रांची के पिठोरिया थाना क्षेत्र में हुई आदिवासी सामाजिक कार्यकर्ता निशा भगत की आत्महत्या का मामला अब राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में तूल पकड़ता जा रहा है। मृतका के परिवार ने इस घटना को महज एक आत्महत्या मानने से इनकार कर दिया है और इसके पीछे एक गहरी साजिश होने का दावा किया है। परिवार ने सरकार और प्रशासन से इस पूरे प्रकरण की गहराई से पड़ताल करने की गुहार लगाई है।
पिता ने थाने में दिया लिखित आवेदन
गुमला जिले के घाघरा थाना क्षेत्र के जोरतांड गांव के रहने वाले मृतका के पिता इंदु भगत ने पिठोरिया थाने में लिखित आवेदन दर्ज कराया है। अपने आवेदन में उन्होंने आरोप लगाया है कि उनकी बेटी को लगातार मानसिक और सामाजिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था। पिता ने पुलिस से मांग की है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच की जाए और जो भी लोग इस प्रताड़ना के पीछे शामिल हैं, उन्हें सख्त सजा दी जाए। परिवार ने इस पूरी घटना की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो यानी सीबीआई से कराने की मांग की है।
परिवार और मां का छलका दर्द
अपनी इकलौती बेटी को खोने के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। मां का रो-रोकर बुरा हाल है और उन्होंने भावुक होकर कहा कि उनकी दुनिया उजड़ चुकी है। मां ने कहा कि उन्हें कभी इस बात का अंदेशा नहीं था कि उनकी बेटी इस तरह उन्हें हमेशा के लिए छोड़कर चली जाएगी। मां ने यह भी कहा कि इस दुखद घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश छिपी हुई है। उन्होंने त्योहार के माहौल का हवाला देते हुए कहा कि आज लक्ष्मी पूजा से ठीक पहले उनके घर की लक्ष्मी हमेशा के लिए चली गई।
सरकार की तरफ से उच्चस्तरीय जांच का आश्वासन
इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए झारखंड मुक्ति मोर्चा के प्रवक्ता और विधायक विकास मुंडा ने कहा कि सरकार इस घटना की उच्चस्तरीय जांच कराने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा कि एक आदिवासी बेटी का यूं चले जाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है और राज्य सरकार की पूरी संवेदनाएं पीड़ित परिवार के साथ जुड़ी हुई हैं। विकास मुंडा ने यह भी स्पष्ट किया कि यह समय किसी भी प्रकार की राजनीति करने का नहीं है, बल्कि संकट की इस घड़ी में पीड़ित परिवार के साथ चट्टान की तरह खड़े रहने का है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जांच के दौरान जिसका भी नाम सामने आएगा, उसे बख्शा नहीं जाएगा और दोषी पाए जाने वाले हर व्यक्ति के खिलाफ कड़ी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
मौत से पहले किया था फेसबुक लाइव
घटना से ठीक पहले शुक्रवार दोपहर को निशा भगत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आकर एक लाइव सत्र किया था। इस दौरान उन्होंने कई गंभीर आरोप साझा किए थे। उन्होंने अपनी इस मानसिक स्थिति और परेशानी के लिए राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, पुलिस प्रशासन और कुछ अन्य लोगों को जिम्मेदार ठहराया था। निशा भगत समाज में काफी सक्रिय रहती थीं और मुख्य रूप से सरना धर्म, आदिवासी अधिकारों, धर्मांतरण और जमीन से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर मुखर होकर अपनी बात रखती थीं। राजनीतिक क्षेत्र में भी उनकी सक्रियता रही थी और उन्होंने 2024 के विधानसभा चुनाव में जेएलकेएम के टिकट पर गुमला विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा था।
पुलिस कार्रवाई और अंतिम संस्कार की तैयारी
फेसबुक लाइव के दौरान ही उन्होंने पिठोरिया थाना प्रभारी को सीधे फोन करके अपनी जान देने की बात कही थी। इस बात की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस तुरंत हरकत में आई और मौके पर पहुंच कर उन्हें फंदे से नीचे उतारा। हालांकि, मौके पर मौजूद डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। इसके बाद उनके शव को पोस्टमार्टम के लिए रिम्स भेजा गया। प्राप्त जानकारी के अनुसार, पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद निशा भगत के पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार उनके पैतृक जिले गुमला में किया जाएगा। फिलहाल स्थानीय पुलिस इस पूरे मामले के हर पहलू की गहराई से जांच कर रही है ताकि मौत के असली कारणों का पता चल सके।



















