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खूंटी में लेमन ग्रास की खेती से किसानों की बल्ले-बल्ले, खेत पर ही तैयार होता है एसेंशियल ऑयलझारखंड
31 अग॰ 2026, 4:29 pm (51 मिनट पहले)· 2

खूंटी में लेमन ग्रास की खेती से किसानों की बल्ले-बल्ले, खेत पर ही तैयार होता है एसेंशियल ऑयल

झारखंड के खूंटी जिले के गुनी गांव में 120 एकड़ जमीन पर लेमन ग्रास की खेती हो रही है, जहां किसान खेत पर ही आधुनिक प्लांट की मदद से इसका सुगंधित तेल तैयार कर रहे हैं।

झारखंड के खूंटी जिले के गुनी क्षेत्र में खेती का एक नया और लाभदायक तरीका इन दिनों चर्चा में बना हुआ है। यहां के स्थानीय किसान बड़े पैमाने पर लेमन ग्रास की फसल उगा रहे हैं और इस सुगंधित पौधे से एसेंशियल ऑयल निकाल रहे हैं। इस अनोखी पहल के तहत किसानों ने खेती के साथ-साथ प्रसंस्करण का काम भी सीधे अपने खेतों पर ही शुरू कर दिया है, जिससे उन्हें अपनी फसल का बेहतर मुनाफा मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। गुनी इलाके में कुल 120 एकड़ के विशाल क्षेत्र में लेमन ग्रास की यह खेती की जा रही है, जो आसपास के किसानों के लिए भी एक बड़ा उदाहरण बनती जा रही है।

चार चरणों में तैयार होता है एसेंशियल ऑयल

लेमन ग्रास की खेती से जुड़े किसान इंद्र ने स्थानीय मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि इस पौधे से निकलने वाला एसेंशियल ऑयल कुल चार प्रमुख चरणों की प्रक्रिया के बाद पूरी तरह तैयार होता है। इस पूरी प्रक्रिया में मुख्य रूप से लेमन ग्रास की पत्तियों की कटाई से लेकर उच्च दबाव वाली भाप के जरिए तेल निकालने का काम शामिल होता है। किसानों को इस तकनीक के बारे में अच्छी जानकारी है ताकि तेल की शुद्धता और गुणवत्ता पर कोई असर न पड़े।

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कटाई और डिस्टिलेशन टैंक की प्रक्रिया

इस पूरी प्रक्रिया की शुरुआत सबसे पहले लेमन ग्रास की कटाई से होती है, जिसमें पौधे की ताजी या फिर हल्की मुरझाई हुई पत्तियों को काटा जाता है। इसके बाद इन कटी हुई पत्तियों को अच्छी तरह साफ किया जाता है और डिस्टिलेशन टैंक यानी भाप वाले बर्तन में बहुत कसकर भर दिया जाता है। इस चरण के सामानांतर एक बड़े बॉयलर में पानी को उबाला जाता है जिससे उच्च दबाव वाली तेज भाप तैयार की जाती है। यह तैयार भाप टैंक के निचले हिस्से से अंदर की तरफ छोड़ी जाती है और ऊपर की दिशा में प्रवाहित होती है।

कंडेंसर और सेपरेटर का इस्तेमाल

भाप की तेज गर्मी और दबाव के कारण पत्तियों की अंदरूनी कोशिकाओं में मौजूद सुगंधित तेल वाष्पीकृत होकर भाप के साथ ऊपर उठता है। इसके बाद तेल और भाप का यह गर्म मिश्रण एक ठंडे पानी की कुंडली यानी कंडेंसर से होकर गुजरता है। इस चरण में ठंडक मिलने के कारण भाप और तेल का वाष्प वापस अपने तरल रूप में बदल जाता है। इसके बाद इस तरल मिश्रण को एक सेपरेटर जिसे फ्लोरेंटाइन सेपरेटर कहा जाता है, उसमें भेज दिया जाता है। चूंकि लेमन ग्रास का तेल पानी के मुकाबले हल्का होता है, इसलिए वह पानी की सतह पर तैरते हुए एक अलग परत बना लेता है। इसके बाद इस तेल को बहुत सावधानी से पानी की ऊपरी सतह से अलग कर लिया जाता है।

गुणवत्ता की जांच और पैकिंग

तेल को पानी से पूरी तरह अलग करने के बाद उसकी लैब जैसी गुणवत्ता की सख्त जांच की जाती है। इस जांच के दौरान तेल का रंग, उसकी भीनी खुशबू और डेंसिटी यानी घनत्व जैसे महत्वपूर्ण कारकों को परखा जाता है। गुणवत्ता के सभी मानकों पर खरा उतरने के बाद इस एसेंशियल ऑयल को बाजार में भेजने और बिक्री के लिए सुरक्षित रूप से पैक कर दिया जाता है। खेत पर ही इस तरह का प्लांट लग जाने से किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए लंबी दूरियां नहीं तय करनी पड़ती हैं और वे सीधे तैयार उत्पाद बाजार में उतार पाते हैं।

सवाल-जवाब

खूंटी के गुनी में कितने क्षेत्र में लेमन ग्रास की खेती हो रही है?
खूंटी के गुनी क्षेत्र में कुल 120 एकड़ जमीन पर लेमन ग्रास की खेती की जा रही है।
लेमन ग्रास से तेल निकालने की प्रक्रिया कितने चरणों में पूरी होती है?
लेमन ग्रास से एसेंशियल ऑयल निकालने की पूरी प्रक्रिया चार चरणों में पूरी होती है।
तेल निकालने के लिए पत्तियों को किस टैंक में भरा जाता है?
कटी हुई पत्तियों को साफ करके डिस्टिलेशन टैंक यानी भाप वाले बर्तन में कसकर भरा जाता है।
लेमन ग्रास का तेल पानी की सतह पर क्यों आ जाता है?
लेमन ग्रास का तेल पानी से हल्का होता है, इसलिए सेपरेटर में जाने के बाद यह पानी के ऊपर एक अलग परत बना लेता है।
बाजार में बेचने से पहले तेल की कौन सी विशेषताएं जांची जाती हैं?
बाजार में बेचने से पहले तेल के रंग, खुशबू और डेंसिटी यानी घनत्व की गुणवत्ता जांची जाती है।
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