झारखंड के कोयलांचल क्षेत्र धनबाद में दो दशक से अधिक पुराने चर्चित गोलीबारी कांड में न्यायपालिका ने अहम फैसला सुना दिया है। गैंगस्टर फहीम खान के घर को निशाना बनाकर किए गए भीषण हमले के लगभग 22 साल बाद अदालत ने तीन मुख्य आरोपियों को दोषी ठहराया है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश तृतीय पारस कुमार सिन्हा की अदालत ने मामले की अंतिम सुनवाई पूरी करते हुए शाहिद आलम, शहादत हुसैन और कथित शूटर तनवीर आलम के खिलाफ दोष साबित पाया है। अदालत ने इस ऐतिहासिक फैसले के साथ ही दोषियों की सजा की अवधि तय करने के लिए 3 अक्टूबर की तारीख मुकर्रर की है।
साल 2004 में एके-47 से दहला था वासेपुर का इलाका
यह खूनी वारदात 29 जनवरी 2004 की तारीख को अंजाम दी गई थी, जिसने पूरे क्षेत्र में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे। उस दिन हमलावरों ने अत्याधुनिक हथियार एके-47 से फहीम खान के आवास पर अचानक अंधाधुंध गोलियां बरसानी शुरू कर दी थीं। चारों तरफ से हुई ताबड़तोड़ फायरिंग से इलाका थर्रा उठा था। हमला इतना सुनियोजित और घातक था कि अंदर मौजूद लोगों को संभलने का जरा भी मौका नहीं मिला। इस अचानक हुए जानलेवा हमले से अपनी जान बचाने के लिए फहीम खान को पास की एक पड़ोसी की छत पर छलांग लगानी पड़ी थी, जिससे वह बाल-बाल बच सके।
गोली लगने से सुरक्षाकर्मी विनोद शर्मा की हुई थी मौत
हमलावरों की ओर से की गई अंधाधुंध गोलीबारी के बीच फहीम खान के सुरक्षाकर्मी विनोद शर्मा गोलियों का शिकार बन गए। गंभीर रूप से घायल होने के कारण विनोद शर्मा ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। विनोद शर्मा मूल रूप से बिहार के अरवल जिले के निवासी थे और उस वक्त सुरक्षा की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। इस भीषण गोलीकांड के दौरान एक आरोपी शाहिद आलम के पैर में भी गोली लगी थी। स्वचालित हथियारों के इस खुलेआम इस्तेमाल ने उस दौर में धनबाद के अपराध जगत और प्रशासनिक हलकों में भारी सनसनी फैला दी थी।
लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद तीन अभियुक्त दोषी करार
हमले के बाद पुलिस ने इस मामले में साबिर आलम के भाई शाहिद आलम, वासेपुर के स्थानीय निवासी शहादत हुसैन और बिहार की राजधानी पटना के रहने वाले कथित शूटर तनवीर आलम के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कानूनी कार्यवाही शुरू की थी। वर्षों तक चली गवाही, साक्ष्यों की जांच और लंबी न्यायिक बहस के बाद पारस कुमार सिन्हा की अदालत ने तीनों नामजद आरोपियों को दोषी करार दिया। लगभग 22 वर्षों तक चले इस लंबे ट्रायल के बाद आए इस न्यायिक फैसले ने यह साफ कर दिया है कि संगीन वारदातों में कानूनी जवाबदेही से बचना संभव नहीं है।
सजा के बिंदुओं पर 3 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई
अदालत की ओर से दोषसिद्धि का निर्णय आने के बाद अब सभी की निगाहें सजा के निर्धारण पर टिकी हुई हैं। अदालत ने स्पष्ट किया है कि 3 अक्टूबर को सजा के बिंदुओं पर दोनों पक्षों की दलीलें सुनी जाएंगी और उसी दिन सजा का ऐलान किया जाएगा। हत्या और जानलेवा हमले के इस पुराने मामले में दोषियों को क्या सजा दी जाती है, इसका अंतिम फैसला इसी आगामी तारीख को सार्वजनिक होगा।



















