समुद्री जीवों की दुनिया में ऑक्टोपस हमेशा से ही अपने अनोखे व्यवहार और बुद्धिमत्ता के कारण वैज्ञानिकों के लिए आकर्षण का केंद्र रहे हैं। इस जीव के पास केवल एक पारंपरिक दिमाग ही नहीं होता, बल्कि इसके शरीर की बनावट और तंत्रिका तंत्र भी बेहद अनोखे तरीके से काम करते हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार, ऑक्टोपस की बुद्धिमत्ता का एक बड़ा हिस्सा उसके केंद्रीय मस्तिष्क में नहीं बल्कि उसकी आठों बाजुओं में समाया होता है।
तंत्रिका तंत्र और बाजुओं की स्वतंत्रता
ऑक्टोपस के शरीर में कुल लगभग 50 करोड़ न्यूरॉन्स पाए जाते हैं। इनमें से दो-तिहाई से ज्यादा न्यूरॉन्स उसके चूषकों से लैस अंगों यानी बाजुओं के अंदर ही मौजूद होते हैं। यह एक तरह की वितरित बुद्धिमत्ता है, जो पूरी तरह से सेफेलोपॉड जीवों में ही देखने को मिलती है। यही वजह है कि ऑक्टोपस की प्रत्येक बाजू किसी भी दिशा में आसानी से मुड़ सकती है और चीजों को छूकर या चखकर अत्यधिक संवेदनशीलता के साथ महसूस कर सकती है.
केंद्रीय मस्तिष्क और अंगों का तालमेल
ऑक्टोपस की ये शक्तिशाली भुजाएं केवल शारीरिक अंगों की तरह काम नहीं करतीं, बल्कि वे अपने दम पर फैसले लेने की क्षमता भी रखती हैं। इन सभी आठों बाजुओं को आपस में जोड़ने वाली एक तंत्रिका वलय होती है, जो समुद्र के तल पर खोजबीन करने में मदद करती है। दिलचस्प बात यह है कि समुद्र के भीतर की जाने वाली यह खोज हमेशा ऊपर स्थित केंद्रीय मस्तिष्क के सीधे नियंत्रण में नहीं होती, बल्कि कई बार भुजाएं खुद स्वतंत्र रूप से निर्णय लेती हैं।
अनोखे जीव और उनकी खासियतें
अपनी इस अद्भुत शारीरिक सरंचना के बल पर ऑक्टोपस कई ऐसे जटिल काम कर दिखाने में सक्षम हैं जो अन्य जीवों के लिए असंभव माने जाते हैं। वे अंदर से जार के ढक्कन खोल सकते हैं और जरूरत पड़ने पर अपने आसपास के अवांछित जीवों पर रेत तक फेंक सकते हैं। इसके अलावा, संभोग के लिए इस्तेमाल होने वाला अंग भी इसी अनूठी व्यवस्था का हिस्सा है, जो जीव विज्ञान और तंत्रिका विज्ञान के क्षेत्र में शोधकर्ताओं को लगातार हैरान कर रहा है।



















