बोकारो की रहने वाली आभा भारती उन महिलाओं के लिए एक मिसाल पेश कर रही हैं जो इस पारंपरिक सोच को तोड़ती हैं कि गाड़ी चलाना केवल पुरुषों का कार्य है। पिछले पंद्रह वर्षों से वह लगातार महिलाओं को कार ड्राइविंग का हुनर सिखा रही हैं। उनके इस सफर की शुरुआत महज एक वाहन से हुई थी, जो आज बढ़कर तीन गाड़ियों और दो महिला प्रशिक्षकों तक पहुंच गया है। इस दौरान उनके ट्रेनिंग सेंटर से तीन हजार से अधिक महिलाएं कार चलाना सीख चुकी हैं और अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में आत्मनिर्भर बन रही हैं.
एक खास बातचीत के दौरान महिला मोटर ट्रेनिंग सेंटर की संचालिका आभा भारती ने साझा किया कि उन्होंने वर्ष 2011 में एक सिंगल कार के साथ अपने इस काम का श्रीगणेश किया था। शुरुआती दौर में राह बिल्कुल आसान नहीं थी, लेकिन समय के साथ महिलाओं का उन पर विश्वास गहराता गया। आज उनके पास तीन गाड़ियां हैं और उनके साथ दो महिला ट्रेनर भी काम कर रही हैं, जिनकी मदद से बोकारो के विभिन्न इलाकों में महिलाओं को ड्राइविंग का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाता है.
पति के निधन के बाद बढ़ी जिम्मेदारियां और आया विचार
आभा भारती का यह सफर कई तरह की चुनौतियों और संघर्षों से होकर गुजरा है। वर्ष 2003 में उनके पति का निधन हो गया था, जिसके बाद परिवार की संपूर्ण जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई। उस समय उन्हें फार्मास्यूटिकल से जुड़े कार्यों के लिए अक्सर वाहन की आवश्यकता महसूस होती थी। चूंकि उन्हें खुद कार चलाना नहीं आता था, इसलिए उन्हें आवाजाही में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। इसी निजी अनुभव ने उनके भीतर यह विचार जगाया कि यदि महिलाओं को व्यवस्थित रूप से कार चलाना सिखाया जाए, तो वे अपनी आवाजाही और जरूरतों के लिए किसी पर भी निर्भर नहीं रहेंगी। इसी दृढ़ सोच के साथ उन्होंने महिलाओं को ड्राइविंग सिखाने का बीड़ा उठाया और आज वह हजारों महिलाओं को यह कौशल सिखा चुकी हैं.
चौदह दिन का विशेष प्रशिक्षण और शुल्क
आभा भारती के मोटर ट्रेनिंग सेंटर में महिलाओं के लिए चौदह दिनों का विशेष ट्रेनिंग प्रोग्राम चलाया जाता है। इस प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं को कार के बुनियादी संचालन से लेकर व्यस्त सड़कों पर सुरक्षित तरीके से वाहन चलाने के सभी गुर सिखाए जाते हैं। महिला प्रशिक्षकों की देखरेख में सड़कों पर प्रैक्टिकल ड्राइविंग कराई जाती है, ताकि उनका डर पूरी तरह खत्म हो सके। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद महिलाओं को प्रमाण पत्र भी प्रदान किया जाता है। इस पूरे चौदह दिन के कोर्स के लिए फीस 4,500 रुपये निर्धारित की गई है.
आभा भारती का आगामी लक्ष्य बोकारो की अधिक से अधिक महिलाओं को अपने पैरों पर खड़ा करना और उन्हें स्वावलंबी बनाना है। वह चाहती हैं कि महिलाएं अपने छोटे-बड़े कामों के लिए किसी दूसरे का मुंह न ताकें और खुद गाड़ी चलाकर अपनी मंजिल तक आसानी से पहुंच सकें। उनके सेंटर में प्रशिक्षण ले रही एक महिला राजूल शैली ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि यहां ट्रेनर ड्राइविंग की छोटी-बड़ी बारीकियों को बहुत ही सरल तरीके से समझाती हैं। शुरुआती दिनों में मुख्य सड़क पर कार चलाने को लेकर मन में भय रहता है, लेकिन लगातार अभ्यास से वह डर धीरे-धीरे आत्मविश्वास में बदल जाता है.



















