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पंजाब और हरियाणा अगले 20 साल तक हिमाचल को देंगे बिजली, सुप्रीम कोर्ट के फैसले से खत्म हुआ दशकों पुराना विवादहिमाचल प्रदेश
6 नव॰ 2026, 4:42 pm (2 घंटे पहले)· 0

पंजाब और हरियाणा अगले 20 साल तक हिमाचल को देंगे बिजली, सुप्रीम कोर्ट के फैसले से खत्म हुआ दशकों पुराना विवाद

सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश, पंजाब और हरियाणा के बीच बिजली बंटवारे के पुराने विवाद का समाधान कर दिया है। इसके तहत हिमाचल प्रदेश को अगले 20 वर्षों तक भाखड़ा-नांगल और ब्यास परियोजनाओं से 7.19% की दर से कुल 11,973 मिलियन यूनिट बिजली मिलेगी।

हिमाचल प्रदेश के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। अब राज्य को भाखड़ा-नांगल और ब्यास जलविद्युत परियोजनाओं से तय बिजली मिलने का मार्ग पूरी तरह से प्रशस्त हो गया है। पंजाब और हरियाणा मिलकर अब हिमाचल प्रदेश को 7.19% बिजली प्रदान करेंगे। देश के सर्वोच्च न्यायालय ने कई दशकों पुराने अंतरराज्यीय विवाद का निपटारा करते हुए यह ऐतिहासिक आदेश दिया है, जिससे पहाड़ी राज्य की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद मिलेगी।

इस पूरे मामले की पृष्ठभूमि में मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहन की विशेष पीठ ने सुनवाई की। अदालत ने तीनों राज्यों के वरिष्ठ अधिकारियों और पक्षों के बीच हुई बातचीत के आधार पर तैयार किए गए आपसी समझौते को औपचारिक स्वीकृति प्रदान की है। इस समझौते की खास बात यह है कि इसमें एक नया कैशलेस सेटलमेंट फॉर्मूला अपनाया गया है, जिसके जरिए हिमाचल प्रदेश को उसके तयशुदा बिजली कोटे का पूरा लाभ बिना किसी अड़चन के मिल सकेगा।

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यह पूरा विवाद मुख्य रूप से भाखड़ा-नांगल और ब्यास परियोजनाओं से होने वाले बिजली उत्पादन में हिमाचल प्रदेश की हिस्सेदारी को लेकर था, जो पिछले कई दशकों से अनसुलझा था। हिमाचल प्रदेश की दलील हमेशा से यह रही थी कि इन विशाल परियोजनाओं के निर्माण के लिए उसके भूभाग, भौगोलिक स्थिति और प्राकृतिक संसाधनों का इस्तेमाल किया गया है। इसलिए, स्थानीय हितों और संसाधनों के उपयोग को ध्यान में रखते हुए उसे भी उत्पादित बिजली में एक निश्चित और न्यायसंगत हिस्सा मिलना चाहिए, जिस पर पंजाब और हरियाणा के साथ उसका मतभेद लंबे समय तक खिंचता चला गया था।

शीर्ष अदालत की मुहर लगने के बाद अब इस जटिल विवाद का हमेशा के लिए समाधान हो गया है। समझौते के प्रावधानों के अनुसार, आने वाले दो दशकों में यानी अगले 20 वर्षों के भीतर हिमाचल प्रदेश को कुल 11,973 मिलियन यूनिट (एमयू) बिजली मिलेगी। इतनी बड़ी मात्रा में ऊर्जा मिलने से न सिर्फ राज्य की अपनी ऊर्जा जरूरतें आसानी से पूरी होंगी, बल्कि बिजली की निर्बाध आपूर्ति के मामले में भी प्रदेश को बड़ी राहत मिलेगी और दशकों पुराना क्षेत्रीय तनाव भी समाप्त हो जाएगा।

भाखड़ा-नांगल और ब्यास जलविद्युत परियोजनाओं से जुड़ा विवाद

उत्तर भारत के कई राज्यों जैसे कि पंजाब, हिमाचल प्रदेश और हरियाणा को भाखड़ा-नांगल और ब्यास नदी परियोजनाएं बड़े पैमाने पर सिंचाई के लिए पानी और बिजली की आपूर्ति करती हैं। इन दोनों महत्वपूर्ण परियोजनाओं से उत्पन्न होने वाली ऊर्जा में हिमाचल प्रदेश के अधिकार को लेकर लंबे समय से खींचतान चल रही थी। राज्य का साफ तौर पर कहना था कि इन ढांचागत विकास कार्यों की खातिर उसकी अपनी जमीन और प्राकृतिक संपदा का भारी दोहन हुआ है, जिसके एवज में उसे उचित बिजली का हक मिलना चाहिए।

