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भीख मांगने वाली बुजुर्ग महिला के घर से निकला खजाना, 20 बोरियों में मिले 30 लाख से ज्यादा रुपयेकर्नाटक
24 अग॰ 2026, 1:57 pm (1 घंटे पहले)· 2

भीख मांगने वाली बुजुर्ग महिला के घर से निकला खजाना, 20 बोरियों में मिले 30 लाख से ज्यादा रुपये

कर्नाटक के मांड्या में मस्जिद के बाहर भीख मांगने वाली बुजुर्ग महिला हूर की मौत के बाद उसके घर से 20 बोरियों में भरे सिक्के और नोट मिले, जिनकी कुल कीमत 30 से 40 लाख रुपये के बीच है।

कर्नाटक के मांड्या शहर से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां एक बुजुर्ग महिला लंबे समय तक मस्जिद के बाहर बैठकर लोगों से मदद मांगती रही, लेकिन उसकी मौत के बाद उसके घर से ऐसा खजाना निकला जिसे देखकर हर कोई दंग रह गया। महिला के छोटे से मकान के अंदर 20 बोरियों में भरकर सिक्के और नोट रखे हुए थे। जब इस बड़ी रकम की गिनती की गई, तो यह 30 लाख रुपये से ज्यादा निकली, जबकि स्थानीय लोगों का अनुमान है कि कुल राशि 30 से 40 लाख रुपये के बीच हो सकती है।

कौन थीं बुजुर्ग महिला हूर और क्या था उनका जीवन

यह पूरा मामला मांड्या शहर के गुट्टालु लेआउट का है, जहां हूर नाम की बुजुर्ग महिला रहती थीं। वह इलाके की एक स्थानीय मस्जिद के बाहर बैठकर रोज भीख मांगती थीं और लोगों से मिलने वाली छोटी-मोटी मदद से अपना गुजारा करती थीं। मस्जिद में आने-जाने वाले हर शख्स के लिए उनका वहां बैठना एक आम बात थी। जब लोग उनसे पूछते, तो वह अक्सर यही कहती थीं कि उनकी देखभाल करने वाला कोई नहीं है और परिवार के लोग उनका ठीक से ख्याल नहीं रखते, इसलिए उन्हें अपनी आजीविका चलाने के लिए मजबूरी में भीख मांगनी पड़ती है। इस तरह उन्होंने अपनी जिंदगी के कई साल गुजार दिए।

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मौत के बाद खुला रहस्यों का पिटारा

बढ़ती उम्र के साथ हूर को कोई गंभीर बीमारी हो गई थी, जिसके कारण अंततः उनकी मृत्यु हो गई। उनके निधन के बाद आस-पड़ोस के लोगों ने आगे आकर उनके अंतिम संस्कार की पूरी व्यवस्था की। जब अंतिम संस्कार पूरा होने के बाद कुछ लोग उनके घर के अंदर पहुंचे, तो वहां का नजारा देखकर उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। घर के भीतर नोटों और सिक्कों से भरी हुई कुल 20 बोरियां रखी हुई थीं। किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था कि जिस महिला को लोग बेसहारा और लाचार समझकर मदद देते थे, उसने इस तरह से चुपचाप इतनी बड़ी रकम जोड़ ली होगी।

25 लोगों ने शुरू की नोटों और सिक्कों की गिनती

घर के अंदर बोरियों में भरा खजाना मिलने के बाद इलाके में चर्चा फैल गई। स्थानीय लोगों ने मिलकर इस अकूत संपत्ति को गिनने का फैसला किया। इसके बाद करीब 25 लोग इकट्ठा हुए और नोटों तथा सिक्कों की गिनती का काम शुरू किया गया। स्थानीय निवासी नूर ने जानकारी देते हुए बताया कि इतनी बड़ी मात्रा में नकदी देखकर वहां मौजूद हर शख्स हैरान रह गया। जब गिनती पूरी हुई तो सामने आया कि यह रकम 30 लाख रुपये से अधिक है, और स्थानीय लोगों के मुताबिक कुल राशि 30 से 40 लाख रुपये तक हो सकती है।

