मानसून की विदाई के बाद प्रकृति ने एक बार फिर अपनी अद्भुत छटा बिखेर दी है, जिसके चलते झारखंड का जंगली और पहाड़ी इलाका इन दिनों बेहद खूबसूरत नजर आ रहा है। पलामू टाइगर रिजर्व के अंतर्गत आने वाले कई स्थल सैलानियों का स्वागत कर रहे हैं, जिनमें पलामू और लातेहार जिले की सीमा पर बसा प्रसिद्ध केचकी संगम अपनी पूरी रौनक के साथ फिर से खिल उठा है। इस इलाके का प्राकृतिक सौंदर्य इन दिनों देखने लायक है और यहाँ पहुँचने वाले लोग इसके मोहक दृश्यों में खो जाते हैं।
कोयल और औरंगा नदियों का अद्भुत मिलन
विशेष रूप से देखा जाए तो केचकी संगम असल में कोयल और औरंगा नदियों का संगम स्थल है। इसके चारों तरफ फैली हुई हरी-भरी वादियाँ, पहाड़ियों की तलहटी और यहाँ का शांत वातावरण दूर-दूर से आने वाले पर्यटकों को अपनी ओर खींच रहा है। बारिश का मौसम बीत जाने के बाद इस संगम क्षेत्र का प्राकृतिक परिदृश्य ऐसा रूप ले चुका है मानो प्रकृति ने खुद अपने हाथों से इसे नए रंगों और सुंदर स्वरूप से सजा दिया हो।
आकर्षण का मुख्य केंद्र बन रहा मनमोहक नजारा
वर्षा ऋतु समाप्त होने के पश्चात अब इन नदियों का जलस्तर सामान्य होने लगा है, जिसके कारण संगम का दृश्य अत्यंत मनमोहक और आकर्षक प्रतीत हो रहा है। लहराती हुई नदियां, हरियाली की चादर ओढ़े पहाड़ियां और ऊपर साफ नीला आसमान यहाँ आने वाले मुसाफिरों को एक बिल्कुल अलग और सुखद अनुभव प्रदान कर रहा है। पर्यटक यहाँ घंटों नदी के तट पर बैठकर शांत माहौल में प्राकृतिक नजारों का लुत्फ उठाते नजर आते हैं। यही मुख्य वजह है कि ठंड का मौसम पूरी तरह शुरू होने से पहले ही केचकी संगम में सैलानियों की आवाजाही ने तेजी पकड़ ली है।
परिवार और दोस्तों के साथ पहुँच रहे सैलानी
यह पर्यटन स्थल अब केवल स्थानीय निवासियों तक ही सीमित नहीं रह गया है, बल्कि आसपास के तमाम जिलों से आने वाले पर्यटकों के लिए भी एक बेहतरीन और पसंदीदा जगह बनता जा रहा है। लोग अपने परिवार के सदस्यों और मित्रों के साथ यहाँ पहुँचकर पिकनिक का आनंद ले रहे हैं, सुंदर पलों को कैद करने के लिए फोटोग्राफी कर रहे हैं और प्रकृति की गोद में शांति के कुछ पल बिता रहे हैं। आने वाले ठंड के महीनों में इस खूबसूरत स्थान पर पर्यटकों की संख्या में और अधिक भारी बढ़ोतरी होने की पूरी संभावना जताई जा रही है।
पुरानी यादों और अनुभवों से जुड़ा है पर्यटकों का नाता
गढ़वा के रंका इलाके से यात्रा करके पहुँचे वीरेंद्र प्रसाद गुप्ता ने इस जगह के बारे में साझा करते हुए बताया कि उन्हें केचकी संगम के विषय में अपने दोस्तों के माध्यम से जानकारी प्राप्त हुई थी। यहाँ आने के बाद उन्हें यह स्थल वाकई बेहद खूबसूरत और मन को भाने वाला लगा। उन्होंने यह भी कहा कि सर्दियों के मौसम में इस जगह पर घूमने का अपना एक अलग ही आनंद होता है। वहीं दूसरी ओर, चंद्रकांत नाम के एक अन्य पर्यटक ने बताया कि वह अपने बचपन के दिनों में पहली बार अपने माता-पिता के साथ यहाँ घूमने आए थे। लंबे अंतराल के बाद जब वह वर्षों बाद दोबारा इस स्थान पर पहुँचे, तो उन्होंने पाया कि यह जगह पहले की तुलना में काफी ज्यादा विकसित और आकर्षक हो चुकी है। बैठने और विश्राम करने की सुविधाओं में भी काफी सकारात्मक बदलाव देखने को मिले हैं और वह साल भर में दो से तीन बार इस जगह पर जरूर आते हैं।
सुरक्षा और स्वच्छता के लिए पुख्ता इंतजाम
पर्यटकों की सुरक्षा और सुविधा को पूरी तरह ध्यान में रखते हुए वन विभाग की तरफ से विशेष रूप से गार्ड्स की तैनाती की गई है। इसके अलावा, इको विकास समिति के माध्यम से पूरे क्षेत्र की साफ-सफाई की कड़ी देखरेख की जा रही है। इस संगम क्षेत्र को पूरी तरह स्वच्छ और सुंदर बनाए रखने के लिए समय-समय पर विशेष जागरूकता अभियान और सफाई अभियान भी चलाए जा रहे हैं। सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक पुख्ता करने के लिहाज से परिसर में सीसीटीवी कैमरे भी लगाए गए हैं, ताकि हर गतिविधि पर नजर रखी जा सके। वन कर्मियों की मौजूदगी के साथ-साथ यहाँ यात्रियों के ठहरने के लिए भी उचित सुविधा उपलब्ध कराई गई है।
मेदिनीनगर से करीब बीस किलोमीटर की दूरी
यह खूबसूरत पर्यटन स्थल मेदिनीनगर से लगभग बीस किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, जहाँ सड़क मार्ग के जरिए बहुत ही आसानी से पहुँचा जा सकता है। पर्यटक चाहें तो अपने निजी वाहनों से आ सकते हैं या फिर ऑटो के माध्यम से भी इस स्थान तक पहुँच सकते हैं। यात्रा के लिए नजदीकी रेलवे स्टेशन केचकी और मेदिनीनगर हैं, जबकि हवाई मार्ग से आने वाले यात्रियों के लिए रांची एयरपोर्ट सबसे प्रमुख विकल्प साबित होता है। बारिश के बाद बदले हुए इस शानदार प्राकृतिक स्वरूप के चलते आने वाले दिनों में यहाँ देश-विदेश और आसपास से आने वाले पर्यटकों की संख्या में भारी उछाल आने की पूरी उम्मीद है।


















