झारखंड के पलामू जिले में स्थित कौड़िया पंचायत के ग्रामीण अब बुनियादी सुविधाओं के लिए दूर-दराज के कस्बों और शहरों के चक्कर काटने को मजबूर नहीं हैं। एसबीआई फाउंडेशन के सहयोग से एडेंट संस्था द्वारा संचालित ग्राम सेवा परियोजना ने गांव के भीतर ही स्वास्थ्य, शिक्षा, पशु चिकित्सा और स्वरोजगार के रास्ते खोल दिए हैं। चुकरी गांव में स्थापित ग्राम सेवा केंद्र के जरिए स्थानीय लोगों को सरकारी योजनाओं की जानकारी देने, उनके ऑनलाइन व ऑफलाइन आवेदन फॉर्म भरने और अन्य जरूरी कागजी कार्रवाई में सीधी मदद दी जा रही है। इस व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए पंचायत के पांच गांवों में विशेष ग्राम सेवक तैनात किए गए हैं, जो हर घर से संपर्क कर ग्रामीणों की दैनिक समस्याओं और आवश्यकताओं का आंकड़ा तैयार करते हैं और संस्था तक पहुंचाते हैं।
घर-घर पहुंच रही निःशुल्क स्वास्थ्य जांच और दवाइयां
ग्रामीण इलाकों में बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी को दूर करने के लिए संस्था की ओर से 'एसबीआई संजीवनी' नाम से एक चलता-फिरता अस्पताल चलाया जा रहा है। संचालक संस्था के मैनेजर नितेश कुमार के अनुसार, यह मोबाइल मेडिकल वैन नियमित रूप से गांव-गांव और टोले-टोले जाकर लोगों के स्वास्थ्य की जांच करती है। इस सेवा के तहत ग्रामीणों को न केवल अनुभवी डॉक्टरों से चिकित्सीय परामर्श मिलता है, बल्कि जरूरी लैब जांच और दवाइयां भी बिना किसी शुल्क के मौके पर ही मुहैया कराई जाती हैं। इस व्यवस्था से बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को इलाज के लिए दूर के अस्पतालों में जाने की भागदौड़ से बड़ी राहत मिली है।
पशुपालकों के लिए कॉल पर उपलब्ध शालिहोत्र एक्सप्रेस
खेती-किसानी और पशुपालन पर निर्भर ग्रामीणों के लिए 'शालिहोत्र एक्सप्रेस' किसी वरदान से कम साबित नहीं हो रही है। यह एक समर्पित मोबाइल पशु चिकित्सा वैन है, जो मात्र एक फोन कॉल पर पशुपालकों के दरवाजे तक पहुंच जाती है। वैन के साथ आने वाली विशेषज्ञ मेडिकल टीम मवेशियों की बीमारियों की जांच करती है और उनका मौके पर ही इलाज करती है। इसमें फर्स्ट एड, विभिन्न संक्रामक रोगों का परीक्षण और मुफ्त दवाइयां शामिल हैं। इससे पहले ग्रामीणों को अपने बीमार पशुओं को इलाज के लिए निजी डॉक्टरों के पास ले जाना पड़ता था या दूर के सरकारी अस्पतालों के चक्कर लगाने पड़ते थे, जिससे भारी आर्थिक बोझ पड़ता था। अब इस निशुल्क सेवा से पशुपालकों का धन और समय दोनों बच रहा है।
महिलाओं का कौशल विकास और युवाओं को सेना-पुलिस की तैयारी
गांव की महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाने के लिए सिलाई और ब्यूटीशियन का व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। ब्यूटीशियन कोर्स के तहत महिलाओं को आइब्रो, फेशियल, हेयर कटिंग और मेकअप जैसी आधुनिक तकनीकों में निपुण बनाया जा रहा है। सबसे खास बात यह है कि प्रशिक्षण के साथ-साथ प्रैक्टिस और काम शुरू करने के लिए जरूरी किट व सामग्री भी बिना किसी शुल्क के दी जा रही है, ताकि प्रशिक्षण पूरा होते ही महिलाएं खुद का ब्यूटी पार्लर खोलकर अपनी कमाई शुरू कर सकें। इसके अलावा, गांव के प्रतिभावान युवाओं को सेना, पुलिस और सशस्त्र बलों की भर्ती प्रक्रियाओं में सफलता दिलाने के लिए शारीरिक और लिखित परीक्षा की तैयारी का विशेष प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।
स्मार्ट शिक्षा और कचरा प्रबंधन से संवर रहा पर्यावरण
कौड़िया पंचायत में पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता बनाए रखने के लिए विशेष कचरा संग्रह वाहन चलाया जा रहा है, जो नियमित रूप से घर-घर जाकर सूखा और गीला कचरा एकत्र करता है। इसके साथ ही, भावी पीढ़ी को आधुनिक शिक्षा से जोड़ने के लिए तेलैयबंध मध्य विद्यालय की सूरत बदल दी गई है। इस स्कूल को विकसित कर यहां कंप्यूटर लैब, साइंस लैब और डिजिटल स्मार्ट क्लास की सुविधाएं शुरू की गई हैं। इन अत्याधुनिक सुविधाओं के चलते अब गांव के बच्चे भी कंप्यूटर चलाना सीख रहे हैं और वैज्ञानिक प्रयोगों के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। एसबीआई फाउंडेशन और एडेंट संस्था का यह समन्वित प्रयास पलामू के ग्रामीण इलाकों में आत्मनिर्भरता की नई मिसाल कायम कर रहा है।



















