भारत में कृषि का स्वरूप अब काफी बदल रहा है और अन्नदाता धान या गेहूं जैसी पारंपरिक फसलों से आगे बढ़कर बागवानी की तरफ कदम बढ़ा रहे हैं। फल, सब्जियां, औषधीय पौधे और फूलों की खेती अब वित्तीय रूप से मजबूत होने का एक नया और बेहतर साधन बन चुकी है। इन सभी विकल्पों में गुलाब की खेती किसानों के लिए सबसे अधिक फायदेमंद साबित हो सकती है। धार्मिक अनुष्ठान हों, शादियों का सीजन हो, होटलों की सजावट का काम हो या फिर कॉस्मेटिक्स और इत्र बनाने वाले उद्योग हों, गुलाब की मांग पूरे बारह महीने बनी रहती है। यदि किसानों को आधुनिक तकनीक और सही बाजार मिल जाए, तो यह फसल उन्हें लंबे समय तक मालामाल कर सकती है।
लंबे समय तक मुनाफा देने वाली फसल
देवघर कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक सह प्रमुख डॉ. राजन ओझा ने एक बातचीत के दौरान स्पष्ट किया कि इस खेती की सबसे बड़ी खूबी इसकी लंबी अवधि है। खेत में कायदे से पौधों की रोपाई कर देने के बाद किसान कई वर्षों तक लगातार फूलों की पैदावार ले सकते हैं। वैज्ञानिक के मुताबिक ठीक से देखभाल करने पर गुलाब का पौधा लगभग बीस साल तक लगातार फूल देता रहता है। इसके अलावा किसानों की आमदनी का दायरा सिर्फ फूल बेचने तक ही सीमित नहीं रहता, बल्कि पौधे की कलम तैयार करके उसे बेचने से भी अलग से कमाई हो जाती है। इस तरह किसान एक ही फसल के जरिए कमाई के कई अलग-अलग रास्ते खोल सकते हैं।
खेती शुरू करने से पहले मिट्टी की जांच
किसी भी क्षेत्र में गुलाब की रोपाई करने से पहले सबसे जरूरी कदम मिट्टी की जांच करवाना माना जाता है। इससे खेत की जमीन में मौजूद पोषक तत्वों की स्थिति साफ हो जाती है और यह पता चलता है कि फसल लगाने से पहले भूमि में किस तरह के सुधार की जरूरत है। वैसे तो गुलाब की फसल विभिन्न प्रकार की जमीनों में उगाई जा सकती है, लेकिन दोमट मिट्टी को इसके लिए सबसे उत्तम माना गया है। दोमट मिट्टी मिलने से पौधों की जड़ें मजबूत होती हैं और उनका विकास बहुत तेजी से होता है। इसके अलावा अच्छी जमीन होने पर फूलों की गुणवत्ता में भी सुधार देखने को मिलता है। यदि खेत की मिट्टी में किसी प्रकार की सुधार की आवश्यकता महसूस हो, तो कृषि विशेषज्ञ की सलाह के आधार पर डोलोमाइट का इस्तेमाल किया जा सकता है। डॉ. राजन ओझा के अनुसार इस प्रक्रिया के तहत करीब डेढ़ क्विंटल डोलोमाइट का प्रयोग प्रति एकड़ की दर से किया जा सकता है।
कमाई के लिहाज से चुनिंदा किस्में
इस बागवानी में सही किस्म का चयन करना किसानों की सफलता और कमाई की गारंटी तय करता है। बाजार की जरूरतों और अपने उत्पादन के लक्ष्य को ध्यान में रखकर ही किस्मों का चुनाव करना समझदारी होती है। किसानों के पास सुपरस्टार, रक्तगंधा, हाइब्रिड टी गुलाब, फ्लोरिबुंडा गुलाब, बटन और मिनिएचर गुलाब जैसी कई बेहतरीन किस्में चुनने का विकल्प रहता है। हर किस्म के फूलों का आकार, उनका रंग और खुले बाजार में मिलने वाला मूल्य अलग-अलग होता है। इसलिए खेत में पौधों की रोपाई करने से पहले किसानों को अपने नजदीकी बाजार में फूलों की मांग का पूरा जायजा जरूर ले लेना चाहिए।
बरसात के मौसम में भी बेहतर पैदावार
मानसून या बरसात के दिनों में भी गुलाब की खेती से बेहतरीन पैदावार हासिल की जा सकती है, बशर्ते खेत के भीतर जल निकासी का सिस्टम एकदम दुरुस्त हो। हालांकि गुलाब के पौधों को पानी की जरूरत तो होती है, लेकिन खेत में लंबे समय तक जलभराव रहने से उनकी जड़ें सड़ सकती हैं। इसलिए ऐसे भूखंड का चुनाव करना चाहिए जहां बारिश का अतिरिक्त पानी तुरंत बाहर निकल सके। जानकारों के अनुसार गुलाब की खेती हमेशा खुले आसमान के नीचे करनी चाहिए क्योंकि पौधों को ठीक से विकसित होने और फूलों को खिलने के लिए भरपूर धूप के साथ-साथ खुली हवा की भी आवश्यकता होती है।
छोटे किसानों के लिए भी बेहतरीन विकल्प
अगर अन्नदाता पारंपरिक फसलों के साथ-साथ गुलाब जैसी बागवानी फसल को अपनाते हैं, तो उनकी आय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हो सकती है। संरक्षित खेती और आधुनिक तौर-तरीकों का उपयोग करने पर मुनाफा मिलने की संभावना और अधिक बढ़ जाती है। फूलों की बिक्री के साथ-साथ पौधों की कलम तैयार करके बेचने से अतिरिक्त आय का जरिया बन जाता है। ऐसे में कम जमीन वाले किसानों के लिए भी यह खेती एक बहुत अच्छा विकल्प साबित हो सकती है, बशर्ते वे काम शुरू करने से पहले मिट्टी की टेस्टिंग करवा लें, सही वेरायटी चुन लें और कृषि विशेषज्ञों से समय पर उचित सलाह ले लें।



















