मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले के रहने वाले किसान सोमा ने अपनी कड़ी मेहनत और पक्के इरादे के बल पर कृषि क्षेत्र में एक अनूठी मिसाल कायम की है। कभी आर्थिक तंगी और सीमित संसाधनों के बीच जीवन बिताने वाले सोमा ने मजदूरी करके पाई-पाई जोड़ी और उसी बचत से अपने खेत में कुएं का निर्माण कराया। आज उनकी लगन का ही नतीजा है कि वे अपनी चार एकड़ जमीन पर पारंपरिक खेती से हटकर आधुनिक तरीके से मुनाफा कमा रहे हैं और उनकी तीसरी पीढ़ी भी पूरी निष्ठा के साथ इस पुश्तैनी पेशे से जुड़ी हुई है।
मजदूरी के पैसों से कुआं खुदवाकर शुरू की थी खेती
शुरुआती दिनों में सोमा के परिवार को भयंकर आर्थिक तंगियों का सामना करना पड़ता था। परिवार का भरण-पोषण करने के लिए उनके पिता नौकरी करते थे और सोमा खुद भी मजदूरी किया करते थे। उन्होंने अपनी मजदूरी की कमाई से पैसे बचाए और सबसे पहले अपने खेत में सिंचाई के लिए कुआं खुदवाने का फैसला किया। जैसे ही खेत में पानी की मुक्कमल व्यवस्था हुई, उन्होंने कृषि कार्यों को विधिवत रूप से आगे बढ़ाया। अनुभव की कमी और तंगहाली के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और धीरे-धीरे अपने कृषि क्षेत्र का दायरा फैलाते चले गए। उनके साथ ही उनके परिवार के अन्य सदस्य और अगली पीढ़ी भी इस कृषि कार्य में हाथ बंटाने के लिए आगे आ गई।
चार एकड़ में तुअर, कपास, सोयाबीन और सब्जियों का उत्पादन
वर्तमान समय में सोमा अपने चार एकड़ के भूभाग पर बड़े पैमाने पर मिश्रित खेती कर रहे हैं। वे एक ही फसल पर आश्रित रहने के बजाय अपने खेतों में तुअर, कपास और सोयाबीन के साथ-साथ विभिन्न प्रकार की हरी सब्जियों की भी बंपर पैदावार ले रहे हैं। उनका साफ तौर पर मानना है कि किसानों को पारंपरिक एकल फसल पद्धति से बाहर निकलकर विविधता अपनानी चाहिए। अलग-अलग प्रकार की फसलें लगाने से बाजार के उतार-चढ़ाव और मौसम की अनिश्चितता के जोखिम कम होते हैं तथा आमदनी के कई नए रास्ते खुल जाते हैं।
सही प्रबंधन और अनुभव से बदल रही है किसानों की तकदीर
सोमा का अनुभव बताता है कि कृषि के क्षेत्र में केवल शारीरिक मेहनत ही नहीं, बल्कि सटीक योजना और समय पर फसलों की देखभाल करना भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने अपनी सीमित चार एकड़ भूमि का बेहतरीन प्रबंधन करते हुए एक साथ कई फसलें उगाई हैं और अपनी वित्तीय स्थिति को पूरी तरह सुदृढ़ कर लिया है। आज वे खेती के जरिए सालाना लाखों रुपये की शुद्ध कमाई कर रहे हैं। उनकी यह प्रेरणादायक यात्रा यह साबित करती है कि अगर सही दिशा में मेहनत की जाए और कृषि प्रबंधन बेहतर हो, तो कम जमीन और कम संसाधनों के जरिए भी शानदार आर्थिक नतीजे हासिल किए जा सकते हैं।



