मस्जिद कमेटी ने लिया पैसे लेने से इनकार

जब इतनी भारी-भरकम नकदी सामने आई, तो यह सवाल खड़ा हुआ कि अब इन पैसों का क्या किया जाना चाहिए। चूंकि हूर ने अपने जीवन के कई साल उसी मस्जिद के बाहर बैठकर भीख मांगते हुए बिताए थे, इसलिए कुछ स्थानीय लोगों ने यह राय दी कि इस जमा की गई रकम को मस्जिद को दान कर दिया जाना चाहिए। हालांकि, मस्जिद कमेटी ने इस प्रस्ताव को सिरे से ठुकरा दिया। कमेटी का स्पष्ट कहना था कि यह पैसे भीख मांगकर जमा किए गए हैं, इसलिए वे इसे स्वीकार नहीं करेंगे।

परिवार और पुलिस की क्या रही भूमिका

प्राप्त जानकारी के अनुसार, हूर के दो भाई थे। उनमें से एक भाई की आर्थिक स्थिति अच्छी थी, इसलिए उसने इस पैसे में किसी भी तरह का हिस्सा लेने से साफ इनकार कर दिया। इसके बाद उनका दूसरा भाई अपने परिवार के साथ मौके पर पहुंचा। स्थानीय लोगों के बीच आपसी बातचीत और चर्चा के बाद, दूसरे भाई ने कथित तौर पर वह सारी नकदी अपने कब्जे में ले ली। इस अजीबोगरीब घटना ने पूरे इलाके में एक नई बहस छेड़ दी है। कुछ स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि जो महिला जिंदगीभर अपने परिजनों द्वारा उपेक्षित किए जाने और देखभाल न मिलने का रोना रोती रही, उसकी मौत के बाद वही छोड़ी गई संपत्ति लोगों की मुख्य चर्चा का विषय बन गई है। यह पूरा मामला मांड्या ईस्ट पुलिस स्टेशन के अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत आता है। हालांकि, पुलिस की तरफ से इस मामले में किसी प्रकार का हस्तक्षेप नहीं किया गया, क्योंकि किसी भी पक्ष ने पैसे को लेकर कोई औपचारिक शिकायत या आपत्ति दर्ज नहीं कराई थी।

सवाल-जवाब

बुजुर्ग महिला हूर कहां रहती थीं?
हूर कर्नाटक के मांड्या शहर के गुट्टालु लेआउट में रहती थीं।
हूर के घर से कुल कितने पैसे मिले?
गिनती के बाद उनके घर से 30 लाख रुपये से अधिक की नकदी मिली, जो 30 से 40 लाख रुपये के बीच हो सकती है।
पैसे कहां छिपाकर रखे गए थे?
पैसे उनके छोटे से घर के अंदर 20 बोरियों में सिक्के और नोटों के रूप में भरे हुए थे।
मस्जिद कमेटी ने पैसे लेने से क्यों मना कर दिया?
मस्जिद कमेटी ने यह कहते हुए पैसे लेने से इनकार कर दिया कि यह राशि भीख मांगकर जमा की गई थी।
पुलिस ने इस मामले में क्या कार्रवाई की?
पुलिस ने इस मामले में कोई हस्तक्षेप नहीं किया क्योंकि किसी भी पक्ष ने पैसे को लेकर कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई थी।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·35 मिनट पहले

मांड्या की यह घटना मानवीय मनोविज्ञान और सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। एक तरफ जहां महिला का इस तरह वर्षों तक पैसे जोड़ना गंभीर मानसिक स्थिति या गहरी असुरक्षा की ओर इशारा करता है, वहीं दूसरी ओर प्रशासन और स्थानीय निकायों की नाकामी भी साफ दिखती है कि कोई बुजुर्ग महिला बिना किसी सहारे के जीवन काट रही थी और किसी को भनक तक नहीं लगी। अब यह कानूनी और प्रशासनिक जांच का विषय है कि इस अकूत नकदी का विधिक उत्तराधिकारी कौन होगा और क्या इसमें किसी आपराधिक षड्यंत्र या कर चोरी का एंगल है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·35 मिनट पहले

यह मामला सिर्फ एक व्यक्तिगत विचित्रता नहीं, बल्कि हमारी वित्तीय समावेशन और जमीनी प्रशासनिक निगरानी की विफलता को दर्शाता है। जब कोई नागरिक बैंकिंग प्रणाली से पूरी तरह कटकर घर में नकदी का अंबार लगा ले, तो यह नियामक संस्थाओं और स्थानीय खुफिया तंत्र के लिए भी एक चेतावनी है। आगे चलकर यह संपत्ति कानूनी दांव-पेच में फंसेगी, क्योंकि बिना वैध वारिस और स्पष्ट आय स्रोत के इसका निस्तारण दीवानी अदालतों और आयकर विभाग के लंबी प्रक्रिया के अधीन होगा।

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