हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में फोरलेन विस्तार के तहत चल रहे भूमिगत सुरंग के काम ने स्थानीय बाशिंदों की चिंता बढ़ा दी है। ढली क्षेत्र में तैयार हो रही दोहरी सुरंग के ठीक ऊपरी हिस्से में स्थित संजौली सिमिट्री इलाके के आवासीय ढांचों में दरारें उभर आई हैं। रिहायशी इमारतों में आई इन दीवारों की खराबी से सैकड़ों परिवारों के आशियानों पर गंभीर खतरा मंडराने लगा है। घटनाक्रम की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह हरकत में आ गया है और जमीनी स्तर पर राहत एवं तकनीकी आकलन की रणनीति तैयार की गई है।
प्रशासन की उच्चस्तरीय बैठक और प्रभावितों की सुनवाई
संजौली सिमिट्री में भूमिगत निर्माण के कारण उभरी समस्याओं को लेकर शिमला के उपायुक्त अनुपम कश्यप की अध्यक्षता में एक समीक्षा बैठक आयोजित हुई। इस बैठक में प्रभावित निवासियों की चिंताओं को प्रमुखता से सुना गया और उनके त्वरित समाधान पर गहन विमर्श हुआ। राजस्व विभाग के अधिकारियों को स्पष्ट हिदायत दी गई है कि वे पूरे इलाके में घूमकर ऐसे सभी घरों की सूची बनाएं जहां दरारें आई हैं और मरम्मत की तत्काल जरूरत है।
बैठक में तय हुआ कि निर्माण कार्य कर रही एजेंसी इन चिन्हित इमारतों को ठीक करने के लिए एक मुकम्मल मरम्मत योजना पेश करेगी। कार्य की मजबूती और मानकों की पुष्टि के लिए लोक निर्माण विभाग के तकनीकी अधिकारियों को निगरानी का जिम्मा सौंपा गया है। लोक निर्माण विभाग के इंजीनियरों द्वारा कार्य की गुणवत्ता की गहन जांच और आधिकारिक मंजूरी मिलने के बाद ही मरम्मत प्रक्रिया को पूर्ण माना जाएगा, ताकि स्थानीय नागरिकों की जान-माल की मुकम्मल सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
तीन चरणों में होगा 100 मीटर के दायरे का सर्वेक्षण
निर्माणाधीन दोहरी सुरंग के ऊपरी सतह पर करीब 100 मीटर के पूरे इलाके का विस्तृत तकनीकी सर्वेक्षण करने का निर्णय लिया गया है। इस पूरी पड़ताल को तीन अलग-अलग हिस्सों में बांटकर अंजाम दिया जाएगा ताकि संभावित खतरे का सटीक अनुमान लग सके।
सर्वेक्षण के शुरुआती चरण में 11-11 मीटर चौड़ी दोनों सुरंगों के ठीक ऊपर बने मकानों की स्थिति परखी जाएगी। इसके पश्चात दूसरे चरण में दोनों सुरंगों के मध्य मौजूद 20 मीटर चौड़े हिस्से पर टिकी इमारतों का संरचनात्मक जायजा लिया जाएगा। तीसरे व अंतिम चरण में सुरंग के दोनों किनारों पर 30-30 मीटर के फासले में स्थित सभी मकानों की सघन जांच कर डेटा तैयार किया जाएगा।
ब्लास्टिंग की अनुमति तुरंत रद्द, तकनीकी विशेषज्ञों को बुलावा
समीक्षा के दौरान भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि वर्तमान समय में परियोजना स्थल पर किसी भी तरह का विस्फोट नहीं किया जा रहा है। इसके बावजूद एहतियाती कदम उठाते हुए जिला प्रशासन ने संबंधित कंपनी को जारी किए गए सभी ब्लास्टिंग परमिट तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिए हैं।
दरारों के वास्तविक कारणों का वैज्ञानिक विश्लेषण करने के लिए आईआईटी रुड़की से तकनीकी विशेषज्ञों का दल बुलाने का औपचारिक अनुरोध भेजा गया है। यह दल मौके पर पहुंचकर जमीन की बनावट, निर्माण के झटकों और इमारतों की दीवारों पर पड़े असर का वैज्ञानिक अध्ययन करेगा। साथ ही विशेषज्ञ दल यह भी दिशा-निर्देश देगा कि भविष्य में सुरंग का शेष कार्य किन सावधानियों और इंजीनियरिंग तकनीकों के साथ पूरा किया जाए जिससे कोई नया नुकसान न हो।
मौके पर पहुंचे अधिकारी, हर पहलू पर पैनी नजर
दरारों की प्रारंभिक जानकारी सामने आते ही अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी और एसडीएम की टीमों ने पहले ही प्रभावित गलियों का दौरा कर लिया था। इसके बाद खुद उपायुक्त शिमला, पुलिस अधीक्षक तथा अन्य वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने संजौली सिमिट्री पहुंचकर जमीनी हकीकत देखी और निवासियों से सीधा संवाद किया।
इस उच्चस्तरीय बैठक और निरीक्षण प्रक्रिया में अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी (कानून एवं व्यवस्था) पंकज शर्मा, अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी (प्रोटोकॉल) ज्ञान सागर नेगी, एसडीएम शिमला ग्रामीण मंजीत शर्मा, एनएचएआई के परियोजना निदेशक आनंद कुमार व उप प्रबंधक सुमित बंसल उपस्थित रहे। निर्माण कार्य से जुड़ी गवार कंस्ट्रक्शन कंपनी के महाप्रबंधक कुलदीप गुजराल, भारत कंस्ट्रक्शन के प्रोजेक्ट मैनेजर सदानंद मोहंती एवं एचआर मैनेजर रविंदर चंदेल तथा काला के नायब तहसीलदार लायक राम शर्मा और बी. एस. चौहान भी चर्चा में शामिल रहे। उपायुक्त ने स्थानीय लोगों को भरोसा दिया कि प्रशासन नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहा है और हालात पर चौबीसों घंटे निगरानी रखी जा रही है।





















