खोई चाबी का आसान समाधान
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में अक्सर ऐसा होता है कि जल्दबाजी में बाइक, स्कूटी या फिर घर की चाबी कहीं खो जाती है। ऐसी स्थिति में पूरा काम रुक जाता है और लोग परेशान हो जाते हैं। लेकिन झारखंड के कोडरमा में रहने वाले लोगों को इस मुसीबत से निकालने के लिए एक बेहतरीन कारीगर मौजूद हैं। कोडरमा के झंडा चौक पर संजय कुमार पिछले 20 वर्षों से चाबी बनाने का काम कर रहे हैं। वे अपने पारंपरिक हुनर और लंबे अनुभव के दम पर लोगों की इस बड़ी परेशानी को चुटकियों में सुलझा देते हैं। संजय कुमार ने TrendKia को बताया कि उन्होंने चाबी बनाने की यह कला अपने पिता से विरासत में सीखी थी। आज उनके पास ऐसा हुनर है कि वे बिना असली चाबी के भी किसी भी ताले की डुप्लीकेट चाबी बहुत कम समय में बना देते हैं।
बिना मूल चाबी के कैसे बनती है नई चाबी?
संजय कुमार ने इस पूरी तकनीक के बारे में विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि बिना ओरिजिनल चाबी के नई चाबी तैयार करना बेहद सूझबूझ और बारीकी का काम है। इसमें सबसे पहले ताले के साइज, मोटाई और उसके मेटल के हिसाब से एक सादे सांचे वाली खाली चाबी चुनी जाती है। इसके बाद उस खाली चाबी को ताले के अंदर डाला जाता है और प्लास की मदद से उस पर थोड़ा दबाव बनाते हुए घुमाने की कोशिश की जाती है।
इस प्रक्रिया के दौरान ताले के अंदर फिट पिन चाबी की सतह पर छोटे-छोटे बारीक निशान छोड़ देते हैं। संजय इन निशानों को ध्यान से देखते हैं और एक विशेष फाइल टूल की मदद से चाबी को धीरे-धीरे घिसते हैं। यह पूरी प्रक्रिया तब तक दोहराई जाती है जब तक कि चाबी के कट ताले की सभी पिनों के साथ एकदम सटीक न बैठ जाएं। इस पूरी मेहनत में सामान्य रूप से सिर्फ 5 से 10 मिनट का समय लगता है और ताला आसानी से खुल जाता है।
होम सर्विस और चार्ज की पूरी जानकारी
संजय ने अपनी सेवाओं को ग्राहकों की सुविधा के अनुसार बेहद किफायती रखा है। उन्होंने बताया कि अगर कोई व्यक्ति अपने घर या दुकान का ताला बंद होने के कारण बाहर फंस गया है, तो वे सीधे मौके पर जाकर भी ताला खोलने और चाबी बनाने की सेवा देते हैं। इस विशेष आपातकालीन होम सर्विस के लिए वे सामान्य खर्च के अलावा सिर्फ 100 रुपये का अतिरिक्त चार्ज लेते हैं।
वहीं अगर दरों की बात करें, तो दोपहिया वाहनों की डुप्लीकेट चाबी बनाने के लिए वे 120 रुपये चार्ज करते हैं। इसके अलावा घरों में इस्तेमाल होने वाले सामान्य तालों की नई चाबी बनाने का शुल्क 100 रुपये प्रति पीस है। अपनी इस कला के जरिए वे न केवल अपनी आजीविका चला रहे हैं बल्कि संकट में फंसे लोगों की फौरी मदद भी कर रहे हैं।













