झारखंड के कोडरमा जिले में स्थित झुमरी तिलैया के रहने वाले अर्जुन महतो ने अपने जीवन की गाड़ी को नई दिशा देने के लिए एक बड़ा कदम उठाया। लंबे समय से सब्जी की दुकान लगाकर परिवार का पेट पाल रहे अर्जुन के लिए घर की बुनियादी जरूरतें पूरी करना भी एक बड़ा संघर्ष बन चुका था। इस तंगहाली से बाहर निकालने का रास्ता उनके बेटे दिलीप कुमार की एक सलाह से निकला, जिसने पूरे परिवार की आर्थिक स्थिति को पूरी तरह बदल कर रख दिया।
धनबाद में काम करने का अनुभव आया काम
दिलीप कुमार पहले धनबाद शहर की एक बेकरी फैक्ट्री में नौकरी करते थे। वहां लंबे समय तक काम करते हुए उन्होंने बेकरी से जुड़े विभिन्न उत्पाद तैयार करने का हुनर सीखा। सिर्फ उत्पाद बनाना ही नहीं, बल्कि उन्होंने बेकरी के पूरे व्यावसायिक ढांचे, उत्पादन प्रक्रिया और बाजार की मांग को भी करीब से समझा। इस अनुभव के बूते दिलीप ने अपने पिता और पूरे परिवार को खुद की बेकरी इकाई स्थापित करने का सुझाव दिया, जिसे पूरे परिवार ने स्वीकार कर लिया।
बैंक कर्ज से आधुनिक मशीनें लगाकर शुरू किया काम
नया कारोबार शुरू करने के लिए पूंजी की दरकार थी, जिसे पूरा करने के लिए परिवार ने बैंक से संपर्क साधा और व्यावसायिक ऋण हासिल किया। इस कर्ज की मदद से उन्होंने बेकरी संचालन के लिए जरूरी आधुनिक उपकरण खरीदे। उनकी बेकरी में इस समय एक बड़ा फर्नेश, मिक्सर मशीन, ब्रेड कटर मशीन के साथ ही कई अन्य छोटे और बड़े उपकरण स्थापित किए गए हैं। इन आधुनिक संयंत्रों की बदौलत उत्पादन में तेजी आई है और गुणवत्ता भी बनी रहती है।
उत्पादों की विविधता और स्थानीय बाजारों में आपूर्ति
इस नई बेकरी इकाई में रोजाना कई तरह के ताजे उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। इनमें ब्रेड, टोस्ट, पापड़ी और कुकीज के साथ-साथ चाय कुकीज और नमकीन कुकीज की विस्तृत श्रृंखला शामिल है। तैयार माल को केवल नजदीकी बाजारों में ही नहीं बेचा जा रहा, बल्कि कोडरमा जिले के सुदूर ग्रामीण इलाकों तक भी नियमित रूप से पहुंचाया जा रहा है। गांव-देहात के खुदरा दुकानदारों के बीच इन बेकरी उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है।
परिवार के साझे श्रम से बढ़ी बचत और मुनाफा
कारोबार को किफायती बनाए रखने के लिए अर्जुन महतो ने बाहर से कोई भी मजदूर या कर्मचारी नहीं रखा है। आटा गूंथने, भट्ठी में पकाने, कटिंग, पैकेजिंग और आपूर्ति से जुड़ा हर काम परिवार के लोग आपस में बांटकर पूरा करते हैं। बाहरी श्रम पर होने वाले खर्च की बचत सीधे तौर पर मुनाफे में जुड़ जाती है। अर्जुन महतो के अनुसार, बेकरी से रोजाना लगभग 5 से 6 हजार रुपये का कारोबार हो रहा है। सारे खर्चे निकालने के बाद परिवार को हर महीने 40 से 50 हजार रुपये की शुद्ध आमदनी मिल रही है, जिससे उनके जीवन स्तर में पहले की तुलना में भारी सुधार आया है।



















