पलामू में शादियों का दौर शुरू होते ही बाजारों की रौनक और चमक काफी बढ़ गई है। साल के इस हिस्से में यानी नवंबर और दिसंबर के महीनों में विवाह के कई सारे शुभ मुहूर्त आ रहे हैं, जिससे पूरे इलाके के बाजारों में जमकर खरीदारी का सिलसिला चल पड़ा है। दुल्हन के विशेष श्रृंगार से जुड़े सामान बेचने वाली दुकानों पर भी नए और आकर्षक कलेक्शन सजा दिए गए हैं। इनमें चूड़ों की अलग-अलग और आधुनिक वैरायटी महिलाओं के साथ-साथ युवतियों को भी अपनी तरफ खूब आकर्षित कर रही है। भारतीय परंपरा में सुहाग की निशानी के रूप में चूड़े का विशेष महत्व होता है और आज के समय में शादी के बाद करीब एक महीने तक लगातार चूड़ा पहनने का चलन भी बहुत तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।
मेदिनीनगर के बाजारों में सजा नया कलेक्शन
मेदिनीनगर शहर के प्रमुख रूप-रंग श्रृंगार मार्केट में इस शादी सीजन के मद्देनजर चूड़ों की तमाम नई वैरायटी उपलब्ध करा दी गई हैं। बाजार में आने वाली दुल्हनों और महिलाओं के लिए उनकी पसंद और बजट के हिसाब से कई डिजाइन के चूड़े मौजूद हैं। स्थानीय दुकानदार राजीव कुमार बताते हैं कि इस बार पारंपरिक लाल और सफेद रंगों के अलावा कई रंगों वाले कलरफुल चूड़ों की मांग में काफी तेजी आई है। इसके अलावा पीले, सफेद, लाल और नीले रंगों के बेहतरीन कॉम्बिनेशन वाले चूड़े भी इस साल बाजार के लेटेस्ट ट्रेंड में शामिल हैं। वहीं दूसरी तरफ, सफेद मोतियों और चमकते स्टोन वर्क से सजे हुए डिजाइन भी महिलाओं को बहुत अधिक भा रहे हैं।
कश्मीरी चूड़ों और घुंघरुओं का नया क्रेज
दुकानदार का कहना है कि उनकी दुकान लाल कोठा के समीप पिछले 25 वर्षों से लगातार संचालित हो रही है और इस बार भी शादी के सीजन को ध्यान में रखकर स्पेशल नया कलेक्शन मंगाया गया है। इन दिनों बाजार में कश्मीरी चूड़ों की मांग सबसे ज्यादा देखी जा रही है। इसके साथ ही चूड़ों में लगे हुए घुंघरू महिलाओं की खास पसंद बन चुके हैं। ग्राहकों की खास डिमांड और पसंद को ध्यान में रखते हुए चूड़ों के सेट में अलग से घुंघरू लगाकर भी तैयार किए जा रहे हैं। इस मार्केट में लाह के पारंपरिक चूड़े, यादगार फोटो वाले चूड़े और खूबसूरत स्टोन वर्क वाले दुल्हन चूड़े लगभग 200 रुपये से लेकर 2000 रुपये तक की वाजिब कीमत पर आसानी से मिल रहे हैं।
राजवाड़ी चूड़ों की सबसे ज्यादा हो रही है बिक्री
दुकानदारों के अनुसार इस बार के वेडिंग सीजन में राजवाड़ी चूड़ों की मांग सबसे ऊपरी पायदान पर बनी हुई है। इस खास तरह के चूड़े की सबसे बड़ी खूबी इसका पारंपरिक और बेहद शाही लुक होता है, जो हर किसी का ध्यान खींच लेता है। चूड़े की सतह पर उकेरे गए शानदार सांस्कृतिक डिजाइन इसे और भी ज्यादा आकर्षक बनाते हैं। इसके अलावा स्टोन वर्क के साथ-साथ हाथी, घोड़ा और मोर जैसे खूबसूरत पारंपरिक डिजाइन भी इन चूड़ों पर उकेरे जा रहे हैं। इन शाही राजवाड़ी चूड़ों की शुरुआती कीमत डिजाइन और बारीक कारीगरी के आधार पर 1000 रुपये से शुरू होकर 5000 रुपये तक पहुंच रही है।
दुल्हन के पूरे लुक का अहम हिस्सा बना चूड़ा
आज के समय में शादी के बाजार में चूड़ा सिर्फ सुहाग की पारंपरिक निशानी तक ही सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह आधुनिक दुल्हन के पूरे श्रृंगार और लुक का एक बेहद अहम और जरूरी हिस्सा बन चुका है। आजकल की महिलाएं अपनी पसंद की साड़ी, खूबसूरत लहंगे और शादी के अन्य तमाम आभूषणों के साथ परफेक्ट मैचिंग करते हुए चूड़ों का चयन कर रही हैं। यही मुख्य वजह है कि मौजूदा शादी सीजन में पारंपरिक राजवाड़ी डिजाइनों से लेकर मॉडर्न और कलरफुल चूड़ों तक की जबरदस्त मांग पूरे पलामू के बाजारों में लगातार बनी हुई है।



















