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धान की खेती में पानी का सही प्रबंधन, इस तरीके से मजबूत होंगी फसल की जड़ेंछत्तीसगढ़
1 सित॰ 2026, 11:08 am (1 घंटे पहले)· 1

धान की खेती में पानी का सही प्रबंधन, इस तरीके से मजबूत होंगी फसल की जड़ें

छत्तीसगढ़ में कृषि विशेषज्ञों ने धान के खेतों में लगातार पानी भरकर रखने के बजाय बीच-बीच में खेत को सुखाने की सलाह दी है। इससे मिट्टी में ऑक्सीजन का संचार बढ़ता है और जड़ें मजबूत होती हैं।

छत्तीसगढ़ राज्य को पारंपरिक रूप से धान का कटोरा माना जाता है, जहां के किसान बड़े पैमाने पर धान की खेती करते हैं। हालांकि, हाल ही में कृषि विशेषज्ञों ने खेतों में लगातार पानी भरा रहने की प्रथा को लेकर किसानों को आगाह किया है। जानकारों का कहना है कि खेत में हर समय पानी का जमा रहना मिट्टी के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। इससे जमीन के भीतर ऑक्सीजन की मात्रा घट जाती है, जिसका सीधा असर फसल के कुल उत्पादन और सेहत पर पड़ता है। कृषि विशेषज्ञ संजय यादव ने इस संबंध में स्पष्ट किया है कि धान के पौधों को नमी और पानी की आवश्यकता जरूर होती है, लेकिन इसका यह अर्थ नहीं है कि खेत को हमेशा तालाब बनाकर रखा जाए। उनके अनुसार, बेहतर पैदावार के लिए यह जरूरी है कि बीच-बीच में खेत से पानी की निकासी हो और जल स्तर कम किया जाए।

मिट्टी में ऑक्सीजन का प्रवाह है जरूरी

जब खेत में कुछ समय के लिए पानी नहीं रहता है, तो मिट्टी की ऊपरी परत सूखती है और उसमें ऑक्सीजन का प्रवाह बेहतर होता है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो मिट्टी के अंदर कई ऐसे सूक्ष्म जीव और बैक्टीरिया मौजूद होते हैं जो फसलों के लिए बेहद फायदेमंद माने जाते हैं। इन लाभदायक जीवों को जीवित रहने और सक्रिय रहने के लिए ऑक्सीजन की सख्त जरूरत होती है। जब खेत में निरंतर पानी भरा रहता है, तो ये सूक्ष्म जीव दम तोड़ने लगते हैं, जिससे मिट्टी की उर्वरता प्रभावित होती है।

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जड़ों के विकास और कल्ले फूटने में मदद

धान के पौधों की जड़ें जितनी मजबूत होंगी, फसल उतनी ही उन्नत होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि जड़ों के समुचित विकास के लिए भी खेत में लगातार जलभराव से बचना चाहिए। एक बार खेत में पानी रोकने के बाद उसे कुछ दिनों तक सूखने देना चाहिए, जिससे पौधों की जड़ें गहराई तक फैलती हैं और मजबूती हासिल करती हैं। इसके अलावा, खेत में नमी और सूखे का यह संतुलन धान के पौधों में अधिक कल्ले निकलने में भी मददगार साबित होता है। इससे पूरा पौधा स्वस्थ और हरा-भरा रहता है।

सिंचाई का सही चक्र और किसानों के लिए सलाह

विशेषज्ञों की ओर से किसानों को यह व्यावहारिक सलाह दी गई है कि खेत से पानी हटाने के बाद कम से कम दो से पांच दिन तक वहां लगातार पानी जमा न होने दें। हालांकि, पानी और सूखे के बीच का यह अंतराल हर जगह एक समान नहीं हो सकता है, क्योंकि यह पूरी तरह से मिट्टी के प्रकार, स्थानीय मौसम और फसल की मौजूदा अवस्था पर निर्भर करता है। इस अवधि के बाद आवश्यकतानुसार दोबारा सिंचाई की जा सकती है। इस वैज्ञानिक तरीके को अपनाने से मिट्टी के भीतर हवा का आवागमन सुचारू बना रहता है और पौधों की जड़ें स्वस्थ रूप से विकसित होती हैं।

सवाल-जवाब

धान के खेत में लगातार पानी क्यों नहीं भरना चाहिए?
लगातार पानी भरे रहने से मिट्टी में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है और फसल के उत्पादन पर बुरा असर पड़ता है।
खेत को बीच में सुखाने से क्या फायदा होता है?
खेत सूखने से मिट्टी में ऑक्सीजन का प्रवाह बढ़ता है और लाभदायक सूक्ष्म जीवों को पनपने में मदद मिलती है।
जड़ों के विकास के लिए कौन सा तरीका सही है?
पानी रोकने के बाद कुछ दिनों के लिए खेत को सूखने देना जड़ों के विकास में मदद करता है।
पानी हटाने के बाद खेत को कितने दिन सूखा रखना चाहिए?
किसानों को सलाह दी जाती है कि पानी रोकने के बाद 2 से 5 दिन तक लगातार पानी जमा न होने दें।
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टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·50 मिनट पहले

यह खबर कृषि प्रबंधन से जुड़ी है, जो सीधे तौर पर ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों की आजीविका को प्रभावित करती है। जलभराव जैसे तकनीकी मामलों में यदि वैज्ञानिक सलाह की अनदेखी की जाए, तो उत्पादन घटने से आर्थिक संकट और खाद्य सुरक्षा से जुड़ी स्थितियां पैदा हो सकती हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में इस प्रकार के तकनीकी बदलावों का सही क्रियान्वयन कृषि आधारित विवादों और फसल नुक़सान के दावों को रोकने में भी मददगार साबित होता है।

Rohan Verma@rohan-verma·50 मिनट पहले

छत्तीसगढ़ जैसे कृषि-प्रधान राज्यों में जहाँ धान को मुख्य आजीविका माना जाता है, जल प्रबंधन की पारंपरिक विधियों में यह वैज्ञानिक बदलाव ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ मजबूत कर सकता है। लगातार जलभराव से न केवल मिट्टी की उर्वरता घटती है, बल्कि किसानों की लागत भी बढ़ती है। यदि कृषि विभागों द्वारा इस तकनीक को जमीनी स्तर पर सही ढंग से प्रसारित किया जाए, तो फसल नुकसान के जोखिम को कम करते हुए किसानों की आय में सकारात्मक सुधार देखा जा सकता है, जो आने वाले समय में ग्रामीण समृद्धि के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा।

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