देश के कई हिस्सों में मानसून की बारिश ने भारी तबाही मचा दी है। पश्चिमी भारत के शहरों से लेकर पहाड़ी राज्यों तक बारिश का असर साफ नजर आ रहा है। शनिवार को हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में एक भयानक भूस्खलन हुआ, जिसमें कई गाड़ियां मलबे के नीचे दब गईं। मौसम विभाग ने अब रविवार, 12 जुलाई के लिए हिमाचल प्रदेश और हरियाणा समेत उत्तर भारत के कई राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है, जिससे संकट के अभी टलने के आसार नहीं दिख रहे।
राजहाना और बोथवेल में पहाड़ी दरकी
न्यू शिमला के पास राजहाना और संजौली कॉलेज से सटे बोथवेल इलाके में शनिवार तड़के करीब चार बजे बड़े पैमाने पर भूस्खलन हुआ। उस वक्त ज्यादातर लोग अपने घरों में गहरी नींद में सो रहे थे, तभी अचानक पहाड़ी का एक बड़ा हिस्सा टूटकर नीचे आ गिरा। इलाके में इससे भारी दहशत फैल गई। राहत की बात यह रही कि किसी के हताहत होने की खबर नहीं है, लेकिन सड़क के नीचे बना ढांचा टूटकर सीधे रिहायशी मकानों की तरफ बढ़ गया। इस वजह से घरों तक पहुंचने वाला रास्ता पूरी तरह टूट गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि करीब तीन से चार इमारतें अब सीधे खतरे के दायरे में आ चुकी हैं और किसी भी वक्त और नुकसान होने का डर बना हुआ है।
राजहाना में मलबे में दबीं गाड़ियां
मोहल राजहाना में लगातार हो रही बारिश की वजह से पहाड़ी के ऊपरी हिस्से से बड़ी मात्रा में चट्टानें, बोल्डर और मलबा सीधे सड़क पर आ गिरा। सड़क किनारे खड़ी कई गाड़ियां इस भूस्खलन की चपेट में आ गईं। मौके पर पार्क की गई दो गाड़ियां बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं और आंशिक रूप से मलबे में दब गईं। हालांकि किसी वाहन में उस वक्त कोई सवार नहीं था, इसलिए बड़ा हादसा टल गया।
हिमाचल प्रदेश में 12 जुलाई का मौसम अलर्ट
मौसम विभाग ने हिमाचल प्रदेश के कई जिलों के लिए सख्त चेतावनी जारी की है। चंबा, कुल्लू, शिमला और सिरमौर जिलों में गरज-चमक के साथ मध्यम से भारी बारिश का पूर्वानुमान जताया गया है। इसके अलावा मंडी, किन्नौर और कांगड़ा जिलों में भी लगातार मध्यम बारिश जारी रहने की संभावना जताई गई है। बारिश के इस उग्र रूप को देखते हुए कांगड़ा और मंडी जैसे जिलों के प्रशासन ने नदियों और झरनों के पास जाने पर पूरी तरह रोक लगा दी है, ताकि अचानक जलस्तर बढ़ने से किसी की जान को खतरा न हो। शिमला स्थित मौसम विज्ञान केंद्र ने लोगों से अपील की है कि निचले इलाकों में जलभराव, कम दृश्यता और फिसलन की वजह से सड़क दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है, इसलिए यातायात पुलिस की सलाह का पालन करें और नदी-नालों से दूर रहें। पहाड़ी राज्यों में मानसून के इन हफ्तों में भूस्खलन और अचानक बाढ़ जैसी घटनाएं आम हो जाती हैं, इसलिए स्थानीय प्रशासन हर साल इस मौसम में खास सतर्कता बरतता है। उत्तराखंड में भी भारी बारिश और पहाड़ी रास्तों पर भूस्खलन को लेकर इसी तरह की चेतावनी जारी की गई है।
हरियाणा में करनाल-अंबाला से हथनीकुंड बैराज तक असर
पहाड़ों की बारिश का सीधा असर अब मैदानी राज्य हरियाणा पर भी पड़ रहा है। करनाल और अंबाला समेत राज्य के कई हिस्सों में भारी बारिश दर्ज की गई है। यमुनानगर स्थित हथनीकुंड बैराज पर लगातार हो रही बारिश की वजह से जलस्तर खतरनाक स्तर की तरफ बढ़ता जा रहा है। इसे देखते हुए प्रशासन ने यमुना नदी के किनारे बसे सभी गांवों को सतर्क रहने और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानों की तरफ जाने की सलाह दी है, क्योंकि बैराज से पानी छोड़े जाने पर निचले इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बन सकते हैं।
गुरुग्राम की सड़कों पर जलभराव, ट्रैफिक जाम
साइबर सिटी गुरुग्राम में भी भारी बारिश ने आम जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। शहर की प्रमुख सड़कों पर जलभराव की स्थिति बनी हुई है, जिसकी वजह से जगह-जगह भयंकर ट्रैफिक जाम लग रहा है और दफ्तर आने-जाने वाले लोगों को घंटों परेशानी झेलनी पड़ रही है।
फरीदाबाद के खेत 15 फीट पानी में डूबे
हरियाणा के फरीदाबाद से एक बेहद दर्दनाक तस्वीर सामने आई है। भारी बारिश और जलभराव की वजह से यहां के एक गांव में किसानों का अपने खेतों तक पहुंचना पूरी तरह नामुमकिन हो गया है। खेतों की तरफ जाने वाला रास्ता 5 से 15 फीट तक गहरे पानी में डूब चुका है। पानी इतना ज्यादा भर गया है कि धान और हरी सब्जियों की लहलहाती फसलें पूरी तरह जलमग्न हो गई हैं। किसानों पर भारी आर्थिक संकट मंडरा रहा है और वे अब प्रशासन से मदद की गुहार लगा रहे हैं।
आगे कैसा रहेगा मौसम का हाल
मौसम विभाग के मुताबिक हरियाणा और दिल्ली के आसपास एक मौसमी सिस्टम विकसित होने की वजह से भारी बारिश का यह दौर अभी थमने वाला नहीं है। रविवार को भी हिमाचल प्रदेश से लेकर हरियाणा, चंडीगढ़, पंजाब और उत्तराखंड में भारी बारिश जारी रहने की पूरी संभावना है, जिससे आम जनजीवन और यातायात दोनों प्रभावित हो सकते हैं। प्रशासन साफ-सफाई और राहत कार्यों में जुटा हुआ है, लेकिन लगातार हो रही बारिश की वजह से चुनौती बड़ी बनी हुई है।











