कर्नाटक में दो प्रमुख सरकारी भर्ती परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर धांधली और गड़बड़ी के आरोपों के बाद राज्य सरकार संकट में घिर गई है। कर्नाटक लोक सेवा आयोग की ओर से आयोजित वेटनरी ऑफिसर भर्ती और पुलिस विभाग की सिविल पुलिस सिपाही परीक्षा को लेकर उम्मीदवारों ने भारी आक्रोश व्यक्त किया है। धोखाधड़ी के पुख्ता सबूत सामने आने के बाद मामला अब अदालत की चौखट तक पहुंच गया है, जिसके बाद प्रशासन को जांच के आदेश देने पड़े हैं।
वेटनरी ऑफिसर भर्ती में ओएमआर शीट बदलने के आरोप
कर्नाटक लोक सेवा आयोग ने बीते 17 जुलाई को वेटनरी ऑफिसर के 400 पदों के लिए सफल उम्मीदवारों की सूची प्रकाशित की थी। हालांकि, नतीजे आते ही अभ्यर्थियों ने प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए ओएमआर शीट में हेरफेर और रिश्वतखोरी के गंभीर आरोप लगाए। परीक्षा देने वाले युवाओं का दावा है कि प्रत्येक पद को 80 लाख रुपये से लेकर 1 करोड़ रुपये तक में बेचा गया है। अभ्यर्थियों ने धांधली का भंडाफोड़ करने के लिए बिचौलियों का स्टिंग ऑपरेशन भी किया, जिसमें ऑडियो रिकॉर्डिंग, वीडियो और तस्वीरें प्रमाण के तौर पर सामने लाई गईं।
इस मामले में कार्रवाई करते हुए कर्नाटक पुलिस ने सिकंदर चौधरी और आरिफ मोहम्मद मुल्ला नाम के दो बिचौलियों को गिरफ्तार कर लिया है। जब यह मामला कर्नाटक हाई कोर्ट पहुंचा, तो अदालत ने प्रस्तुत साक्ष्यों को देखने के बाद तीखी टिप्पणी करते हुए इसे दिनदहाड़े की गई धोखाधड़ी करार दिया। विवाद बढ़ता देख राज्य सरकार ने भर्ती प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से रोक दिया है और पूरे मामले की जांच सीआईडी को सौंप दी है। इसके अलावा एक एसआईटी का गठन भी किया गया है, जिसे हाई कोर्ट ने 6 अगस्त तक अपनी जांच रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है।
सिविल पुलिस सिपाही परीक्षा में ओएमआर क्रमांक पर बवाल
वेटनरी परीक्षा का विवाद अभी शांत भी नहीं हुआ था कि रविवार को आयोजित सिविल पुलिस सिपाही भर्ती परीक्षा में भी भारी हंगामा देखने को मिला। इस परीक्षा के जरिए कुल 1453 पदों को भरा जाना था। परीक्षा केंद्रों पर मौजूद अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि प्रश्न पत्र का नंबर और ओएमआर शीट का सीरियल नंबर आपस में मेल नहीं खा रहा था। इस गड़बड़ी से नाराज होकर कई छात्रों ने परीक्षा का पूरी तरह से बहिष्कार कर दिया और जमकर विरोध प्रदर्शन किया।
हालांकि, कर्नाटक एग्जामिनेशन अथॉरिटी ने पेपर लीक की खबरों को सिरे से खारिज कर दिया है। अथॉरिटी का कहना है कि प्रश्न पत्र और ओएमआर शीट के नंबर का समान होना अनिवार्य नहीं है और यह केवल एक भ्रम की स्थिति थी, जिसे मौके पर ही दूर कर दिया गया था। दूसरी तरफ, राजनीतिक स्तर पर इस मुद्दे को लेकर तीखे हमले शुरू हो चुके हैं। केंद्रीय मंत्री शोभा करंदलाजे ने राज्य सरकार पर गड़बड़ी दबाने का आरोप लगाते हुए इस पूरे प्रकरण की सीबीआई जांच की मांग की है।
सियासी घमासान और प्रियंक खरगे का तीखा पलटवार
इन दोनों परीक्षाओं में हुए हंगामे के बाद राज्य में राजनीतिक पारा चढ़ गया है। विपक्ष में बैठी बीजेपी ने कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियंक खरगे के इस्तीफे की मांग की है। हालांकि, प्रियंक खरगे ने विपक्ष के आरोपों पर एक हैरान करने वाला बयान दिया। उन्होंने कहा कि पहले छात्रों को 25 दिनों तक भूख हड़ताल पर बैठना चाहिए, लाठीचार्ज झेलना चाहिए, तब जाकर उनके इस्तीफे का समय आएगा। अपने इस तंज में उन्होंने केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के मामले का उदाहरण दिया कि इतना सब होने के बाद ही उन्होंने कदम उठाया था।
इसके साथ ही प्रियंक खरगे ने कर्नाटक में बीजेपी के पिछले शासनकाल को याद दिलाते हुए कहा कि जब उनकी सरकार के दौरान पेपर लीक की घटनाएं हुई थीं, तब बीजेपी ने अपने मंत्रियों से इस्तीफे क्यों नहीं लिए थे? फिलहाल सीआईडी और एसआईटी की जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है, जिससे इस व्यापक भर्ती घोटाले की असल परतें खुल सकेंगी।


















