बिहार के सरकारी स्कूलों में शिक्षक बनने की राह देख रहे उम्मीदवारों के लिए महत्वपूर्ण अपडेट सामने आया है। राज्य में चल रहे छात्र प्रदर्शनों के बीच बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) ने एक अहम प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया। आयोग की ओर से परीक्षा नियंत्रक राजेश कुमार ने जानकारी दी कि बहुप्रतीक्षित TRE 4 परीक्षा का आयोजन इसी साल दिसंबर महीने में या फिर आगामी जनवरी में किया जा सकता है। इस पूरी चयन प्रक्रिया को अब दो अलग-अलग चरणों यानी प्रारंभिक परीक्षा और मुख्य परीक्षा में विभाजित कर दिया गया है, जिसमें दोनों ही स्तरों पर वस्तुनिष्ठ यानी ऑब्जेक्टिव प्रकार के सवाल पूछे जाएंगे।
हाल के दिनों में बिहार में शिक्षक भर्ती के चौथे चरण और सत्तरवीं सिविल सेवा परीक्षा को लेकर विद्यार्थियों द्वारा विरोध प्रदर्शन किए जा रहे थे। छात्रों के इन आंदोलनों और उठ रहे सवालों का जवाब देने के लिए ही आयोग ने यह प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई थी। इसके अलावा, असिस्टेंट इंजीनियर भर्ती से जुड़े मामले पर बोलते हुए अधिकारी ने स्पष्ट किया कि जब तक अदालत के इस मुकदमे का पूरी तरह से निपटारा नहीं हो जाता, तब तक आयोग की ओर से इससे जुड़े परिणाम घोषित करने की दिशा में कोई भी प्रशासनिक कदम उठाना संभव नहीं होगा।
परीक्षा पैटर्न और दो चरणों की व्यवस्था पर आयोग का रुख
परीक्षा नियंत्रक राजेश कुमार ने मीडिया के सामने स्पष्ट किया कि शिक्षक बहाली की प्रक्रिया को दो चरणों में रखने का निर्णय सोच-समझकर लिया गया है। उन्होंने दलील दी कि संघ लोक सेवा आयोग समेत देश के कई अन्य राज्य आयोग भी दो से तीन चरणों में परीक्षाएं करवाते हैं। इसके अलावा, नीट यूजी परीक्षा संपन्न होने के बाद राधाकृष्णन समिति ने भी अपनी रिपोर्ट में दो चरणों में परीक्षा आयोजित करने की संस्तुति की थी।
चौथे चरण की शिक्षक भर्ती को लेकर कई तरह की अफवाहें और भ्रांतियां फैलाई जा रही हैं। इस पर सफाई देते हुए उन्होंने कहा कि कुछ लोग यह प्रचारित कर रहे हैं कि यह आयोग देश का पहला ऐसा निकाय है जो पीटी और मेंस दोनों ले रहा है, जबकि यह सच्चाई से कोसों दूर है। आर्थिक अपराध इकाई और अन्य जांच एजेंसियों की तरफ से मिले महत्वपूर्ण सुझावों के आधार पर ही यह फैसला लिया गया है कि परीक्षा अब दो चरणों में संपन्न कराई जाएगी।
नेगेटिव मार्किंग और हिंदी भाषियों के अंकों को लेकर स्थिति साफ
परीक्षा में नेगेटिव मार्किंग के प्रावधान को लेकर उठ रहे सवालों के संबंध में उन्होंने कहा कि आज के समय में लगभग सभी प्रतियोगी परीक्षाओं में नकारात्मक अंकन की व्यवस्था लागू है। यह नियम सभी अभ्यर्थियों के लिए बिल्कुल एक समान है, इसलिए इससे चयन प्रक्रिया पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ता है।
कुछ हलकों में यह दावा किया जा रहा है कि हिंदी माध्यम के परीक्षार्थियों को जानबूझकर कम अंक दिए जा रहे हैं। इस आरोप को सिरे से खारिज करते हुए उन्होंने सवाल उठाया कि जब ऐसा कोई डेटा आयोग के पास मौजूद ही नहीं है, तो दूसरों के पास यह जानकारी कहां से आ सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि परीक्षा फॉर्म भरते वक्त विद्यार्थियों से इस बात की जानकारी मांगी ही नहीं जाती है कि वे किस भाषा के माध्यम से परीक्षा दे रहे हैं। इसलिए हिंदी भाषी छात्रों को कम नंबर मिलने का दावा पूरी तरह निराधार है।
मूल्यांकन प्रक्रिया और परीक्षा की संभावित तारीख
उत्तर पुस्तिकाओं की जांच को लेकर उन्होंने बताया कि यदि किसी छात्र को साठ प्रतिशत से ज्यादा अंक प्राप्त होते हैं, तो उस कॉपी को दोबारा मुख्य परीक्षक से जांच करवाया जाता है, हालांकि साठ प्रतिशत से अधिक अंक देने पर किसी प्रकार की कोई रोक नहीं है।
जहां तक TRE-4 परीक्षा की निश्चित तारीख का सवाल है, अधिकारियों का कहना है कि अभी परीक्षा की सटीक तिथि घोषित नहीं की जा सकती है। इसकी मुख्य वजह यह है कि फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि कुल कितने परीक्षार्थी इस परीक्षा के लिए आवेदन करेंगे। कुल आवेदनों की संख्या मिलने के बाद ही परीक्षा की तारीख तय की जाएगी, क्योंकि इसके लिए आवेदन प्रक्रिया तीस सितंबर तक चलने वाली है। आयोग ने यह भी साफ कर दिया है कि आने वाले समय में उनकी हर परीक्षा अनिवार्य रूप से दो चरणों में ही आयोजित होगी।



















