रांची में झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं का मामला अब देश की सर्वोच्च अदालत तक पहुंच गया है। इस संवेदनशील मामले को लेकर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई, जिसमें अदालत ने राज्य सरकार और केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI को नोटिस जारी कर उनका जवाब तलब किया है। इस पूरी कानूनी प्रक्रिया की अध्यक्षता कर रहे CJI सूर्यकांत की पीठ ने मामले की गंभीरता को समझते हुए यह कदम उठाया है। अदालत में याचिकाकर्ता हरिशरण देवगन की पैरवी करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता मनन कुमार मिश्रा ने पक्ष रखा।
याचिकाकर्ता की ओर से उठाए गए मुख्य मुद्दों में 19 अप्रैल 2026 को आयोजित हुई JPSC सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा को पूरी तरह रद्द करने की मांग शामिल है। इसके अलावा, याचिका में यह भी आग्रह किया गया है कि पूरी परीक्षा प्रक्रिया को सिरे से दोबारा आयोजित किया जाए और इस पूरी कथित धांधली की निष्पक्ष जांच CBI या फिर किसी स्वतंत्र एसआईटी से कराई जाए। अदालत के समक्ष यह भी दलील दी गई कि इन विवादों के चलते झारखंड के छात्र लंबे समय से सड़कों पर उतरकर लगातार प्रदर्शन और आंदोलन कर रहे हैं।
सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने वकीलों से सवाल किया कि क्या यह पूरा विवाद केवल एक परीक्षा से जुड़ा है या इसमें कई अन्य परीक्षाएं भी शामिल हैं। जवाब में वकील ने स्पष्ट किया कि यहां दो मुख्य मामले हैं, जिनमें एक JPSC से और दूसरा झारखंड स्टाफ सेलेक्शन कमीशन की परीक्षाओं से जुड़ा हुआ है। इसके साथ ही अदालत में न्यायिक सेवा परीक्षा का विषय भी चर्चा के केंद्र में आया। CJI ने इस बात पर भी गौर किया कि क्या न्यायिक सेवा की परीक्षाएं भी लोक सेवा आयोग द्वारा ही संचालित की जाती हैं, और यह भी कहा कि अदालत इस तकनीकी पहलू पर भी गहराई से विचार करेगी कि इन परीक्षाओं का आयोजन किस प्रकार होता है।
बहस को आगे बढ़ाते हुए याचिकाकर्ता के वकील ने दोहराया कि मामले की तह तक जाने के लिए CBI जांच बेहद जरूरी है, और साथ ही किसी सेवानिवृत्ति न्यायाधीश की देखरेख में जांच कराने का विकल्प भी रखा गया। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए CJI सूर्यकांत ने टिप्पणी की कि यह मामला केवल किसी साधारण जांच तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें एक पेशेवर जांच एजेंसी की सक्रिय भूमिका की आवश्यकता है क्योंकि इसके दायरे में फॉरेंसिक जांच जैसे तकनीकी पहलू भी शामिल हो सकते हैं। इन सभी दलीलों को सुनने के बाद पीठ ने औपचारिक रूप से नोटिस जारी करने का आदेश दिया। झारखंड सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील ने अदालत के इस नोटिस को स्वीकार कर लिया, और CJI ने इस मामले पर आगे की सुनवाई के लिए जल्द से जल्द नई तारीख तय करने के निर्देश भी दिए।
यह ध्यान देने योग्य है कि यह विशेष याचिका राज्य सरकार की ओर से परीक्षा रद्द किए जाने से जुड़े फैसले के आने से पहले ही दाखिल कर दी गई थी। वर्तमान परिस्थितियों में बदलाव आ चुका है, जिसके चलते अब सुप्रीम कोर्ट को यह भी निर्धारित करना होगा कि इस मामले में आगे सुनवाई जारी रखने की कोई आवश्यकता बची है या नहीं। इस बीच, कानूनी मोर्चे पर घटनाक्रम तब और तेज हो गया जब झारखंड हाईकोर्ट ने बीते 20 अगस्त को JPSC भर्ती परीक्षाओं के माध्यम से पूर्व में हुई नियुक्तियों को रद्द करने के राज्य सरकार के निर्णय पर रोक लगा दी थी। हाईकोर्ट के इस अंतरिम आदेश के बाद से यह पूरा प्रकरण और अधिक पेचीदा और महत्वपूर्ण बन गया है। JPSC परीक्षा विवाद को लेकर पूरे राज्य के युवाओं और छात्रों में भारी असंतोष है और वे लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, ऐसे में अब सुप्रीम कोर्ट द्वारा नोटिस जारी किए जाने के बाद सबकी निगाहें इस मामले की अगली सुनवाई पर टिकी हुई हैं।





















