बुंदेलखंड की ऐतिहासिक धरती झांसी में वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई की विरासत को आगे बढ़ाते हुए ग्रामीण महिलाएं आर्थिक स्वावलंबन का नया अध्याय लिख रही हैं। बबीना ब्लॉक में सक्रिय वसंत एफपीओ से जुड़कर सैकड़ों महिलाएं अब घरेलू जिम्मेदारियों के साथ-साथ सफल उद्यमी के रूप में अपनी पहचान बना रही हैं। यह संगठन विशेष रूप से आर्थिक तंगी और सामाजिक पाबंदियों से जूझने वाली महिलाओं के लिए संबल बनकर उभरा है।
मसाला प्रसंस्करण और सप्लाई का व्यवस्थित नेटवर्क
वसंत एफपीओ से जुड़ी सुमन के अनुसार, इस पूरे उपक्रम का ढांचा पूरी तरह स्थानीय संसाधनों पर आधारित है। समूह की महिलाएं अलग-अलग किसानों से सीधे साबुत मसाले खरीदती हैं। इसके बाद इन मसालों को एफपीओ के केंद्र पर लाया जाता है, जहां उनकी कुटाई और पिसाई की जाती है। गुणवत्ता सुनिश्चित करने के बाद यहीं पर उनकी सुरक्षित पैकेजिंग की जाती है। तैयार मसालों को करीब 30 गांवों में नियमित रूप से पहुंचाया जाता है। कई गांवों में महिलाओं ने खुदरा दुकानें भी खोल ली हैं, जिससे उनकी बिक्री का दायरा बढ़ा है। स्थानीय ग्रामीण इलाकों के अलावा यह सामान ललितपुर, महोबा और चित्रकूट जैसे पड़ोसी जिलों के बाजारों तक भी पहुंच रहा है।
नियमित कमाई और सामाजिक बदलाव
मसाला निर्माण और वितरण की इस श्रृंखला में काम करने वाली प्रत्येक महिला हर महीने 5 से 6 हजार रुपये तक की आमदनी कर रही है। घर की चारदीवारी से निकलकर आर्थिक आत्मनिर्भरता हासिल करने से महिलाओं के सामाजिक दर्जे में बड़ा बदलाव आया है। संगठन में कई दिव्यांग और विधवा महिलाओं को भी शामिल कर उन्हें नियमित रोजगार उपलब्ध कराया गया है। जो महिलाएं पहले घर से बाहर कदम रखने में संकोच करती थीं, आज अपने गांवों में वे सम्मान की हकदार बन चुकी हैं और समाज उन्हें प्रेरणा के रूप में देख रहा है।
1 हजार महिलाओं को जोड़ने का लक्ष्य
वर्तमान में लगभग 700 महिलाएं इस किसान उत्पादक संगठन के माध्यम से अपनी आजीविका चला रही हैं। समूह के विस्तार को लेकर योजनाएं बनाई जा रही हैं। सुमन बताती हैं कि आगामी दिनों में इस एफपीओ के कामकाज को और अधिक संगठित रूप देकर 1 हजार से ज्यादा महिलाओं को इससे जोड़ने की तैयारी चल रही है, ताकि क्षेत्र की अन्य जरूरतमंद महिलाओं को भी आजीविका का ठोस सहारा मिल सके।


















