की अकुशलता बनी रही, तो यह न केवल जिला स्तर पर वित्तीय अनुशासन को प्रभावित करेगा, बल्कि विकास परियोजनाओं की लागत में भी वृद्धि लाएगा, जिससे दीर्घकालिक आर्थिक लाभ बाधित होंगे।

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