शुरुआती और पुराने बिजली बंटवारे के फॉर्मूले के अंतर्गत हिमाचल प्रदेश को इन बड़े संसाधनों से मात्र 2.5 फीसदी हिस्सा ही मिल रहा था, जो उसकी अपेक्षाओं और जरूरतों से बहुत कम था। इस स्थिति से असंतुष्ट होकर हिमाचल प्रदेश सरकार ने वर्ष 1996 में देश के सर्वोच्च न्यायालय में एक मुकदमा दायर किया था। लंबी कानूनी लड़ाई के बाद साल 2011 में अदालत ने हिमाचल प्रदेश के पक्ष में फैसला सुनाते हुए उसकी हिस्सेदारी को बढ़ाकर 7.19 प्रतिशत तय कर दिया था।

हालांकि, वर्ष 2011 के फैसले के बाद भी पिछले तमाम वर्षों के दौरान बकाया पड़ी बिजली के हिस्से के वित्तीय और भौतिक भुगतान को लेकर विवाद थमा नहीं था और दोनों पक्षों के बीच पेंच फंसा हुआ था। अब सुप्रीम कोर्ट द्वारा 11,973 मिलियन यूनिट बिजली के इस नए और व्यावहारिक समझौते को आधिकारिक मंजूरी दे दिए जाने से इस पुराने गतिरोध का पूरी तरह से अंत हो गया है और तीनों राज्यों के बीच सहयोग का नया अध्याय शुरू हुआ है।

सवाल-जवाब

सुप्रीम कोर्ट के फैसले से हिमाचल प्रदेश को कुल कितनी बिजली मिलेगी?
हिमाचल प्रदेश को अगले 20 वर्षों में पंजाब और हरियाणा से कुल 11,973 मिलियन यूनिट बिजली मिलेगी।
हिमाचल प्रदेश को कितनी फीसदी हिस्सेदारी देने का प्रावधान किया गया है?
समझौते के तहत हिमाचल प्रदेश को भाखड़ा-नांगल और ब्यास परियोजनाओं से 7.19% बिजली का आवंटन किया गया है।
इस विवाद के समाधान के लिए कौन सा नया फॉर्मूला अपनाया गया है?
राज्यों के बीच इस विवाद को सुलझाने के लिए एक नया कैशलेस सेटलमेंट फॉर्मूला अपनाया गया है।
हिमाचल प्रदेश ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में मुकदमा कब दायर किया था?
हिमाचल प्रदेश ने इस मामले को लेकर वर्ष 1996 में सुप्रीम कोर्ट में मुकदमा दायर किया था।
सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल के पक्ष में पहली बार फैसला कब सुनाया था?
अदालत ने साल 2011 में हिमाचल प्रदेश के पक्ष में 7.19 फीसदी हिस्सेदारी देने का फैसला सुनाया था।
इस समझौते की सुनवाई करने वाली सुप्रीम कोर्ट की पीठ में कौन-कौन शामिल था?
इस पीठ में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहन शामिल थे।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 4

Ravikash Gupta@ravikash·19 मिनट पहले

जब मैं शिमला में था, तब स्थानीय लोग अक्सर इस पानी और बिजली के हक की बात करते थे। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से आखिरकार दशकों का इंतजार खत्म हुआ।

Arjun Mehta@arjun-mehta·18 मिनट पहले

रविकेश जी, सच कहा आपने, शिमला में ये मुद्दा हर चुनाव में उठता था। आखिरकार इतने सालों बाद सही न्याय मिला है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 घंटे पहले

बचपन में जब शिमला जाते थे, तो कई बार रास्ते में बिजली गुल हो जाती थी और कैंडल लाइट में बैठना पड़ता था। तब बड़ों को बात करते सुनते थे कि हिमाचल के पानी से बिजली बनती है पर फायदा दूसरे राज्यों को मिलता है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से आखिरकार उस पुराने हक की लड़ाई का सुकून भरा अंत हुआ है।

Rohan Verma@rohan-verma·1 घंटे पहले

करन भाई, वही तो! बचपन की वो कैंडल लाइट वाली यादें आज भी ताजा हैं, सुप्रीम कोर्ट के इस कैशलेस सेटलमेंट फॉर्मूले से सच में एक बड़ा हक मिला है।

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