झारखंड की स्पोर्ट्स सिटी में 30 एकड़ में फैला जेआरडी टाटा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स बना युवा खिलाड़ियों की नई उम्मीदशक्तिमान फिल्म के लिए मुकेश खन्ना ने ठुकराया करोड़ों रुपये का ऑफर, रणवीर सिंह की ऊर्जा की तुलना देव आनंद से कीमूलांक 8 राशिफल 28 अगस्त 2026: शनि देव की प्रेरणा और अंक 1 की ऊर्जा से खुलेंगे तरक्की के नए रास्तेइन्स्टाग्राम पर वाइब्रेटर के थ्रस्ट मोड की हुई आलोचना, महिलाओं ने आसान डिज़ाइन्स की माँग कीनैनीताल से कैंची धाम के बीच रोपवे निर्माण का प्रस्ताव तैयार, नीम करौली बाबा के श्रद्धालुओं को ट्रैफिक जाम से मिलेगी राहतअलवर के वार्ड 33 में खुद गलियां साफ करने वाले विपिन को स्थानीय लोगों ने पार्षद चुनाव में उताराराजधानी में महंगाई से राहत दिलाने आदर्श नगर स्टेशन पहुंची 800 टन प्याज, ₹35 किलो में बेचने की तैयारीखैरथल में फर्जी खाकी का खेल खत्म, साइबर केस के नाम पर वसूली करने वाले दो दबोचेजैक्सन होल में फेड अध्यक्ष के भाषण से पहले चांदी 69 डॉलर के नीचे खिसकीशिक्षा मंत्री मदन दिलावर के ढाई साल के कार्यकाल में कब और क्यों हुआ राजनीतिक घमासान, जानें पूरे मामले
जम्मू-कश्मीर में उमर सरकार के कैबिनेट विस्तार से पहले कांग्रेस का बड़ा फैसला, राज्य का दर्जा मिलने तक मंत्री पद लेने से इनकारजम्मू-कश्मीर
28 अग॰ 2026, 9:09 am (1 घंटे पहले)· 2

जम्मू-कश्मीर में उमर सरकार के कैबिनेट विस्तार से पहले कांग्रेस का बड़ा फैसला, राज्य का दर्जा मिलने तक मंत्री पद लेने से इनकार

जम्मू-कश्मीर कांग्रेस ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के नए मंत्रिमंडल विस्तार प्रस्ताव को ठुकरा दिया है। प्रदेश अध्यक्ष तारिक हमीद कर्रा ने साफ किया है कि पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल होने तक पार्टी सरकार में शामिल नहीं होगी।

जम्मू-कश्मीर में संभावित कैबिनेट विस्तार से पहले राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस पार्टी ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की अगुवाई वाली सरकार के मंत्रिमंडल में शामिल होने के नेशनल कॉन्फ्रेंस के नए प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। जम्मू-कश्मीर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष तारिक हमीद कर्रा ने स्पष्ट किया है कि पार्टी का यह रुख अपने सिद्धांतों पर टिका हुआ है और जब तक केंद्र शासित प्रदेश को पूर्ण राज्य का दर्जा वापस नहीं मिल जाता, तब तक कांग्रेस सरकार में कोई मंत्री पद स्वीकार नहीं करेगी। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि पार्टी बाहर से सरकार को अपना समर्थन जारी रखेगी ताकि धर्मनिरपेक्षता और क्षेत्रीय सद्भाव को बनाए रखा जा सके।

राज्य का दर्जा और संवैधानिक अधिकारों की मुख्य मांग

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष तारिक हमीद कर्रा ने पार्टी का रुख दोहराते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोगों के संवैधानिक अधिकारों को केंद्र सरकार ने असंवैधानिक और एकतरफा तरीके से छीन लिया था। कांग्रेस की सबसे प्रमुख मांग यह है कि जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा वापस दिया जाए। इसके साथ ही, स्थानीय निवासियों के जमीन, नौकरियों और प्राकृतिक संसाधनों पर संवैधानिक अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए। कर्रा ने कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस को समर्थन देने का उद्देश्य केवल राज्य में सांप्रदायिक एकता और सद्भाव को बचाना है। पिछले दो वर्षों से पार्टी का यह दृष्टिकोण बिल्कुल स्पष्ट रहा है कि जब तक राज्य का दर्जा बहाल नहीं होता, तब तक कैबिनेट का हिस्सा बनने का सवाल ही पैदा नहीं होता।

ये भी पढ़ें

केंद्र शासित प्रदेश में कैबिनेट का आकार और खाली पद

जम्मू-कश्मीर के केंद्र शासित प्रदेश होने के कारण यहां मंत्रिपरिषद के आकार को लेकर कानूनी सीमाएं तय हैं। नियमों के मुताबिक, मुख्यमंत्री सहित मंत्रियों की कुल मंजूर संख्या 9 हो सकती है। फिलहाल, उमर अब्दुल्ला मंत्रिमंडल में मुख्यमंत्री को मिलाकर केवल 6 मंत्री ही कार्यरत हैं। इसका मतलब है कि कैबिनेट में अभी भी 3 पद खाली हैं। सरकार गठन के शुरुआती दौर में भी कांग्रेस ने कैबिनेट में शामिल न होने का निर्णय लिया था। उस समय चर्चाएं थीं कि कांग्रेस को दी जाने वाली मंत्री पदों की संख्या को लेकर पार्टी में असंतोष था। इसके बाद से ही मंत्रिमंडल विस्तार की अटकलों के बीच कांग्रेस के रुख पर सभी की नजरें टिकी हुई थीं।

