संसद के मानसून सत्र में सोमवार को भी हंगामे का वही पुराना सिलसिला जारी रहा। लोकसभा और राज्यसभा दोनों में विपक्षी सांसदों की नारेबाजी के चलते कार्यवाही बार-बार स्थगित करनी पड़ी, हालांकि इसी शोरगुल के बीच सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाने वाला विधेयक समेत कई अहम बिल ध्वनिमत से पास हो गए।
25 में से 15 दिन बीते, हर मिनट पर ₹2.5 लाख का खर्च
मानसून सत्र कुल 25 दिन का है, जिसमें से 15 दिन गुजर चुके हैं, लेकिन अब तक एक भी दिन ऐसा नहीं रहा जब दोनों सदनों की कार्यवाही बिना रुकावट के चली हो। अनुमान है कि संसद का हर मिनट सरकारी खजाने पर करीब ₹2.5 लाख का बोझ डालता है, यानी हर स्थगन का सीधा असर जनता के पैसे पर पड़ता है। सोमवार को भी दोनों सदनों का काफी समय हंगामे की भेंट चढ़ गया।
लोकसभा 3 मिनट में ही स्थगित
लोकसभा की कार्यवाही सुबह 11 बजे शुरू हुई, लेकिन विपक्षी सांसदों के नारेबाजी शुरू करते ही अध्यक्ष ओम बिड़ला को महज 3 मिनट के भीतर सदन स्थगित करना पड़ा। बिड़ला ने सदस्यों के व्यवहार पर नाराजगी जताई और सदन की गरिमा बनाए रखने की अपील की।
दोपहर 12 बजे कार्यवाही फिर शुरू हुई। पीठासीन अधिकारी कृष्ण प्रसाद तेन्नेती ने सदस्यों से सदन के पटल पर जरूरी दस्तावेज रखने को कहा, लेकिन विपक्ष की नारेबाजी थमी नहीं। इसी दौरान भारतीय सांख्यिकी संस्थान विधेयक, 2026 भी सदन में पेश किया गया।
इसके बाद केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बैंकर्स बुक्स एविडेंस बिल, 2026 पेश किया, लेकिन विपक्ष का हंगामा नहीं रुका, जिसके चलते सदन की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी।
हंगामे के बीच पास हुआ सुप्रीम कोर्ट संशोधन विधेयक
दोपहर 2 बजे सदन दोबारा शुरू हुआ, जहां केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने चर्चा और पारण के लिए सुप्रीम कोर्ट (संशोधन) विधेयक, 2026 पेश किया। इस दौरान कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के सांसद राम मंदिर चंदा चोरी और दिल्ली में छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई के मुद्दों पर नारेबाजी करते रहे।
हंगामे के बावजूद यह विधेयक ध्वनिमत से पारित हो गया। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश समेत जजों की कुल संख्या 34 से बढ़कर 38 हो गई। इसके बाद लोकसभा की कार्यवाही मंगलवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।
राज्यसभा में भी वही तस्वीर
राज्यसभा में भी हालात अलग नहीं रहे। सुबह 11 बजे कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सदस्य नारेबाजी करने लगे। सभापति सीपी राधाकृष्णन ने सदस्यों से शांति बनाए रखने और सदन चलने देने की अपील की, लेकिन शोरगुल थमता न देख उन्हें भी कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी।
दोपहर में सदन दोबारा शुरू हुआ तो जीतन राम मांझी, जो सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री हैं, ने सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) विधेयक, 2026 विचार के लिए सदन में रखा। सभापति ने नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को बोलने की अनुमति दी। हंगामे के बीच संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि उसकी इस विषय पर चर्चा करने में कोई दिलचस्पी ही नहीं है।
इसी उठापटक के बीच सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) विधेयक, 2026 भी ध्वनिमत से पारित हो गया। इसके बाद राज्यसभा की कार्यवाही भी मंगलवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।



















