पलामू जिले में गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों को इस समस्या से बाहर निकालकर सामान्य श्रेणी में लाने के लिए प्रशासनिक स्तर पर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में सरकार की ओर से विशेष रूप से शिशु शक्ति योजना का संचालन किया जा रहा है। यह पूरी पहल समर कार्यक्रम के अंतर्गत आगे बढ़ाई जा रही है, जिसके तहत बच्चों को पोषण तत्वों से भरपूर विशेष शिशु शक्ति आहार मुहैया कराया जा रहा है। शुरुआती दौर में ही इस योजना के नतीजे बेहद उत्साहजनक सामने आए हैं, जिससे स्वास्थ्य महकमे और जिला प्रशासन को बड़ी राहत मिली है।
एक महीने में दिखा सकारात्मक असर
पिछले एक महीने से नियमित रूप से शिशु शक्ति आहार का सेवन कर रहे बच्चों के स्वास्थ्य में बड़ा बदलाव देखा गया है। आंकड़ों के मुताबिक, इन बच्चों में से 40 से 50 प्रतिशत बच्चों की सेहत में साफ सुधार दर्ज किया गया है। स्थिति यह है कि इनमें से कई बच्चे अब गंभीर कुपोषण की श्रेणी से निकलकर सामान्य कुपोषित श्रेणी में पहुंच चुके हैं। इस तेज सुधार को देखकर विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में इन सभी बच्चों को पूरी तरह से स्वस्थ और सामान्य श्रेणी में लाने का लक्ष्य आसानी से हासिल किया जा सकेगा।
1300 बच्चों की हुई पहचान
इस पूरी योजना की रूपरेखा और आंकड़ों की जानकारी देते हुए जिला समाज कल्याण पदाधिकारी नीता चौहान ने स्पष्ट किया कि पलामू जिले के भीतर कुल 1300 अति कुपोषित बच्चों को चिन्हित किया गया था। इन सभी बच्चों के पोषण स्तर को ऊपर उठाने के लिए विशेष आहार तैयार करवाया गया है। इस आहार में शरीर के संपूर्ण विकास के लिए आवश्यक सभी जरूरी पोषक तत्वों को शामिल किया गया है ताकि बच्चों की शारीरिक कमी को तेजी से पूरा किया जा सके।
दवाओं और बेहतर प्रशिक्षण का सहारा
पोषक तत्वों से भरपूर आहार के अलावा स्वास्थ्य विभाग की ओर से इन सभी बच्चों को जरूरी चिकित्सीय सहायता और दवाएं भी समय पर उपलब्ध कराई जा रही हैं। आहार और दवाओं के इस मिले-जुले और नियमित इस्तेमाल से बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार लाने की प्रक्रिया को और तेज किया गया है। इस योजना को जमीनी स्तर पर पूरी तरह प्रभावी बनाने के लिए आंगनबाड़ी सेविकाओं को विशेष तौर पर प्रशिक्षित किया गया है। बेहतरीन कार्य करने वाली सेविकाओं को मास्टर ट्रेनर के रूप में तैयार किया गया है ताकि वे ग्रामीण स्तर पर योजना का बेहतर संचालन सुनिश्चित कर सकें।
सामान्य श्रेणी तक पहुंचाने का लक्ष्य
प्रशासन की रणनीति के तहत सबसे पहले अति कुपोषित बच्चों को कुपोषित श्रेणी में लाया जा रहा है और उसके बाद उन्हें सामान्य श्रेणी में पहुंचाने की अंतिम कोशिश की जा रही है। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान बच्चों को लगातार पौष्टिक आहार देने के साथ-साथ उनके स्वास्थ्य की कड़ी निगरानी भी रखी जा रही है। शुरुआती एक महीने में मिले इन सकारात्मक संकेतों को बाल विकास की दिशा में एक बड़ी सफलता माना जा रहा है।
निरंतर देखभाल की आवश्यकता
विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों को कुपोषण के चक्र से पूरी तरह मुक्त करने के लिए निरंतर देखभाल, संतुलित खानपान और स्वास्थ्य विभाग की सतत निगरानी बहुत आवश्यक है। जिस प्रकार से इस योजना का क्रियान्वयन हो रहा है, उससे यह उम्मीद मजबूत हुई है कि आने वाले दिनों में पलामू जिले के अधिकाधिक बच्चे कुपोषण के अंधकार से बाहर निकलकर एक स्वस्थ और उज्ज्वल जीवन की ओर कदम बढ़ा सकेंगे।




















