नई दिल्ली स्थित तिहाड़ जेल में निरुद्ध कश्मीरी अलगाववादी नेता यासीन मलिक ने अपनी पाकिस्तानी पत्नी मुशाल हुसैन मलिक से विवाह संबंध समाप्त करने का बड़ा निर्णय लिया है। जम्मू की एक विशेष टाडा/पोटा अदालत में प्रस्तुत 25 पृष्ठों के एक अत्यंत व्यक्तिगत हलफनामे में उन्होंने इस बात की औपचारिक घोषणा की। इस कानूनी दस्तावेज के माध्यम से मलिक ने अपनी वृद्धा माता, पत्नी मुशाल तथा 13 वर्षीया पुत्री रजिया सुल्ताना को अपना अंतिम संदेश प्रेषित किया है।
यह हलफनामा एक ऐसे समय में सामने आया है जब जम्मू में हत्या से संबंधित एक पुराने मामले की सुनवाई जारी थी। वर्षों से कानूनी बहसों और आरोपों के साये में चल रहे इस मामले में अचानक आए इस व्यक्तिगत संदेश ने सभी का ध्यान आकर्षित किया है।
आठ वर्षों का अलगाव और संपर्क पर पाबंदियां
अदालत के समक्ष दाखिल किए गए इस दस्तावेज में यासीन मलिक ने मुशाल के साथ अपने रिश्तों में आई दूरी का विवरण दिया है। उन्होंने स्पष्ट लिखा कि विगत आठ वर्षों से उन्होंने अपनी पत्नी की आवाज तक नहीं सुनी है। सलाखों के पीछे रहते हुए इस लंबी अवधि के दौरान उन्हें न तो फोन पर वार्ता की अनुमति प्रदान की गई और न ही किसी प्रकार के वीडियो कॉल के माध्यम से संपर्क साधने दिया गया।
कानूनी बंदिशों और भौतिक दूरी के कारण बने इस लंबे अलगाव का हवाला देते हुए उन्होंने अपने वैवाहिक जीवन को यहीं समाप्त करने का फैसला लिया है। उनका मानना है कि इन कठिन परिस्थितियों में रिश्ते को आगे खींचना दोनों में से किसी के लिए व्यावहारिक नहीं रह गया था।
विवाह समाप्त करने के पीछे का कारण
अपने इस निर्णय की वजह बताते हुए मलिक ने हलफनामे में भावुक बातें लिखीं। उन्होंने कहा कि वे नहीं चाहते कि मुशाल अपनी शेष जिंदगी इन कठोर परिस्थितियों के दबाव में या किसी विधवा की भांति व्यतीत करें। वे चाहते हैं कि उनकी पत्नी गरिमा, आत्मसम्मान और नई उम्मीदों के साथ अपने जीवन का एक नया अध्याय आरंभ करें।
फांसी की सजा अथवा कई और वर्षों तक कारागार में रहने की आशंका व्यक्त करते हुए मलिक ने कहा कि उन्होंने अपनी पत्नी को इस बंधन से मुक्त करने का यह अत्यंत पीड़ादायक फैसला लिया है। वे नहीं चाहते कि मुशाल उस अनिश्चितता और मानसिक तनाव में जीवन बिताएं जो अब उनका अपना भाग्य बन चुका है।
पुत्री रजिया सुल्ताना के लिए संदेश और उसकी प्रतिक्रिया
अपनी 13 साल की बेटी रजिया सुल्ताना के लिए यासीन मलिक ने हलफनामे में विशेष निर्देश छोड़े हैं। उन्होंने रजिया से आग्रह किया कि वह अपनी दादी के संपर्क में रहे और उन्हें प्रतिदिन कम से कम पांच मिनट के लिए फोन अवश्य करे, ताकि इस कठिन दौर में दादी को पोती का स्नेह और संबल मिलता रहे।
मलिक ने यह भी साफ किया कि यह हलफनामा अदालत या जनता से किसी प्रकार की दया अथवा सहानुभूति प्राप्त करने के उद्देश्य से तैयार नहीं किया गया था। उन्होंने इसे अपनी अंतरात्मा की अंतिम पुकार करार दिया। इस घोषणा के तुरंत पश्चात उनकी बेटी रजिया सुल्ताना का एक वीडियो बयान सामने आया, जिसमें उसने कहा कि यदि उसके पिता वास्तव में उसकी मां को तलाक देते हैं तो वह अपनी जीवन लीला समाप्त कर लेगी।
मामले की कानूनी पृष्ठभूमि और जेल में बिताया समय
इस पूरे प्रकरण ने एक जटिल कानूनी संघर्ष को मानवीय मोड़ दे दिया है, जो लंबे समय से केवल अदालती कार्यवाहियों और टेरर चार्ज की शब्दावली तक सीमित था। यासीन मलिक जम्मू-कश्मीर में वर्ष 2019 में दर्ज टेरर फंडिंग मामले के बाद से ही कस्टडी में हैं।
बाद में मई 2022 में संबंधित अदालत ने उन्हें विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके बाद से वे तिहाड़ जेल में अपनी सजा काट रहे हैं और अब इस हलफनामे के माध्यम से उन्होंने अपने पारिवारिक संबंधों पर यह अंतिम फैसला सार्वजनिक किया है।



