सहयोगी दलों के बीच पिछला तनाव और राज्यसभा चुनाव विवाद

नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस गठबंधन के रिश्तों में पिछले कुछ महीनों के दौरान खींचतान भी देखने को मिली है। खासकर पिछले साल अक्टूबर में हुए राज्यसभा चुनाव के दौरान दोनों पार्टियों के बीच मतभेद खुलकर सामने आए थे। केंद्र शासित प्रदेश की 4 राज्यसभा सीटों के लिए हुए चुनाव से पहले नेशनल कॉन्फ्रेंस ने अपने 3 उम्मीदवारों की घोषणा कर दी थी। इसके बाद चौथी सीट कांग्रेस के लिए छोड़ दी गई थी, जिसे जीतना गणितीय रूप से काफी कठिन माना जा रहा था। कांग्रेस का दावा था कि उसे एक सुरक्षित सीट देने का भरोसा दिया गया था, इसलिए उसने असंतोष जताते हुए चुनाव न लड़ने का फैसला किया। नतीजतन, नेशनल कॉन्फ्रेंस ने 3 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि चौथी सीट पर भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार सत शर्मा ने जीत हासिल की। इस घटनाक्रम के बाद गठबंधन में दरारें और गहरी हो गई थीं।

विधानसभा में दलीय स्थिति और बहुमत का समीकरण

जम्मू-कश्मीर की 90 सदस्यीय विधानसभा में सरकार बनाने और बहुमत साबित करने के लिए 46 सीटों की आवश्यकता होती है। चुनावी नतीजों और वर्तमान आंकड़ों के अनुसार, नेशनल कॉन्फ्रेंस के पास 41 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस के पास 6 विधायक हैं। इन दोनों सहयोगी दलों का संयुक्त आंकड़ा 47 बैठता है, जो बहुमत के आंकड़े से 1 अधिक है। इसके अलावा, नेशनल कॉन्फ्रेंस को कुछ निर्दलीय विधायकों और छोटे दलों का समर्थन भी हासिल है, जिससे सरकार की स्थिरता पर कोई संकट नहीं है। दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी के पास 29 सीटें हैं और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी के पास 4 सीटें हैं। कांग्रेस द्वारा कैबिनेट से बाहर रहने के फैसले के बावजूद सरकार को कोई खतरा नहीं है, क्योंकि 6 कांग्रेस विधायकों का समर्थन सरकार को पूर्ण बहुमत में बनाए रखता है।

सवाल-जवाब

कांग्रेस ने जम्मू-कश्मीर में मंत्रिमंडल में शामिल होने के प्रस्ताव को क्यों ठुकराया?
कांग्रेस का कहना है कि जब तक जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा वापस नहीं मिल जाता और नौकरियों व जमीन पर संवैधानिक अधिकार बहाल नहीं होते, तब तक वह कैबिनेट में शामिल नहीं होगी।
कांग्रेस के इस फैसले का ऐलान किसने किया?
जम्मू-कश्मीर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष तारिक हमीद कर्रा ने इस निर्णय की घोषणा की।
क्या कांग्रेस उमर अब्दुल्ला सरकार से समर्थन वापस ले रही है?
नहीं, कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि वह क्षेत्रीय सद्भाव और धर्मनिरपेक्षता की रक्षा के लिए सरकार को बाहर से समर्थन देना जारी रखेगी।
जम्मू-कश्मीर कैबिनेट में मंत्रियों की कुल कितनी सीमा तय है?
केंद्र शासित प्रदेश होने के कारण कानूनी सीमा के तहत मुख्यमंत्री सहित अधिकतम 9 मंत्री हो सकते हैं। वर्तमान में मुख्यमंत्री समेत 6 मंत्री कार्यरत हैं।
जम्मू-कश्मीर विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा क्या है और गठबंधन के पास कितने विधायक हैं?
90 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत के लिए 46 सीटों की जरूरत है। नेशनल कॉन्फ्रेंस के 41 और कांग्रेस के 6 विधायकों को मिलाकर कुल 47 सीटें हैं, जो बहुमत से अधिक हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·41 मिनट पहले

यह घटनाक्रम जम्मू-कश्मीर में कानूनी और राजनीतिक संतुलन की नई इबारत लिख रहा है। चूंकि केंद्र शासित प्रदेश में मंत्रिपरिषद की अधिकतम सीमा केवल नौ तय है और छह पद ही भरे हैं, कांग्रेस का बाहर रहकर समर्थन करना उमर अब्दुल्ला सरकार के लिए विधायी और प्रशासनिक स्थिरता का एक अनूठा समीकरण बनाता है। पूर्ण राज्य बहाली की मांग और अतीत के राज्यसभा चुनावों के मतभेदों के बीच, यह देखना दिलचस्प होगा कि बिना कैबिनेट हिस्सेदारी के यह गठबंधन नीतिगत मामलों में कितना लंबा तालमेल बिठा पाता है।

Rohan Verma@rohan-verma·41 मिनट पहले

उमर सरकार के लिए यह स्थिति दोधारी तलवार जैसी है। एक तरफ नौ मंत्रियों की संवैधानिक सीमा के कारण मंत्रिमंडल का सीमित आकार प्रशासनिक दक्षता को प्रभावित कर सकता है, वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस का बाहर से समर्थन सरकार को नीतिगत फैसलों में वैचारिक रूप से कमजोर कर सकता है। क्षेत्रीय दलों और राष्ट्रीय नेतृत्व के बीच पूर्ण राज्य के दर्जे की यह मांग आने वाले दिनों में केंद्र के साथ टकराव का मुख्य बिंदु बनेगी, जिससे इस गठबंधन के दीर्घकालिक स्थायित्व पर सीधा असर पड़ना तय है।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR