जम्मू-कश्मीर में सक्रिय आतंकी नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करने के संकल्प के साथ रविवार को एक बड़ा अभियान चलाया गया। जम्मू-कश्मीर पुलिस की विशेष शाखा, काउंटर-इंटेलिजेंस कश्मीर (सीआईके) ने रविवार को आतंकवाद से जुड़े एक मामले में दक्षिण कश्मीर के कई हिस्सों में ताबड़तोड़ छापेमारी की। सुरक्षा अधिकारियों द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, इस विशेष विंग ने कुलगाम और शोपियां जैसे संवेदनशील जिलों में सघन तलाशी अभियान चलाया। अन्य सुरक्षा एजेंसियों के सक्रिय सहयोग से की गई इस कार्रवाई के संबंध में विस्तृत जानकारी का अभी इंतजार किया जा रहा है।
सीआईके का बढ़ता दायरा और डिजिटल रणनीति
काउंटर-इंटेलिजेंस कश्मीर (सीआईके) जम्मू-कश्मीर पुलिस की एक अत्यंत विशिष्ट और तकनीकी रूप से सक्षम इकाई है। इस विंग ने हाल के दिनों में घाटी के भीतर सक्रिय आतंकी नेटवर्क, युवाओं को गुमराह करने वाले रेडिकलाइजेशन मॉड्यूल और टेरर फंडिंग के गुप्त रास्तों को बंद करने के लिए अपने अभियानों को अत्यधिक तेज कर दिया है। रविवार को शोपियां और कुलगाम में की गई कार्रवाई इस रणनीति का एक हिस्सा है, जिसके तहत आतंकियों को मिलने वाली रसद और संचार सहायता को काटना है। इस समय सीआईके की टीमों का मुख्य ध्यान उन नेटवर्क पर है जो सुरक्षा एजेंसियों की नजरों से बचने के लिए बेहद सुरक्षित और छिपे हुए मैसेजिंग एप्लिकेशन्स का इस्तेमाल कर रहे हैं।
एन्क्रिप्टेड एप्लिकेशन्स और डिजिटल साक्ष्यों पर कड़ा प्रहार
इससे पहले, इसी साल सीआईके ने कश्मीर घाटी के छह जिलों में एक साथ बड़े पैमाने पर छापेमारी की थी। इन जिलों में बडगाम, अवंतीपोरा, पुलवामा, कुपवाड़ा, शोपियां और राजधानी श्रीनगर शामिल थे। जांच के दौरान सीआईके ने पाया कि कुछ स्थानीय संदिग्ध लोग सीमा पार बैठे अपने आकाओं के साथ लगातार संपर्क में बने रहने के लिए अत्यधिक सुरक्षित एन्क्रिप्टेड ऐप्स का सहारा ले रहे थे। इस नेटवर्क के संचार सूत्रों का पता लगाने और उनके पूरे तंत्र को समझने के लिए सीआईके ने कई डिजिटल डिवाइस और मोबाइल लॉग्स को अपने कब्जे में लिया था।
जुलाई 2026 में जैश-ए-मोहम्मद के भर्ती मॉड्यूल का भंडाफोड़
आतंकवाद विरोधी अभियानों में सीआईके को जुलाई 2026 में एक बड़ी सफलता हाथ लगी थी, जब इस विशेष विंग ने जैश-ए-मोहम्मद के स्थानीय भर्ती और स्लीपर सेल मॉड्यूल को पूरी तरह निष्क्रिय कर दिया था। सीमा पार से संचालित होने वाला यह खतरनाक नेटवर्क घाटी के पुलवामा, गंदेरबल, श्रीनगर और बडगाम जिलों में सक्रिय था। इस मामले की जांच के दौरान, सीआईके ने दस विशिष्ट स्थानों पर एक साथ छापेमारी की थी ताकि सीमा पार के एक कमांडर से सीधे निर्देश ले रहे गिरोह को दबोचा जा सके। इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य स्थानीय युवाओं को बहला-फुसलाकर स्लीपर सेल में शामिल होने से रोकना था, जिन्हें एलओसी के पार से पूरा सहयोग मिल रहा था।
जेलों के भीतर सक्रिय गुप्त संचार नेटवर्क पर बड़ी कार्रवाई
सड़क पर चल रहे अभियानों के अलावा, सीआईके ने जेलों के भीतर से संचालित होने वाले गुप्त नेटवर्क पर भी गहरी चोट की है। एक विस्तृत खुफिया अभियान के तहत, अनंतनाग जिला जेल के साथ-साथ कुलगाम, उधमपुर और जम्मू शहर के कारागारों में बंद कैदियों के बाहरी संपर्कों को पूरी तरह काट दिया गया। जेल परिसरों के भीतर से संदिग्ध तकनीकी सिग्नेचर मिलने के बाद सीआईके ने अदालती वारंट के साथ सघन तलाशी ली थी। इस दौरान बैरकों से कई मोबाइल फोन, सक्रिय सिम कार्ड और टैबलेट बरामद किए गए, जिससे कैदियों द्वारा बाहर के सहयोगियों को निर्देश देने की कोशिशों को नाकाम कर दिया गया।



















