कर्नाटक के सियासी गलियारों में अंदरूनी खींचतान और सत्ता संघर्ष को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है. केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व पर तीखा हमला बोलते हुए दावा किया है कि राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने अपनी स्वेच्छा से पद से इस्तीफा नहीं दिया था, बल्कि उन्हें एक सोची-समझी रणनीति के तहत हटने के लिए विवश किया गया था. इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में कथित तौर पर एक गोपनीय स्टिंग ऑपरेशन को मुख्य हथियार बताया जा रहा है, जिसे लेकर दोनों खेमों में जुबानी जंग तेज हो गई है.
कथित स्टिंग ऑपरेशन और कुर्सी छोड़ने के दावे
एचडी कुमारस्वामी के बयानों के अनुसार, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डीके शिवकुमार ने सिद्धारमैया से जुड़ी कुछ बेहद गोपनीय गतिविधियों अथवा बातचीत की गुप्त रिकॉर्डिंग कराई थी. आरोप लगाया गया है कि इस स्टिंग रिकॉर्डिंग का इस्तेमाल बाद में राजनीतिक सौदेबाजी और दबाव बनाने के लिए किया गया. इसी आंतरिक दबाव के चलते सिद्धारमैया को आखिरकार मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़नी पड़ी. कुमारस्वामी ने इस समूचे मामले को बेहद गंभीर बताते हुए साफ किया है कि सत्ता परिवर्तन के पीछे सामान्य राजनीतिक प्रक्रिया नहीं बल्कि यह दबाव की रणनीति थी.
हालांकि, इस पूरे प्रकरण में अभी तक कोई भी डिजिटल साक्ष्य, वीडियो क्लिप या ऑडियो रिकॉर्डिंग सार्वजनिक पटल पर नहीं रखी गई है. यह संपूर्ण विवाद फिलहाल एचडी कुमारस्वामी के राजनीतिक आरोपों और बयानों पर ही टिका हुआ है. उस कथित स्टिंग में वास्तव में क्या बातचीत दर्ज थी, उसे किस समय और किस तकनीक से रिकॉर्ड किया गया था, इसके संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है.
कांग्रेस की तीखी प्रतिक्रिया और आरोपों का खंडन
कुमारस्वामी के इस सनसनीखेज बयान के सामने आते ही कांग्रेस खेमे ने जोरदार पलटवार किया है. कांग्रेस के मीडिया एवं संचार विभाग के अध्यक्ष रमेश बाबू ने इन सभी दावों को सिरे से खारिज करते हुए इन्हें पूरी तरह निराधार और राजनीति से प्रेरित करार दिया है. पार्टी का कहना है कि विपक्ष केवल ध्यान भटकाने और सरकार की छवि खराब करने के इरादे से ऐसे मनगढ़ंत आरोप लगा रहा है.
दूसरी ओर, डीके शिवकुमार ने भी इस विवाद के बीच एक अलग दावा सामने रखा है. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री बनने के बाद खुद उन्हें भी फंसाने के लिए एक स्टिंग ऑपरेशन रचने का प्रयास किया गया था. शिवकुमार ने स्पष्ट किया कि उनके पास इस साजिश और षड्यंत्र से संबंधित कुछ अहम दस्तावेज और तस्वीरें मौजूद हैं. उनके इस बयान ने राज्य के भीतर चल रही खुफिया रणनीतियों और राजनीतिक दांव-पेचों की चर्चा को और गरमा दिया है.
जांच की मांग और राज्य के राजनीतिक समीकरण
इस पूरे मामले को लेकर एचडी कुमारस्वामी ने औपचारिक जांच की मांग उठाई है, ताकि कथित स्टिंग विवाद की वास्तविकता सबके सामने आ सके. फिलहाल राजनीतिक विश्लेषक इस बात पर नजर बनाए हुए हैं कि क्या इस मामले में कोई अधिकृत प्रशासनिक या कानूनी जांच शुरू होगी और क्या आरोप लगाने वाले पक्ष की ओर से कोई ठोस प्रमाण पेश किए जाएंगे. कर्नाटक की सियासत में दोनों तरफ से लग रहे इन आरोपों के बीच असली स्थिति तभी स्पष्ट हो सकेगी, जब किसी स्वतंत्र जांच के माध्यम से दस्तावेज और साक्ष्य सामने आएंगे.





















