जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने यूपीआई के जरिए होने वाले लेन-देन पर संभावित शुल्क को लेकर चल रही बहस के बीच केंद्र सरकार के रुख का समर्थन किया है। मीडिया से चर्चा के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि इस प्रकार के वृहद डिजिटल भुगतान तंत्र का रखरखाव और संचालन करना खर्चीला होता है, जिसके लिए वित्तीय संसाधनों की आवश्यकता पड़ती है।
शुल्क के दायरे और श्रेणियों की स्थिति
इस विषय पर विस्तार से बताते हुए उमर अब्दुल्ला ने साफ किया कि यह वित्तीय प्रभार हर नागरिक पर लागू नहीं होने जा रहा है। उन्होंने रेखांकित किया कि एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को यानी पीटूपी माध्यम से भेजी जाने वाली राशि पर किसी प्रकार का शुल्क नहीं वसूला जाएगा। इसके अतिरिक्त, सामान्य उपयोगकर्ताओं को भी तब तक कोई अतिरिक्त राशि नहीं चुकानी होगी जब तक उनका लेन-देन निर्धारित सीमा के भीतर रहता है।
बुनियादी ढांचे की लागत और कंपनियों की भूमिका
मुख्यमंत्री ने डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की भारी लागत का जिक्र करते हुए कहा कि जब नागरिकों को कोई सुविधा पूरी तरह निशुल्क मिलती है, तो कई बार उसकी वास्तविक लागत का अनुमान लगाना कठिन होता है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि इस प्रणाली के माध्यम से बड़ी कंपनियां पर्याप्त लाभ अर्जित करती हैं, इसलिए यदि उन पर कुछ शुल्क लगाया जाता है तो इसमें कोई अनुचित बात नहीं है। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि केंद्रीय प्रशासन को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि देश के आम उपभोक्ताओं की जेब पर इसका प्रतिकूल असर न पड़े।
नया नियम और एमडीआर का दायरा
गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने आगामी 15 अक्टूबर 2026 से दो हजार रुपये से अधिक के चुनिंदा मर्चेंट लेन-देन पर अधिकतम शून्य दशमलव चार फीसदी एमडीआर लागू करने का निर्णय लिया है। यह व्यवस्था सीधे तौर पर सामान्य उपभोक्ताओं पर नहीं डाली जाएगी और आम ग्राहकों के लिए व्यक्तिगत लेनदेन पहले की तरह पूरी तरह निःशुल्क बने रहेंगे।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और मंत्रालय का स्पष्टीकरण
इस नीतिगत निर्णय के सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में विपक्ष ने सरकार के खिलाफ आवाज उठाई है और इस कदम पर सवाल खड़े किए हैं। इन तमाम प्रतिक्रियाओं के बीच वित्त मंत्रालय ने स्थिति को पूरी तरह साफ करते हुए बयान दिया है कि देश में डिजिटल भुगतान से जुड़े सभी नीतिगत फैसले पूरी तरह स्वतंत्र रूप से लिए जाते हैं। मंत्रालय ने जोर देकर कहा कि एमडीआर लागू करने का यह निर्णय किसी भी बाहरी या विदेशी दबाव के प्रभाव में नहीं लिया गया है, बल्कि इसका मुख्य उद्देश्य इस विशाल डिजिटल भुगतान तंत्र को आर्थिक रूप से दीर्घकालिक और मजबूत बनाना है।


















