पश्चिमी राजस्थान में मौसम के लगातार बदलते मिजाज और अनियमित वर्षा के कारण अन्नदाताओं के सामने गंभीर संकट खड़ा हो गया है। मानसून का सीजन बीतने के बावजूद तमाम इलाकों में पर्याप्त पानी न मिलने से खेती का काम बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इस स्थिति में किसानों की निगाहें लगातार बादलों और आसमान पर टिकी रहती हैं। ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन के इस दौर में सूखे जैसे हालात कृषि व्यवस्था के लिए बड़ी बाधा बन चुके हैं। इन्हीं तमाम मुश्किलों को ध्यान में रखते हुए कृषि विश्वविद्यालय की कुलगुरु डॉ. वी.एस. जैतावत ने जानकारी दी है कि मौसम के हिसाब से खेती को ढालने और किसानों को उन्नत विकल्प देने की दिशा में तेजी से प्रयास जारी हैं।
सूखे को मात देने वाली किस्मों पर जोर
कृषि अनुसंधान के मोर्चे पर काम कर रहे विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक मुख्य रूप से ऐसी फसलों की पैदावार बढ़ाने में जुटे हैं जो सूखे की मार आसानी से झेल सकें। उन बीजों और पौधों को प्राथमिकता दी जा रही है जो कम दिनों में पककर तैयार हो जाएं और जिनकी सिंचाई के लिए बहुत ज्यादा पानी की जरूरत न पड़े। संस्थान ने इलाके की विभिन्न पारंपरिक फसलों पर गहन रिसर्च के बाद कई ऐसे उपयोगी विकल्प तैयार किए हैं जो पश्चिमी रेगिस्तानी क्षेत्र के शुष्क मौसम और कम वर्षा वाले इलाकों में बेहद मददगार साबित हो सकते हैं।
देर से बारिश होने पर भी नहीं होगी परेशानी
विशेषज्ञों के अनुसार यदि सितंबर महीने के आखिरी दिनों में भी झमाझम बारिश हो जाती है, तब भी बुवाई के लिए किसानों के पास पर्याप्त विकल्प बचे रहेंगे। विश्वविद्यालय के पास तिल, मूंग, ग्वार और बाजरा की ऐसी उन्नत वैराइटी मौजूद हैं जो बेहद कम समय में फसल तैयार कर देती हैं। इन सभी किस्मों को इस तरह से तैयार किया गया है कि इन्हें उगने और पकने के लिए न्यूनतम पानी की आवश्यकता पड़े, जिससे सूखे की स्थिति में भी पैदावार सुरक्षित रह सके।
खेती किसानी को मिलेगी एक नई दिशा
इस इलाके की भौगोलिक बनावट और तेजी से बदलते वेदर पैटर्न को मद्देनजर रखते हुए कृषि अनुसंधान को लगातार नई दिशा दी जा रही है। आने वाले दिनों में पानी की कम खपत वाली, जल्दी तैयार होने वाली और सूखे को सहन करने की क्षमता रखने वाली फसलें यहां के कृषियों के लिए वरदान साबित होंगी। विश्वविद्यालय की यह कोशिश है कि प्रयोगशालाओं में होने वाले वैज्ञानिक प्रयोग सीधे किसानों के खेतों तक पहुंच सकें ताकि वे मौसम की अनिश्चितता से बचकर अपनी आय सुरक्षित रख सकें।





















