शिलांग में मेघालय सरकार के कर्मचारियों ने राज्य प्रशासन के सामने अपनी वेतन वृद्धि की मांग जोरदार तरीके से रखी है। कर्मचारियों का कहना है कि केंद्र सरकार जहां आगे के वेतन आयोगों की तरफ बढ़ रही है, वहीं राज्य में अभी भी पुरानी व्यवस्था यानी पांचवें वेतन आयोग की सिफारिशों का ही पालन किया जा रहा है। इसी वेतन विसंगति को दूर करने के लिए कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री के सामने औपचारिक रूप से अपनी बात रखी है।
मुख्यमंत्री से मुलाकात और ज्ञापन
मेघालय स्टेट गवर्नमेंट एम्पलाइज फेडरेशन के एक प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को शिलांग में मुख्यमंत्री कॉनराड के संगमा से मुलाकात की। इस दौरान संगठन के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा, जिसमें राज्य के सभी सरकारी कर्मचारियों के लिए संशोधित वेतनमान को तत्काल प्रभाव से नवीनीकृत और लागू करने का आग्रह किया गया। बैठक में कर्मचारियों ने राज्य और केंद्र के वेतन ढांचे के बीच पैदा हुए भारी अंतर को समाप्त करने की वकालत की।
फेडरेशन की महासचिव बानशारी खारशांडी ने मुख्यमंत्री के साथ हुई इस उच्चस्तरीय बैठक के बाद बताया कि कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए यह ज्ञापन सौंपा गया है। उन्होंने कहा कि देश की केंद्रीय सरकार अपने कर्मचारियों के वेतनमान में लगातार और समयबद्ध संशोधन करती आ रही है, लेकिन इसके मुकाबले मेघालय इस मामले में काफी पीछे छूट गया है। संगठन ने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया है कि वे इस पूरे मामले की व्यक्तिगत रूप से समीक्षा करें और राज्य के कर्मचारियों को उनका हक दिलाएं।
वेतन संशोधन चक्र में देरी और वित्तीय नुकसान
बानशारी खारशांडी ने इस बात पर जोर दिया कि मेघालय के कर्मचारियों को पिछले कई वर्षों से वेतन संशोधन का लाभ नहीं मिला है, जिसके कारण उन्हें बड़े पैमाने पर आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य के कर्मचारियों का आखिरी वेतन संशोधन साल 2017 में लागू किया गया था, लेकिन वे साल 2006 और 2016 के तय संशोधन चक्रों का लाभ पाने से पूरी तरह वंचित रह गए।
उन्होंने तुलना करते हुए बताया कि जहां केंद्र सरकार हर 10 साल के अंतराल पर नियमित रूप से अपने कर्मचारियों के वेतन में संशोधन करती है, वहीं मेघालय के कर्मचारियों को दो पूरे वेतन-संशोधन चक्रों के छूट जाने की वजह से भारी वित्तीय क्षति उठानी पड़ी है। कर्मचारियों का यह भी कहना है कि पूर्वोत्तर क्षेत्र के कई अन्य पड़ोसी राज्य पहले ही सातवें वेतन आयोग को अपना चुके हैं और अब आठवें वेतन आयोग की तरफ अग्रसर हैं, जबकि मेघालय अभी भी पांचवें वेतन आयोग की पुरानी व्यवस्था पर ही टिका हुआ है।
मुख्यमंत्री का आश्वासन और आगे की उम्मीद
कर्मचारियों की इस लंबी सूची और मांगों को सुनने के बाद मुख्यमंत्री कॉनराड के संगमा ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया है कि सरकार उनकी इन मांगों का गंभीरता से परीक्षण करेगी। फेडरेशन की तरफ से यह उम्मीद जताई गई है कि अब राज्य सरकार इस गंभीर विषय को पूरी संवेदनशीलता से लेगी और कर्मचारियों के इस प्रस्ताव पर सकारात्मक रूप से विचार करते हुए जल्द ही कोई ठोस निर्णय लेगी।



















