जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद पर सुरक्षा बलों की निरंतर और निर्णायक कार्रवाई का बड़ा असर देखने को मिल रहा है। केंद्र शासित प्रदेश में स्थानीय आतंकवाद पूरी तरह खात्मे के कगार पर पहुंच गया है। सुरक्षा एजेंसियों के ताजा आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक, पूरे जम्मू-कश्मीर में अब केवल एक ही स्थानीय आतंकवादी सक्रिय बचा है। भारतीय सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की संयुक्त टीमें इस आखिरी बचे स्थानीय आतंकी को पकड़ने या ढेर करने के लिए बड़े पैमाने पर अभियान चला रही हैं।
अंतिम स्थानीय आतंकी मोहम्मद लतीफ भट का प्रोफाइल और आपराधिक मामले
सुरक्षा बलों द्वारा मोस्ट वांटेड घोषित किए गए इस एकमात्र बचे स्थानीय आतंकी का नाम मोहम्मद लतीफ भट है, जो दक्षिण कश्मीर के कुलगाम जिले का रहने वाला है। जांच एजेंसियों के अनुसार, मोहम्मद लतीफ भट साल 2025 के दौरान कट्टरपंथी नेटवर्क के संपर्क में आया था। इसके बाद वह लश्कर-ए-तैयबा के सहयोगी संगठन कश्मीर रिवोल्यूशन आर्मी (केआरए) में शामिल हो गया।
सुरक्षा एजेंसियों की जांच में सामने आया है कि भट कई गंभीर और हिंसक वारदातों में शामिल रहा है। वह छत्तीसगढ़ के दो प्रवासी मजदूरों की हत्या में मुख्य रूप से शामिल था, जो कश्मीर में रोजी-रोटी कमाने आए थे। इसके अलावा, 22 जुलाई को जम्मू-कश्मीर पुलिस के हेड कांस्टेबल आशिक हुसैन की गोली मारकर की गई हत्या में भी भट का ही हाथ बताया गया है।
इन हत्याओं की जांच के दौरान सुरक्षा बलों को हमलावर के काम करने के तरीके में काफी समानता देखने को मिली है। चश्मदीदों के बयानों और जांच रिपोर्ट के अनुसार, 22 जुलाई को हेड कांस्टेबल आशिक हुसैन की हत्या और छत्तीसगढ़ के दोनों प्रवासी मजदूरों पर हमले, दोनों ही घटनाओं में हमलावर ने अपने सिर पर टोपी पहन रखी थी। उसने अपने हथियार को एक बोरे के भीतर छिपा रखा था और बेहद करीब पहुंचकर अचानक गोलियां चला दीं। वारदात को अंजाम देने के तुरंत बाद वह मौका-ए-वारदात से भागने में कामयाब रहा।
अमरनाथ यात्रा को निशाना बनाने की साजिश और जंगलों में घेराबंदी से फरार
विशिष्ट हत्याओं के अलावा, मोहम्मद लतीफ भट और उसके आकाओं की नजर जम्मू-कश्मीर में शांति बिगाड़ने के लिए अमरनाथ यात्रा पर भी थी। खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, भट लश्कर-ए-तैयबा के श्रेणी-ए कमांडर जाकिर अहमद गनई के साथ मिलकर पवित्र अमरनाथ यात्रा पर हमला करने की एक बड़ी साजिश रच रहा था।
हाल ही में अनंतनाग जिले के घने जंगलों में सुरक्षा बलों ने 'ऑपरेशन शेरूवाली' नामक एक बड़ा संयुक्त अभियान चलाया था। इस ऑपरेशन में सेना, पुलिस और सीआरपीएफ के जवान शामिल थे। मुठभेड़ के दौरान सुरक्षा बलों ने लश्कर-ए-तैयबा के श्रेणी-ए कमांडर जाकिर अहमद गनई को तो मार गिराया, लेकिन मोहम्मद लतीफ भट घने जंगलों का फायदा उठाकर भागने में सफल रहा। सुरक्षा रिकॉर्ड के अनुसार, भट अब तक दो बार सुरक्षा बलों की घेराबंदी तोड़कर भागने में कामयाब हो चुका है और वह इस समय केंद्र शासित प्रदेश का सबसे वांछित स्थानीय आतंकी है।
स्थानीय आतंकियों की संख्या में ऐतिहासिक गिरावट और आंकड़े
जम्मू-कश्मीर में स्थानीय आतंकियों की संख्या का केवल एक तक सीमित होना सुरक्षा के दृष्टिकोण से एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। अगर पिछले पांच सालों के आंकड़ों पर नजर डालें, तो करीब पांच वर्ष पहले तक घाटी और जम्मू क्षेत्र को मिलाकर 50 से 60 स्थानीय आतंकी सक्रिय भूमिका में थे।
यहां तक कि मई 2025 के आधिकारिक रिकॉर्ड बताते हैं कि उस समय तक प्रदेश में 17 स्थानीय आतंकी सक्रिय दर्ज किए गए थे। इनमें से 14 कश्मीर घाटी में और 3 जम्मू संभाग में सक्रिय थे। वहीं दूसरी तरफ, वर्तमान में विदेशी आतंकियों की बात की जाए तो पूरे क्षेत्र में करीब 40 से 50 विदेशी आतंकियों के सक्रिय होने का अनुमान है, जबकि मई 2025 के दौरान यह संख्या लगभग 60 दर्ज की गई थी।
आतंकवादी नेटवर्क के ध्वस्त होने के प्रमुख कारण
सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, स्थानीय आतंकवाद में आई इस अभूतपूर्व गिरावट के पीछे सुरक्षा बलों का लगातार आक्रामक रुख, सटीक खुफिया जानकारी पर आधारित त्वरित कार्रवाई और आतंकी वित्तीय नेटवर्क पर कड़ा प्रहार सबसे मुख्य कारण हैं। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने पिछले दो सालों में आतंकवाद की फंडिंग, अवैध वित्तीय लेन-देन और नार्को-टेरर नेटवर्क के खिलाफ व्यापक अभियान चलाया है।
एनआईए और स्थानीय पुलिस द्वारा कई आतंकी मॉड्यूल और जमीनी मददगारों (ओवरग्राउंड वर्करों) का नेटवर्क ध्वस्त किए जाने से नए युवाओं की भर्ती प्रक्रिया लगभग बंद हो चुकी है। सुरक्षा अधिकारियों को भरोसा है कि मोहम्मद लतीफ भट की गिरफ्तारी या उसके खात्मे के साथ ही जम्मू-कश्मीर में स्थानीय आतंकवाद का अध्याय हमेशा के लिए समाप्त हो जाएगा।



















