असम की राज्य कैबिनेट ने पूर्वी असम के शिवसागर और चराइदेव जिलों में इस साल तबाही मचाने वाली बाढ़ की असल वजहों का पता लगाने के लिए केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने कैबिनेट बैठक के बाद इस अहम फैसले की जानकारी साझा की। इसी बैठक में प्रशासन ने कर्मचारियों के आचरण से जुड़ा एक अन्य बड़ा फैसला लेते हुए बहुविवाह करने वाले सरकारी कर्मचारियों को सीधे सेवा से बर्खास्त करने और भविष्य की सरकारी नौकरियों के लिए अयोग्य घोषित करने के कड़े नियमों को भी स्वीकृति दी है।
पूर्वी असम में बाढ़ की परिस्थितियों की होगी केंद्रीय जांच
कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने बताया कि राज्य प्रशासन अगले 10 दिनों के भीतर केंद्र सरकार को औपचारिक पत्र भेजेगा। इस पत्र के जरिए शिवसागर और चराइदेव जिलों में आई भयानक बाढ़ के पीछे की परिस्थितियों और सटीक कारणों की सीबीआई से विस्तृत जांच कराने का अनुरोध किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि मामले की जांच केंद्रीय एजेंसी को सौंपे जाने का अंतिम निर्णय पूरी तरह से केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में होगा।
कुछ महीने पहले दिखौ नदी के उफान ने चराइदेव, शिवसागर और जोरहाट जिलों में भारी तबाही मचाई थी, जिससे कई प्रमुख इलाके जलमग्न हो गए थे। प्रस्तावित जांच का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जलप्रलय के लिए कौन से सटीक कारण जिम्मेदार थे। पूरे राज्य की बात करें तो असम में इस वर्ष बाढ़ से जुड़ी घटनाओं में कम से कम 108 लोगों की जान गई है। इसके अलावा प्रभावित जिलों में हजारों मकानों, स्कूलों, सड़कों, तटबंधों, पशु शेडों, मत्स्य पालन इकाइयों और स्वास्थ्य केंद्रों को व्यापक स्तर पर नुकसान पहुंचा है।
बहुविवाह करने वाले सरकारी कर्मचारियों पर बर्खास्तगी की गाज
राज्य कैबिनेट ने सरकारी कर्मचारियों द्वारा बहुविवाह किए जाने के मामलों पर सख्त कार्रवाई के लिए असम सेवा और अनुशासन नियमों में संशोधन के प्रस्ताव को भी अपनी मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री ने बताया कि संशोधित नियमों के तहत अगर कोई भी सरकारी कर्मचारी बहुविवाह का दोषी पाया जाता है, तो उसे तत्काल प्रभाव से सरकारी सेवा से बर्खास्त कर दिया जाएगा। इतना ही नहीं, ऐसा कर्मचारी भविष्य में किसी भी प्रकार के सरकारी रोजगार के लिए पूरी तरह अयोग्य घोषित रहेगा।
इस दंडात्मक प्रावधान को लागू करने के लिए कैबिनेट ने सेवा नियमों के नियम 7 के तहत खंड 6 को जोड़ने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने इस बात पर जोर दिया कि यह सख्त नियम किसी एक धर्म विशेष के लिए नहीं है, बल्कि हिंदू, मुस्लिम और ईसाई समेत सभी धार्मिक समुदायों के कर्मचारियों पर समान रूप से लागू होगा। यह कदम राज्य में समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में उठाए जा रहे कदमों के मद्देनजर उठाया गया है।
समान नागरिक संहिता विधेयक और आगे की रूपरेखा
असम विधानसभा ने 27 मई को समान नागरिक संहिता, असम, 2026 विधेयक पारित किया था। इस ऐतिहासिक कानून का मकसद विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव इन रिलेशनशिप से जुड़े मामलों के लिए एक साझा कानूनी ढांचा तैयार करना है, जो सभी नागरिकों पर बिना किसी धार्मिक भेदभाव के लागू होगा।
गृह और राजनीतिक विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अजय तिवारी ने 13 अक्टूबर को जानकारी दी थी कि मूल कानून को राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए केंद्र सरकार के पास भेजा जा चुका है। इसी बीच, एक आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, असम सरकार ने राज्य में इस समान नागरिक संहिता के प्रावधानों को धरातल पर लागू करने और जरूरी नियम तैयार करने के लिए एक विशेष समिति का गठन भी कर दिया है।



















